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Karnataka HC: पुलिस या आपराधिक न्यायालय जब्त नहीं कर सकते पासपोर्ट, हाईकोर्ट ने डीआरटी के आदेश को किया रद्द
Sun, 17 Dec 2023 06:03 AM IST
यशोधन शर्मा
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, बंगलूरू
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, बंगलूरू
Published by: यशोधन शर्मा
Updated Sun, 17 Dec 2023 06:03 AM IST
सार
हाईकोर्ट ने कहा कि ट्रिब्यूनल के पास सिविल कोर्ट की शक्तियां हैं और जब सिविल कोर्ट खुद पासपोर्ट जब्त नहीं कर सकता, तो डीआरटी को भी ऐसा करने का कोई अधिकार नहीं मिल सकता।
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कर्नाटक हाईकोर्ट
- फोटो : एएनआई
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विस्तार
कर्नाटक हाईकोर्ट ने दोहराया है कि पुलिस और आपराधिक प्रक्रिया संहिता की धारा 102 या 104 के तहत शक्तियों का इस्तेमाल करने वाले आपराधिक न्यायालय को यह अधिकार नहीं है कि वे पासपोर्ट जब्त करें या अपने कब्जे में रखें। इसके साथ ही हाईकोर्ट ने बंगलूरू के ऋण वसूली न्यायाधिकरण (डीआरटी)-1 के उस आदेश को रद्द कर दिया, जिसके तहत मुंबई के एक व्यवसायी नितिन शंभुकुमार कासलीवाल का पासपोर्ट जब्त कर लिया गया था।
हाईकोर्ट ने कहा कि ट्रिब्यूनल के पास सिविल कोर्ट की शक्तियां हैं और जब सिविल कोर्ट खुद पासपोर्ट जब्त नहीं कर सकता, तो डीआरटी को भी ऐसा करने का कोई अधिकार नहीं मिल सकता। उक्त मामले में कासलीवाल ने 1999 में सुरक्षित ऋण के लिए विभिन्न कर्जदाताओं के साथ समझौता किया था।
की गई थी नीलामी करने की मांग
2015 में ऋणदाता बैंकों ने ऋण वसूली न्यायाधिकरण के समक्ष मामला दायर किया, जिसमें डिफाल्टर से पुनर्भुगतान के तौर पर कासलीवाल और उनके व्यवसायों की संपत्तियों को जब्त कर उनकी नीलामी करने की मांग की गई थी।
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बैंकों ने कासलीवाल का पासपोर्ट सरेंडर कराने की भी अर्जी दी थी। दरअसल कासलीवाल अपना पासपोर्ट रिन्यू कराना चाहते थे लेकिन ट्रिब्यूनल इसके लिए तैयार नहीं था। इसके बाद उन्होंने हाईकोर्ट का दरवाजा खटखटाया था।
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हाईकोर्ट ने कहा कि ट्रिब्यूनल के पास सिविल कोर्ट की शक्तियां हैं और जब सिविल कोर्ट खुद पासपोर्ट जब्त नहीं कर सकता, तो डीआरटी को भी ऐसा करने का कोई अधिकार नहीं मिल सकता। उक्त मामले में कासलीवाल ने 1999 में सुरक्षित ऋण के लिए विभिन्न कर्जदाताओं के साथ समझौता किया था।
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की गई थी नीलामी करने की मांग
2015 में ऋणदाता बैंकों ने ऋण वसूली न्यायाधिकरण के समक्ष मामला दायर किया, जिसमें डिफाल्टर से पुनर्भुगतान के तौर पर कासलीवाल और उनके व्यवसायों की संपत्तियों को जब्त कर उनकी नीलामी करने की मांग की गई थी।
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बैंकों ने कासलीवाल का पासपोर्ट सरेंडर कराने की भी अर्जी दी थी। दरअसल कासलीवाल अपना पासपोर्ट रिन्यू कराना चाहते थे लेकिन ट्रिब्यूनल इसके लिए तैयार नहीं था। इसके बाद उन्होंने हाईकोर्ट का दरवाजा खटखटाया था।