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Pune: देश के इस थाने में है म्यूजिक रूम, हर शाम पुलिसवाले गाते हैं लता-रफी के नगमे
Sun, 15 Jan 2023 11:10 PM IST
शिव शरण शुक्ला
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, पुणे
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, पुणे
Published by: शिव शरण शुक्ला
Updated Sun, 15 Jan 2023 11:10 PM IST
सार
माइक और स्पीकर मिलने के बाद उत्साहित पुलिसकर्मियों ने संगीत में रुचि दिखानी शुरू की। इसके बाद अधिकारियों ने थाने में कराओके सिस्टम, मिक्सर और सिंगिंग माइक जैसे कुछ उच्च-स्तरीय उपकरण खरीदने की योजना बनाई। उनके इस कदम में एक स्थानीय गुरुद्वारे ने भी मदद की।
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पुणे पुलिस।
- फोटो : pti
विस्तार
महाराष्ट्र के पुणे जिले का एक पुलिस स्टेशन और वहां कार्यरत पुलिस वाले इन दिनों खूब चर्चाओं में है। हालांकि लश्कर पुलिस थाने की चर्चाओं का कारण पुलिसिया कार्रवाई से इतर है। दरअसल, यहां पुलिस वालों पर काम का दबाव कम करने के लिए एक कमरे में गाने-बजाने की व्यवस्था की गई है। पुणे शहर के छावनी क्षेत्र में स्थित यह पुलिस स्टेशन ना केवल महाराष्ट्र बल्कि शायद देश का पहला ऐसा स्टेशन है, जहां एक म्यूजिक रूम की व्यवस्था है। इस पुलिस स्टेशन में कराओके सिस्टम, स्पीकर, साउंड मिक्सर लगाया गया है।
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तनाव मुक्त करने के लिए उठाया गया कदम
दिन भर की कड़ी मेहनत के बाद यहां कार्यरत पुलिस के जवान इस कमरे में आराम करते हैं। इस दौरान वे लता मंगेशकर, किशोर कुमार, मोहम्मद रफी और अपने पसंदीदा गायकों के गानों को गाते और सुनते हैं। वरिष्ठ निरीक्षक अशोक कदम इस पहल को लेकर बताते हैं कि पुलिस पर काम को लेकर बहुत दबाव रहता है, जिसके कारण वे कई बार तनावग्रस्त भी हो जाते हैं, इसका असर काम के साथ-साथ उनकी निजी जिंदगी पर भी पड़ता है। ऐसे में इस पहल के जरिए उन्हें तनाव मुक्त करने की कोशिश की गई है।
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वरिष्ठ निरीक्षक अशोक कदम ने बताया कि कोविड-19 महामारी के खत्म होने के बाद अपने कर्मचारियों को तनावमुक्त करने के लिए हमने एक संगीत चिकित्सक डॉ. संतोष बोराडे की मदद से एक संगीत चिकित्सा सत्र आयोजित किया था। उन्होंने कहा कि संगीत तनाव को दूर करता है। ऐसे में उनके सुझाव पर हमने पहले थाने में एक छोटा स्पीकर और माइक लगवाया था।
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गुरुद्वारे ने की मदद
माइक और स्पीकर मिलने के बाद उत्साहित पुलिसकर्मियों ने संगीत में रुचि दिखानी शुरू की। इसके बाद अधिकारियों ने थाने में कराओके सिस्टम, मिक्सर और सिंगिंग माइक जैसे कुछ उच्च-स्तरीय उपकरण खरीदने की योजना बनाई। उनके इस कदम में एक स्थानीय गुरुद्वारे ने भी मदद की। गुरुद्वारे की मदद से सारे सिस्टम थाने में व्यवस्थित किए गए। अशोक कदम ने बताया कि आज हमारे पास पुलिस अधिकारियों, कांस्टेबलों और यहां तक कि एक चपरासी सहित लगभग 15 पुलिसकर्मी हैं, जो संगीत कक्ष में नियमित रूप से गाते हैं। इस पहल के बारे में जब पुलिस आयुक्त और संयुक्त पुलिस आयुक्त सहित वरिष्ठ अधिकारियों को पता चला तो उन्होंने भी थाने के कर्मचारियों को प्रोत्साहित किया।
पुलिसकर्मी भी काफी खुश
म्यूजिक रुम मिलने से वहां तैनात पुलिसकर्मी काफी खुश हैं। सब-इंस्पेक्टर विनायक गूजर ने बताया कि उनको गाना गाना हमेशा से पसंद था, लेकिन नौकरी की वजह से यह शौक पीछे छूट गया था। अब वह हर दिन ड्यूटी के बाद अपनी म्यूजिकल चॉप्स का अभ्यास करते हैं। उन्होंने बताया कि हम लोगों में से करीब पंद्रह लोग रोज शाम 7 बजे के बाद संगीत कक्ष में इकट्ठा होते हैं और वहां गाना गाते हैं। गूजर ने बताया कि कभी-कभी स्थानीय संगीत प्रेमी भी उनके साथ शामिल हो जाते हैं।
पुलिसकर्मियों पर पड़ा सकारात्मक प्रभाव
इंस्पेक्टर कदम ने बताया कि शाम को होने वाले ये संगीत सत्र स्ट्रेसबस्टर के रूप में काम करते हैं। इसके अलावा एक और सकारात्मक प्रभाव पड़ा है वह यह है कि कर्मचारियों के बीच संबंध प्रगाढ़ हो रहे हैं। कदम ने बताया कि यह वह समय होता है जब अधिकारी और कर्मचारी एक साथ आते हैं और एक साथ गाते हैं। उन्होंने बताया कि वे लोग ज्यादातर लता मंगेशकर, किशोर कुमार, रफी, सुरेश वाडकर आदि की पुरानी और सदाबहार धुन गाते हैं।
कदम ने कहा कि इस पहल का महत्वपूर्ण परिणाम यह है कि आम तौर पर अपनी व्यक्तिगत समस्याओं को साझा नहीं करने वाले कर्मियों ने अब वरिष्ठ अधिकारियों के साथ खुलना शुरू कर दिया है। यहां तक कि जांच में इनपुट देना भी शुरू कर दिया है।