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छत्तीसगढ़ की 15 सबसे अहम सीटें: मुख्यमंत्री के सामने भतीजे की चुनौती, दो पूर्व आईएएस भी हैं चुनावी मैदान में
Fri, 17 Nov 2023 07:19 AM IST
शिवेंद्र तिवारी
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
Published by: शिवेंद्र तिवारी
Updated Fri, 17 Nov 2023 07:19 AM IST
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छत्तीसगढ़ विधानसभा चुनाव 2023
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विस्तार
छत्तीसगढ़ में दूसरे चरण की 70 विधानसभा सीटों पर आज मतदान हो रहा है। मतदाता चुनाव में उतरे 958 प्रत्याशियों की किस्मत का फैसला करेंगे, जिनमें कई मंत्री और पूर्व मंत्री भी शमिल हैं। सबसे ज्यादा चर्चा प्रदेश की ऐसी ही हॉट सीटों की हैं।ऐसे में आज हम आपको बता रहे हैं छत्तीसगढ़ की 15 हॉट सीटों के बारे में...। इन सीटों पर प्रमुख चेहरा कौन है? सीट चर्चा में क्यों? यहां पिछले तीन चुनाव में क्या नतीजे रहे हैं? आइये जनते हैं सब कुछ...
छत्तीसगढ़ विधानसभा चुनाव 2023
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1. पाटन
छत्तीसगढ़ की सबसे हाई प्रोफाइल सीट पाटन है। यहां से मुख्यमंत्री भूपेश बघेल कांग्रेस की तरफ से मैदान में हैं। वहीं सीएम के खिलाफ भाजपा ने भूपेश के भतीजे विजय बघेल को टिकट दिया है। चाचा-भतीजे की सियासी जंग ने इस सीट को सबसे चर्चित सीट बना दिया है।
पाटन सीट से मुख्यमंत्री भूपेश बघेल लगातार चुनाव जीतते आ रहे हैं। कांग्रेस ने उन्हें साल 1993 से लेकर अब तक छह बार चुनावी मैदान में उतार चुकी है, जिनमें वो पांच बार बाजी मारी है। वहीं पिछले तीन नतीजों पर गौर करें तो वर्ष 2008 में एक बार भाजपा का खाता खुला था। तब विजय ने चाचा भूपेश को 7,842 मतों से हराया था। अगले दो चुनावों में भूपेश बघेल ने कांग्रेस को जीत दिलाई। 2013 में भूपेश बघेल 9,343 वोटों के अंतर से चुनाव जीतने में सफल रहे। वहीं 2018 का परिणाम देखें तो भूपेश बघेल ने भाजपा प्रत्याशी मोतीलाल साहू को 27,477 मतों से हराया था।
छत्तीसगढ़ की सबसे हाई प्रोफाइल सीट पाटन है। यहां से मुख्यमंत्री भूपेश बघेल कांग्रेस की तरफ से मैदान में हैं। वहीं सीएम के खिलाफ भाजपा ने भूपेश के भतीजे विजय बघेल को टिकट दिया है। चाचा-भतीजे की सियासी जंग ने इस सीट को सबसे चर्चित सीट बना दिया है।
पाटन सीट से मुख्यमंत्री भूपेश बघेल लगातार चुनाव जीतते आ रहे हैं। कांग्रेस ने उन्हें साल 1993 से लेकर अब तक छह बार चुनावी मैदान में उतार चुकी है, जिनमें वो पांच बार बाजी मारी है। वहीं पिछले तीन नतीजों पर गौर करें तो वर्ष 2008 में एक बार भाजपा का खाता खुला था। तब विजय ने चाचा भूपेश को 7,842 मतों से हराया था। अगले दो चुनावों में भूपेश बघेल ने कांग्रेस को जीत दिलाई। 2013 में भूपेश बघेल 9,343 वोटों के अंतर से चुनाव जीतने में सफल रहे। वहीं 2018 का परिणाम देखें तो भूपेश बघेल ने भाजपा प्रत्याशी मोतीलाल साहू को 27,477 मतों से हराया था।
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2. अंबिकापुर
उप-मुख्यमंत्री टीएस सिंहदेव की दावेदारी से अंबिकापुर सीट सुर्खियों में है। उपमुख्यमंत्री का चुनावी हलफनामा भी चर्चा का विषय रहा, जिसमें उन्होंने अपनी कुल 447 करोड़ रुपये की संपत्ति बताई है। अबकी बार टीएस 'बाबा' का मुकाबला भाजपा के राजेश अग्रवाल से है।
इस सीट पर पिछले तीन चुनावों में तस्वीर लगभग एक जैसी ही रही है। तीनों ही बार कांग्रेस से टीएस सिंहदेव और भाजपा से भजपा अनुराग सिंहदेव आमने-सामने दिखे। साल 2008 के विधानसभा चुनाव में टीएस सिंहदेव बाजी मारी। यही सिलसिला साल 2013 और साल 2018 के चुनाव में बरकरार रहा। 2013 में टीएस सिंहदेव 19,558 वोटों से जबकि 2018 में 39,624 वोटों से जीत मिली।
उप-मुख्यमंत्री टीएस सिंहदेव की दावेदारी से अंबिकापुर सीट सुर्खियों में है। उपमुख्यमंत्री का चुनावी हलफनामा भी चर्चा का विषय रहा, जिसमें उन्होंने अपनी कुल 447 करोड़ रुपये की संपत्ति बताई है। अबकी बार टीएस 'बाबा' का मुकाबला भाजपा के राजेश अग्रवाल से है।
इस सीट पर पिछले तीन चुनावों में तस्वीर लगभग एक जैसी ही रही है। तीनों ही बार कांग्रेस से टीएस सिंहदेव और भाजपा से भजपा अनुराग सिंहदेव आमने-सामने दिखे। साल 2008 के विधानसभा चुनाव में टीएस सिंहदेव बाजी मारी। यही सिलसिला साल 2013 और साल 2018 के चुनाव में बरकरार रहा। 2013 में टीएस सिंहदेव 19,558 वोटों से जबकि 2018 में 39,624 वोटों से जीत मिली।
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3. सक्ती
यहां से विधानसभा अध्यक्ष चरण दास महंत चुनाव लड़ रहे हैं। कांग्रेस ने पहली ही सूची में विधानसभा अध्यक्ष चरण दास महंत को सक्ती से फिर से टिकट दिया था। महंत के सामने भाजपा ने खिलावन साहू को अपना उम्मीदवार घोषित किया है।
यहां बीते तीन में से दो मुकाबलों में कांग्रेस का पड़ला भारी रहा है। 2008 में सरोजा मनहरण राठौड़ ने कांग्रेस को 9,392 वोटों से जीत दिलाई थी। अगले चुनाव में भारतीय जनता पार्टी के टिकट पर डॉ. खिलावन साहू 9,033 वोटों से चुनाव जीते। वहीं 2018 में कांग्रेस के चरण दास महंत ने भाजपा की मेधा राम साहू को 30,046 वोटों से शिकस्त दी थी।
यहां से विधानसभा अध्यक्ष चरण दास महंत चुनाव लड़ रहे हैं। कांग्रेस ने पहली ही सूची में विधानसभा अध्यक्ष चरण दास महंत को सक्ती से फिर से टिकट दिया था। महंत के सामने भाजपा ने खिलावन साहू को अपना उम्मीदवार घोषित किया है।
यहां बीते तीन में से दो मुकाबलों में कांग्रेस का पड़ला भारी रहा है। 2008 में सरोजा मनहरण राठौड़ ने कांग्रेस को 9,392 वोटों से जीत दिलाई थी। अगले चुनाव में भारतीय जनता पार्टी के टिकट पर डॉ. खिलावन साहू 9,033 वोटों से चुनाव जीते। वहीं 2018 में कांग्रेस के चरण दास महंत ने भाजपा की मेधा राम साहू को 30,046 वोटों से शिकस्त दी थी।
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4. दुर्ग ग्रामीण
छत्तीसगढ़ के गृह मंत्री ताम्रध्वज साहू दुर्ग ग्रामीण से कांग्रेस के टिकट पर दावेदारी पेश कर रहे हैं। वहीं भाजपा ने ललित चंद्राकर को यहां से अपना उम्मीदवार बनाया है। इस सीट पर पिछले तीन में से दो चुनावों में भाजपा को जीत मिली है, जबकि पिछली बार ही कांग्रेस ने सफलता हासिल की थी। 2008 में हेमचंद यादव ने भारतीय जनता पार्टी को 702 वोटों से जीत दिलाई थी। अगले चुनाव में रामशीला साहू ने भाजपा को 2,979 वोटों से चुनाव जिताया। वहीं पिछले मुकाबले में ताम्रध्वज साहू ने भाजपा के जागेश्वर साहू को 27,112 वोटों से हराया था।
छत्तीसगढ़ के गृह मंत्री ताम्रध्वज साहू दुर्ग ग्रामीण से कांग्रेस के टिकट पर दावेदारी पेश कर रहे हैं। वहीं भाजपा ने ललित चंद्राकर को यहां से अपना उम्मीदवार बनाया है। इस सीट पर पिछले तीन में से दो चुनावों में भाजपा को जीत मिली है, जबकि पिछली बार ही कांग्रेस ने सफलता हासिल की थी। 2008 में हेमचंद यादव ने भारतीय जनता पार्टी को 702 वोटों से जीत दिलाई थी। अगले चुनाव में रामशीला साहू ने भाजपा को 2,979 वोटों से चुनाव जिताया। वहीं पिछले मुकाबले में ताम्रध्वज साहू ने भाजपा के जागेश्वर साहू को 27,112 वोटों से हराया था।
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5. रायगढ़
छत्तीसगढ़ विधानसभा की वीआईपी सीटों में से इस बार रायगढ़ सीट पर सबकी निगाह टिकी है। यहां इस बार फिर पूर्व आईएएस ओपी चौधरी रायगढ़ से चुनाव लड़ रहे हैं। इस बार भाजपा ने उनकी सीट बदल दी है। इस बार पार्टी उन्हें खरसिया की जगह रायगढ़ से चुनाव लड़ा रही है। ओपी चौधरी के सामने कांग्रेस से प्रकाश शक्रजीत नाइक हैं।
यहां के पुराने समीकरण देखें तो साल 2008 के चुनाव में रायगढ़ विधानसभा क्षेत्र से कांग्रेस उम्मीदवार डॉक्टर शक्राजीत नायक को 12,944 वोटों से जीत मिली थी। 2013 में हुए विधानसभा चुनाव में रायगढ़ विधानसभा सीट से भाजपा उम्मीदवार रोशन लाल ने 20,592 वोटों से जीत हासिल की थी। वहीं रायगढ़ विधानसभा चुनाव परिणाम 2018 पर नजर नजर डालें, तो मुख्य मुकाबला कांग्रेस और भाजपा के बीच हुआ था। कांग्रेस के प्रकाश नायक ने भाजपा के रोशनलाल को 14,580 वोटों के अंतर से परास्त किया था।
छत्तीसगढ़ विधानसभा की वीआईपी सीटों में से इस बार रायगढ़ सीट पर सबकी निगाह टिकी है। यहां इस बार फिर पूर्व आईएएस ओपी चौधरी रायगढ़ से चुनाव लड़ रहे हैं। इस बार भाजपा ने उनकी सीट बदल दी है। इस बार पार्टी उन्हें खरसिया की जगह रायगढ़ से चुनाव लड़ा रही है। ओपी चौधरी के सामने कांग्रेस से प्रकाश शक्रजीत नाइक हैं।
यहां के पुराने समीकरण देखें तो साल 2008 के चुनाव में रायगढ़ विधानसभा क्षेत्र से कांग्रेस उम्मीदवार डॉक्टर शक्राजीत नायक को 12,944 वोटों से जीत मिली थी। 2013 में हुए विधानसभा चुनाव में रायगढ़ विधानसभा सीट से भाजपा उम्मीदवार रोशन लाल ने 20,592 वोटों से जीत हासिल की थी। वहीं रायगढ़ विधानसभा चुनाव परिणाम 2018 पर नजर नजर डालें, तो मुख्य मुकाबला कांग्रेस और भाजपा के बीच हुआ था। कांग्रेस के प्रकाश नायक ने भाजपा के रोशनलाल को 14,580 वोटों के अंतर से परास्त किया था।
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6. खरसिया
यह ऐसी सीट है जहां आजादी के बाद से अब तक भाजपा नहीं जीत पाई है। छत्तीसगढ़ का खरसिया भाजपा के पितृ पुरुष माने जाने वाले स्वर्गीय लखीराम अग्रवाल का गढ़ हुआ करता था। एक समय में पूरे अविभाजित मध्यप्रदेश और छत्तीसगढ़ भाजपा की राजनीति यहीं से संचालित हुआ करती थी। यह नगर रमन सरकार में नगरीय निकाय मंत्री रहे अमर अग्रवाल का गृह क्षेत्र भी है। बावजूद इसके आजादी के बाद से लेकर अब तक भाजपा यहां कभी जीत हासिल नहीं कर पाई है। इस बार यहां कांग्रेस के मौजूदा विधायक उमेश पटेल का मुकाबला भाजपा के महेश साहू से होगा।
पुराने आंकड़े देखें तो 2008 में कांग्रेस के दिग्गज नेता नंद कुमार पटेल ने कांग्रेस को 33,428 वोटों से जीत दिलाई थी। 25 मई 2013 को झीरम घाटी में नक्सली हमले में नंदकुमार पटेल की मौत हो गई। उसी साल हुए चुनाव में कांग्रेस ने उनके बेटे उमेश पटेल को टिकट दिया जो 38,888 वोटों से चुनाव जीते। 2018 के विधानसभा चुनाव में रायगढ़ जिले की खरसिया सीट से कांग्रेस के उमेश पटले जीते थे। इस चुनाव में उमेश पटेल ने भाजपा के ओपी चौधरी को 16,967 मतों से हराया था।
यह ऐसी सीट है जहां आजादी के बाद से अब तक भाजपा नहीं जीत पाई है। छत्तीसगढ़ का खरसिया भाजपा के पितृ पुरुष माने जाने वाले स्वर्गीय लखीराम अग्रवाल का गढ़ हुआ करता था। एक समय में पूरे अविभाजित मध्यप्रदेश और छत्तीसगढ़ भाजपा की राजनीति यहीं से संचालित हुआ करती थी। यह नगर रमन सरकार में नगरीय निकाय मंत्री रहे अमर अग्रवाल का गृह क्षेत्र भी है। बावजूद इसके आजादी के बाद से लेकर अब तक भाजपा यहां कभी जीत हासिल नहीं कर पाई है। इस बार यहां कांग्रेस के मौजूदा विधायक उमेश पटेल का मुकाबला भाजपा के महेश साहू से होगा।
पुराने आंकड़े देखें तो 2008 में कांग्रेस के दिग्गज नेता नंद कुमार पटेल ने कांग्रेस को 33,428 वोटों से जीत दिलाई थी। 25 मई 2013 को झीरम घाटी में नक्सली हमले में नंदकुमार पटेल की मौत हो गई। उसी साल हुए चुनाव में कांग्रेस ने उनके बेटे उमेश पटेल को टिकट दिया जो 38,888 वोटों से चुनाव जीते। 2018 के विधानसभा चुनाव में रायगढ़ जिले की खरसिया सीट से कांग्रेस के उमेश पटले जीते थे। इस चुनाव में उमेश पटेल ने भाजपा के ओपी चौधरी को 16,967 मतों से हराया था।
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7. कोटा
कोटा उन सीटों में शामिल है जहां राजघराने से ताल्लुक रखने वाले उम्मीदवार मैदान में हैं। यहां जशपुर राजघराने से आने वाले प्रबल प्रताप सिंह जूदेव भाजपा के टिकट पर चुनाव लड़ रहे हैं। प्रबल प्रताप सिंह जूदेव बीजेपी के दिग्गज नेता रहे दिलीप सिंह जुदेव के बेटे हैं। कांग्रेस ने अटल श्रीवास्तव को टिकट दिया है। यहीं से वर्तमान विधायक और जनता कांग्रेस के संस्थापक अजीत जोगी की पत्नी रेणु जोगी भी चुनाव मैदान में हैं।
यहां पिछले तीनों मुकाबले रेणु जोगी के ही खाते में गए हैं। 2008 और 2013 में रेणु जोगी ने कांग्रेस के टिकट पर क्रमशः 9,811 और 5,089 वोटों से जीत दर्ज की थी। वहीं 2018 के चुनाव में रेणु जनता कांग्रेस के टिकट पर 3,026 वोटों से जीती थीं।
कोटा उन सीटों में शामिल है जहां राजघराने से ताल्लुक रखने वाले उम्मीदवार मैदान में हैं। यहां जशपुर राजघराने से आने वाले प्रबल प्रताप सिंह जूदेव भाजपा के टिकट पर चुनाव लड़ रहे हैं। प्रबल प्रताप सिंह जूदेव बीजेपी के दिग्गज नेता रहे दिलीप सिंह जुदेव के बेटे हैं। कांग्रेस ने अटल श्रीवास्तव को टिकट दिया है। यहीं से वर्तमान विधायक और जनता कांग्रेस के संस्थापक अजीत जोगी की पत्नी रेणु जोगी भी चुनाव मैदान में हैं।
यहां पिछले तीनों मुकाबले रेणु जोगी के ही खाते में गए हैं। 2008 और 2013 में रेणु जोगी ने कांग्रेस के टिकट पर क्रमशः 9,811 और 5,089 वोटों से जीत दर्ज की थी। वहीं 2018 के चुनाव में रेणु जनता कांग्रेस के टिकट पर 3,026 वोटों से जीती थीं।
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8. रायपुर नगर दक्षिण
इस चुनाव में राजधानी के रण पर भी सबकी नजर होगी, क्योंकि यहां प्रदेश की राजनीति में खासा दखल रखने वाले नेताओं की प्रतिष्ठा दांव पर है। यहां की चर्चित सीट रायपुर नगर दक्षिण की बात करें तो 1990 से लगातार सातवीं बार विधायक और पूर्व मंत्री बृजमोहन अग्रवाल को आठवीं जीत से रोकने के लिए कांग्रेस ने दूधाधारी मठ के मठाधीश महंत रामसुंदर दास को मैदान में उतारा है। मुख्यमंत्री भूपेश बघेल के करीबी महंत रामसुंदर दास वर्तमान में गोसेवा आयोग के अध्यक्ष भी हैं।
पिछले तीन चुनाव के समीकरण देखें तो तीनों बार भाजपा के टिकट पर पूर्व मंत्री बृजमोहन अग्रवाल ने जीत दर्ज की है। 2008, 2013 और 2028 में अग्रवाल के जीत का अंतर क्रमशः 24,939, 34,799 और 17,496 वोटों का था।
इस चुनाव में राजधानी के रण पर भी सबकी नजर होगी, क्योंकि यहां प्रदेश की राजनीति में खासा दखल रखने वाले नेताओं की प्रतिष्ठा दांव पर है। यहां की चर्चित सीट रायपुर नगर दक्षिण की बात करें तो 1990 से लगातार सातवीं बार विधायक और पूर्व मंत्री बृजमोहन अग्रवाल को आठवीं जीत से रोकने के लिए कांग्रेस ने दूधाधारी मठ के मठाधीश महंत रामसुंदर दास को मैदान में उतारा है। मुख्यमंत्री भूपेश बघेल के करीबी महंत रामसुंदर दास वर्तमान में गोसेवा आयोग के अध्यक्ष भी हैं।
पिछले तीन चुनाव के समीकरण देखें तो तीनों बार भाजपा के टिकट पर पूर्व मंत्री बृजमोहन अग्रवाल ने जीत दर्ज की है। 2008, 2013 और 2028 में अग्रवाल के जीत का अंतर क्रमशः 24,939, 34,799 और 17,496 वोटों का था।
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9. रायपुर पश्चिम
भाजपा के पूर्व मंत्री रहे राजेश मूणत और कांग्रेस से वर्तमान विधायक विकास उपाध्याय आमने-सामने हैं। पिछले चुनाव में मूणत की लगातार तीन जीत का क्रम तोड़ते हुए विकास ने सफलता हासिल की थी। 2008 और 2013 में राजेश मूणत ने क्रमशः 14,845 और 6,160 वोटों से अपने चुनाव जीते थे। वहीं पिछले चुनाव में कांग्रेस को विकास उपाध्याय ने मूणत के सामने 12,212 वोटों से जीत दिलाई थी।
भाजपा के पूर्व मंत्री रहे राजेश मूणत और कांग्रेस से वर्तमान विधायक विकास उपाध्याय आमने-सामने हैं। पिछले चुनाव में मूणत की लगातार तीन जीत का क्रम तोड़ते हुए विकास ने सफलता हासिल की थी। 2008 और 2013 में राजेश मूणत ने क्रमशः 14,845 और 6,160 वोटों से अपने चुनाव जीते थे। वहीं पिछले चुनाव में कांग्रेस को विकास उपाध्याय ने मूणत के सामने 12,212 वोटों से जीत दिलाई थी।
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10. राजिम
इस विधानसभा सीट से कांग्रेस के अमितेश शुक्ल का मुकाबला भाजपा प्रत्याशी रोहित साहू से है। बीते चुनावों पर नजर डालें तो 2008 में अमितेश शुक्ल ने कांग्रेस को 3,916 वोटों से जीत दिलाई थी। अगले चुनाव में संतोष उपाध्याय ने भारतीय जनता पार्टी को 2,441 वोटों से पार्टी को सफलता दिलाई। वहीं पिछली बार अमितेश शुक्ल ने कांग्रेस को 58,132 वोटों से जीत हासिल की थी।
इस विधानसभा सीट से कांग्रेस के अमितेश शुक्ल का मुकाबला भाजपा प्रत्याशी रोहित साहू से है। बीते चुनावों पर नजर डालें तो 2008 में अमितेश शुक्ल ने कांग्रेस को 3,916 वोटों से जीत दिलाई थी। अगले चुनाव में संतोष उपाध्याय ने भारतीय जनता पार्टी को 2,441 वोटों से पार्टी को सफलता दिलाई। वहीं पिछली बार अमितेश शुक्ल ने कांग्रेस को 58,132 वोटों से जीत हासिल की थी।
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11. डोंडी-लोहारा
यहां से कैबिनेट मंत्री अनिला भेंड़िया पर कांग्रेस ने दूसरी बार भरोसा जताया है। वहीं भाजपा ने देवलाल ठाकुर को इस सीट पर अपना उम्मीदवार बनाया है। 2008 में यहां भाजपा की नीलिमा सिंह टेकाम 3,987 वोटों से जीती थीं। अगले दो चुनाव में कांग्रेस के टिकट पर अनिला भेंडिया ने क्रमशः 19,735 और 33,103 वोटों से जीत दर्ज की थी।
यहां से कैबिनेट मंत्री अनिला भेंड़िया पर कांग्रेस ने दूसरी बार भरोसा जताया है। वहीं भाजपा ने देवलाल ठाकुर को इस सीट पर अपना उम्मीदवार बनाया है। 2008 में यहां भाजपा की नीलिमा सिंह टेकाम 3,987 वोटों से जीती थीं। अगले दो चुनाव में कांग्रेस के टिकट पर अनिला भेंडिया ने क्रमशः 19,735 और 33,103 वोटों से जीत दर्ज की थी।
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12. चन्द्रपुर
चन्द्रपुर सीट से भाजपा ने जशपुर राजघराने से आने वाली संयोगिता सिंह जूदेव को उतारा है। वहीं कांग्रेस ने राम कुमार यादव को चुनाव लड़ाया है। इस सीट पर 2008 और 2013 में संयोगिता के पति युद्धवीर सिंह जूदेव भारतीय जनता पार्टी के टिकट पर क्रमशः 17,290 और 6 ,217 वोटों से विजयी हुए थे। 2018 में कांग्रेस के राम कुमार यादव को चुनाव में 4,418 वोटों से जीत मिली थी।
चन्द्रपुर सीट से भाजपा ने जशपुर राजघराने से आने वाली संयोगिता सिंह जूदेव को उतारा है। वहीं कांग्रेस ने राम कुमार यादव को चुनाव लड़ाया है। इस सीट पर 2008 और 2013 में संयोगिता के पति युद्धवीर सिंह जूदेव भारतीय जनता पार्टी के टिकट पर क्रमशः 17,290 और 6 ,217 वोटों से विजयी हुए थे। 2018 में कांग्रेस के राम कुमार यादव को चुनाव में 4,418 वोटों से जीत मिली थी।
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13. दुर्ग शहर
दूसरी सूची में कांग्रेस ने दुर्ग जिले की दुर्ग शहर सीट से अरुण वोरा को अपना उम्मीदवार बनाया है। मध्य प्रदेश के पूर्व मुख्यमंत्री मोतीलाल वोरा के बेटे अरुण वोरा दुर्ग शहर के मौजूदा विधायक हैं। भाजपा ने यहां गजेंद्र यादव को अपना प्रत्याशी घोषित किया है।
2008 में हेमचंद यादव ने भारतीय जनता पार्टी को 702 वोटों से जीत मिली थी। अगले दोनों चुनावों में अरुण वोरा ने कांग्रेस को क्रमशः 5,621 और 21,081 वोटों के अंतर् से पार्टी को सफलता दिलाई थी।
दूसरी सूची में कांग्रेस ने दुर्ग जिले की दुर्ग शहर सीट से अरुण वोरा को अपना उम्मीदवार बनाया है। मध्य प्रदेश के पूर्व मुख्यमंत्री मोतीलाल वोरा के बेटे अरुण वोरा दुर्ग शहर के मौजूदा विधायक हैं। भाजपा ने यहां गजेंद्र यादव को अपना प्रत्याशी घोषित किया है।
2008 में हेमचंद यादव ने भारतीय जनता पार्टी को 702 वोटों से जीत मिली थी। अगले दोनों चुनावों में अरुण वोरा ने कांग्रेस को क्रमशः 5,621 और 21,081 वोटों के अंतर् से पार्टी को सफलता दिलाई थी।
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14. साजा
कांग्रेस ने दिग्गज नेता रवीन्द्र चौबे को टिकट दिया है। वहीं, भाजपा ने एक गैर राजनीति व्यक्ति ईश्वर साहू को टिकट दिया है। इसी साल सांप्रदायिक हिंसा में ईश्वर के बेटे की जान चली गई थी।
2008 में कांग्रेस के टिकट पर रवीन्द्र चौबे को 5,055 वोटों से जीत मिली थी। अगले चुनाव में लाभचंद बाफना ने भारतीय जनता पार्टी को 9,620 वोटों से जीत दिलाई थी। वहीं 2018 में रवीन्द्र चौबे ने वापसी की और भाजपा के उम्मीदवार को 31,535 वोटों से हरा दिया।
कांग्रेस ने दिग्गज नेता रवीन्द्र चौबे को टिकट दिया है। वहीं, भाजपा ने एक गैर राजनीति व्यक्ति ईश्वर साहू को टिकट दिया है। इसी साल सांप्रदायिक हिंसा में ईश्वर के बेटे की जान चली गई थी।
2008 में कांग्रेस के टिकट पर रवीन्द्र चौबे को 5,055 वोटों से जीत मिली थी। अगले चुनाव में लाभचंद बाफना ने भारतीय जनता पार्टी को 9,620 वोटों से जीत दिलाई थी। वहीं 2018 में रवीन्द्र चौबे ने वापसी की और भाजपा के उम्मीदवार को 31,535 वोटों से हरा दिया।
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15. केशकाल
यहां भाजपा ने कोंडागांव जिले के पूर्व कलेक्टर नीलकंठ टेकाम को उम्मीदवार बनाया है। छत्तीसगढ़ के 2008 बैच के IAS ऑफिसर नीलकंठ टेकाम के वीआरएस के आवेदन पर केंद्र सरकार ने 17 अगस्त 2023 को मंजूरी दे दी थी जिसके बाद वह भाजपा में शामिल हुए थे। नीलकंठ के सामने कांग्रेस से संत राम नेताम हैं। पिछले नतीजे देखें तो 2008 में भाजपा से सेवकराम नेताम 8,614 वोटों से जीते थे। वहीं 2013 और 2018 में कांग्रेस के संतराम नेताम जीते जिनके जीत का अंतर क्रमशः 8,689 और 16,972 वोटों का रहा।
यहां भाजपा ने कोंडागांव जिले के पूर्व कलेक्टर नीलकंठ टेकाम को उम्मीदवार बनाया है। छत्तीसगढ़ के 2008 बैच के IAS ऑफिसर नीलकंठ टेकाम के वीआरएस के आवेदन पर केंद्र सरकार ने 17 अगस्त 2023 को मंजूरी दे दी थी जिसके बाद वह भाजपा में शामिल हुए थे। नीलकंठ के सामने कांग्रेस से संत राम नेताम हैं। पिछले नतीजे देखें तो 2008 में भाजपा से सेवकराम नेताम 8,614 वोटों से जीते थे। वहीं 2013 और 2018 में कांग्रेस के संतराम नेताम जीते जिनके जीत का अंतर क्रमशः 8,689 और 16,972 वोटों का रहा।