किसानों को दिल्ली में आने से रोकने के लिए तैनात हैं उनके 'बेटे', किसान भी हैं राशन-पानी के साथ तैयार
संयुक्त किसान मोर्चा के बैनर तले सैकड़ों किसान संगठनों के लाखों किसान दिल्ली आ रहे, बैरीकेडिंग तोड़कर आगे बढ़ रहे किसान, किसानों पर पानी की बौछारें और आंसू गैस के गोले चले...
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किसान अपनी मांगों को लेकर संघर्ष के रास्ते पर हैं। वे पंजाब, हरियाणा, मध्यप्रदेश और यूपी में जगह-जगह पुलिस बैरीकेडिंग तोड़कर आगे बढ़ने की कोशिश कर रहे हैं, तो इधर दिल्ली में उनका प्रवेश रोकने के लिए उनके बेटे सुरक्षा बलों के जवान मुस्तैद हैं। दोनों के कर्तव्यों ने उन्हें आमने-सामने खड़ा कर दिया है। दिल्ली में प्रवेश करने के सभी बॉर्डर पर बैरीकेडिंग कर पुलिस सुरक्षा तैनात कर दी गई है। लेकिन चूंकि किसान अभी दिल्ली की सीमा के आसपास नहीं पहुंचे हैं, आवागमन सामान्य बना हुआ है। किसानों ने सरकार को चेताया है कि वे तीनों नए कृषि कानूनों को समाप्त कराए बिना वापस जाने को तैयार नहीं हैं।
ऑल इंडिया किसान संघर्ष समन्वय समिति के सचिव अविक शाहा ने अमर उजाला को बताया कि सरकार किसानों का आंदोलन दबाने के लिए पूरी ताकत का इस्तेमाल कर रही है। हरियाणा में अनेक जगहों पर पुलिस ने पानी की बौछारें की हैं और किसानों पर आंसू गैस के गोले छोड़े हैं। अब तक उनके डेढ़ सौ से ज्यादा किसान नेताओं को गिरफ्तार कर लिया गया है। लेकिन इसके बाद भी सरकार को समझ लेना चाहिए कि किसान इन दमनकारी नीतियों से डरने या झुकने वाले नहीं हैं और वे इस बार कानून को समाप्त कराए बिना वापस जाने को तैयार नहीं होंगे।
पैदल, ट्रैक्टर से आ रहे किसान
स्वराज इंडिया के नेता आशुतोष ने कहा कि हरियाणा सरकार ने किसान आंदोलन को देखते हुए पंजाब-हरियाणा बॉर्डर सील कर दिया है और हरियाणा रोडवेज की सेवाएं बंद कर दी हैं। लेकिन किसान अपने निजी वाहनों से लगातार दिल्ली की तरफ आगे बढ़ रहे हैं। बैरीकेडिंग पर वाहनों को रोक दिए जाने के बाद अनेक किसान पैदल ही दूसरे वैकल्पिक रास्तों से दिल्ली की तरफ आगे बढ़ रहे हैं।
मध्यप्रदेश, केरल, महाराष्ट्र, गुजरात, उत्तराखंड से आ रहे किसान अभी भी रास्ते में हैं और वे अपने-अपने काफिलों के साथ लगातार दिल्ली की तरफ आगे बढ़ रहे हैं। वे सभी अगले एक-दो दिन में दिल्ली पहुंच जाएंगे। सरकार किसानों के काफिले को जहां भी रोकने की कोशिश करेगी, वे वहीं रुककर आगे बढ़ने की रणनीति बनाएंगे। लेकिन किसी भी कीमत पर किसान वापस जाने को तैयार नहीं होंगे।
कहां क्या हुआ
दिल्ली चलो नारे के साथ पंजाब से निकले हजार ट्रैक्टरों के काफिले पर पुलिस ने पानी की बौछारें की हैं और हरियाणा पुलिस हर हाल में उन्हें आगे बढ़ने से रोकने की कोशिश कर रही है। कुछ जगहों पर पुलिस और किसानों के बीच संघर्ष बढ़ जाने की भी खबरें हैं। कुछ जगहों पर किसान प्रदर्शनकारियों ने पुलिस पर पत्थरबाजी भी की है। हालांकि, किसान नेताओं ने अपना पूरा आंदोलन पूरी तरह शांतिपूर्ण रखने का दावा किया है।
दिल्ली-यूपी बॉर्डर पर कोंडली के पास, गुरूग्राम और फरीदाबाद से दिल्ली आने वाले सभी रास्तों पर बैरीकेडिंग कर दी गई है। भारी संख्या में जवानों की अतिरिक्त तैनाती कर दिल्ली में आने की किसानों की किसी भी कोशिश को नाकाम करने की योजना बनाई गई है। बॉर्डर पर नोएडा-गाजियाबाद के शीर्ष पुलिस अधिकारी किसी भी आपात स्थिति को संभालने के लिए मौके पर मौजूद हैं।
किसानों ने जंतर-मंतर पर गुरुवार 26 नवंबर को 11 बजे आने का निर्णय किया था, लेकिन पुलिस की अनुमति न मिलने और जगह-जगह पर बैरीकेडिंग लगाकर रोक दिए जाने के कारण किसानों का कोई भी दल जंतर-मंतर तक नहीं पहुंच सका है। जंतर-मंतर पर तीन जगहों पर बैरीकेडिंग लगाकर आवागमन प्रतिबंधित कर दिया गया है। यूपी बॉर्डर की तरह यहां भी सुरक्षा पूरी तरह मुस्तैद कर दी गई है।
महीनों की तैयारी
किसानों ने अपने साथ महीनों का राशन, दाल, चावल, पानी, गैस सिलेंडर इत्यादि रख लिया है। उनके पास बारिश में काम लेने योग्य टेंट होने की बात भी कही जा रही है। किसानों का दावा है कि इस बार अगर कई महीनों का भी समय लगेगा तब भी वे वापस जाने को तैयार नहीं होंगे।
सरकार ने 3 दिसंबर को बात के लिए बुलाया
इधर, सरकार ने किसान आंदोलन को गैर-जरूरी बताया है। सरकार का कहना है कि किसानों से बातचीत का रास्ता हमेशा खुला हुआ है और सरकार लगातार किसानों से बातचीत कर रही है। इसके लिए रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह, कृषि मंत्री नरेंद्र सिंह तोमर का नाम आगे किया गया है। तोमर ने कहा कि किसानों को तीन दिसंबर को बातचीत करनी चाहिए और आंदोलन करने की कोई आवश्यकता नहीं है। सरकार किसानों की हर शंकाओं का समाधान करने के लिए तैयार है।