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अजीत डोभाल बोले: कानून-व्यवस्था ही नहीं, सीमा प्रबंधन में भी पुलिस बल की अहम भूमिका
Fri, 12 Nov 2021 05:45 PM IST
Amit Mandal
पीटीआई, हैदराबाद
पीटीआई, हैदराबाद
Published by: Amit Mandal
Updated Fri, 12 Nov 2021 05:45 PM IST
सार
डोभाल की टिप्पणी पंजाब विधानसभा द्वारा सीमा सुरक्षा बल के अधिकार क्षेत्र का विस्तार करने वाली केंद्र की अधिसूचना के खिलाफ एक प्रस्ताव पारित करने के एक दिन बाद आई है।
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एनएसए अजीत डोभाल (file photo)
- फोटो : पीटीआई
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विस्तार
राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार अजीत डोभाल ने कानून और व्यवस्था बनाए रखने के अलावा अन्य भूमिकाओं के लिए पुलिस बल के महत्व पर अपनी बात रखी। डोभाल ने कहा कि पाकिस्तान, चीन, म्यांमार और बांग्लादेश की 15,000 किलोमीटर से अधिक के सीमा प्रबंधन में पुलिस बलों की बड़ी भूमिका है। हैदराबाद में सरदार वल्लभभाई पटेल राष्ट्रीय पुलिस अकादमी (एसवीपीएनपीए) में आईपीएस परिवीक्षाधीनों के 73वें बैच की पासिंग आउट परेड में डोभाल ने कहा कि भारत की संप्रभुता तटीय क्षेत्रों से सीमावर्ती क्षेत्रों के अंतिम पुलिस स्टेशन के अधिकार क्षेत्र तक जाती है।
डोभाल की टिप्पणी पंजाब विधानसभा द्वारा सीमा सुरक्षा बल के अधिकार क्षेत्र का विस्तार करने वाली केंद्र की अधिसूचना के खिलाफ एक प्रस्ताव पारित करने के एक दिन बाद आई है, जिसमें इसे राज्य पुलिस का अपमान कहा गया है और इसे वापस लेने की मांग की गई है। केंद्र सरकार ने पिछले महीने सीमा सुरक्षा बल को पंजाब, पश्चिम बंगाल और असम में अंतरराष्ट्रीय सीमा से मौजूदा 15 किलोमीटर से 50 किलोमीटर के दायरे में तलाशी, जब्ती और गिरफ्तारी करने के लिए अधिकृत करने के लिए बीएसएफ अधिनियम में संशोधन किया था।
डोभाल ने आगे कहा कि भारत के 32 लाख वर्ग किलोमीटर के हर हिस्से में कानून व्यवस्था बनाए रखना पुलिस बलों की जिम्मेदारी है। न केवल पुलिसिंग जिसके बारे में आपको (आईपीएस अधिकारी) अच्छी तरह से प्रशिक्षित किया गया है। लेकिन जिम्मेदारी बढ़ेगी। आप इस देश के सीमा प्रबंधन के लिए जिम्मेदार होंगे। 15,000 किमी की सीमा में से अधिकांश के साथ समस्याएं हैं।
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डोभाल ने कहा कि आजादी के सौवें वर्ष और उसके बाद अलग भारत होगा। देश आगे बढ़ रहा है और आप देखेंगे कि आप उसका नेतृत्व कर रहे हैं। यह एक ऐसा देश होगा, जिसे उसकी कई उपलब्धियों के लिए जाना जाएगा। पिछले कुछ वर्षो में हमने जो हासिल किया है, वह सिर्फ एक संकेत है कि देश किस दिशा में बढ़ रहा है। भारत दुनिया के प्रमुख देशों के साथ कंधे से कंधा मिलाकर चलेगा।
चौथी पीढ़ी की युद्धनीति में सिविल सोसायटी नई सरहद
राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार (एनएसए) अजीत डोभाल ने कहा कि राजनीतिक व सामरिक लक्ष्य हासिल करने के लिए युद्ध अब प्रभावशाली तरीका नहीं रहे। यह महंगे हैं, अनिश्चित भी, इसलिए प्रचलन से बाहर हो चुके हैं। आज लोग सबसे महत्वपूर्ण हैं और चौथी पीढ़ी की युद्धनीति में देश की सिविल सोसायटी नई सरहद बन चुकी है। सिविल सोसायटी को बिगाड़ा, ठगा, बांटा और चालाकियों से प्रभावित जा सकता है, ताकि देश हित को नुकसान पहुंचाया जा सके। यह देखना भी पुलिस का काम है कि इन सबसे लोगों को बचाएं।
हैदराबाद की सरदार वल्लभभाई पटेल राष्ट्रीय पुलिस अकादमी में प्रशिक्षु आईपीएस अधिकारियों के 73वें बैच के दीक्षांत समारोह में शुक्रवार को डोभाल ने कहा, यह न केवल राष्ट्र निर्माण बल्कि सुरक्षा के लिए भी जरूरी है। उन्होंने कहा, कोई भी देश कानून के शासन के बिना काम नहीं कर सकता। अगर कानून का अनुपालन करने वाले कमजोर, भ्रष्ट और पक्षपाती होंगे, तो लोग खुद को सुरक्षित महसूस नहीं करेंगे। और अगर अंदरूनी सुरक्षा विफल होगी तो कोई देश महान नहीं बन सकता, लोग अपनी पूर्ण क्षमता से आगे ही नहीं बढ़ सकेंगे।
डॉ. दर्पण ने किया परेड का नेतृत्व, देश को मिले 132 अफसर
अकादमी निदेशक अतुल करवाल ने बताया कि करीब 46 हफ्ते लंबे पहले चरण के बेसिक प्रशिक्षण के बाद हुई दीक्षांत परेड में 132 आईपीएस अफसर देश को मिले। वहीं मालदीव, भूटान व नेपाल के 17 अधिकारी भी यहां प्रशिक्षित हुए। परेड का नेतृत्व पंजाब काडर की प्रशिक्षु आईपीएस डॉ. दर्पण अहलूवालिया ने किया। महिला नेतृत्व का यह लगातार तीसरा व अकादमी के इतिहास का छठा मौका बना।
आईपीएस नए भारत के सैनिक
आईपीएस अधिकारी केवल पुलिस के मुखिया नहीं, बल्कि नए बनते भारत के सैनिक भी हैं, जिनके बिना देश सफल नहीं हो सकता। - अजीत डोभाल, एनएसए
कानून में है लोकतंत्र का मर्म
डोभाल ने कहा कि लोकतंत्र का मर्म मत-पेटी में नहीं, बल्कि वोट की ताकत से चुने प्रतिनिधियों के बनाए कानूनों में है। इन कानून को लागू करवाना आप (पुलिस) का दायित्व है। उचित अनुपालन व क्रियान्वयन से कानून अच्छे बनते हैं। उनसे लोगों की कितनी अच्छी सेवा हो रही है, यही मायने रखता है। ऐसा न हो, तो वही कानून बुरे बन जाते हैं। लोकतंत्र की सफलता इस पर ज्यादा टिकी है कि पुलिस ग्राउंड पर कैसा काम करती है।
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डोभाल की टिप्पणी पंजाब विधानसभा द्वारा सीमा सुरक्षा बल के अधिकार क्षेत्र का विस्तार करने वाली केंद्र की अधिसूचना के खिलाफ एक प्रस्ताव पारित करने के एक दिन बाद आई है, जिसमें इसे राज्य पुलिस का अपमान कहा गया है और इसे वापस लेने की मांग की गई है। केंद्र सरकार ने पिछले महीने सीमा सुरक्षा बल को पंजाब, पश्चिम बंगाल और असम में अंतरराष्ट्रीय सीमा से मौजूदा 15 किलोमीटर से 50 किलोमीटर के दायरे में तलाशी, जब्ती और गिरफ्तारी करने के लिए अधिकृत करने के लिए बीएसएफ अधिनियम में संशोधन किया था।
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डोभाल ने आगे कहा कि भारत के 32 लाख वर्ग किलोमीटर के हर हिस्से में कानून व्यवस्था बनाए रखना पुलिस बलों की जिम्मेदारी है। न केवल पुलिसिंग जिसके बारे में आपको (आईपीएस अधिकारी) अच्छी तरह से प्रशिक्षित किया गया है। लेकिन जिम्मेदारी बढ़ेगी। आप इस देश के सीमा प्रबंधन के लिए जिम्मेदार होंगे। 15,000 किमी की सीमा में से अधिकांश के साथ समस्याएं हैं।
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डोभाल ने कहा कि आजादी के सौवें वर्ष और उसके बाद अलग भारत होगा। देश आगे बढ़ रहा है और आप देखेंगे कि आप उसका नेतृत्व कर रहे हैं। यह एक ऐसा देश होगा, जिसे उसकी कई उपलब्धियों के लिए जाना जाएगा। पिछले कुछ वर्षो में हमने जो हासिल किया है, वह सिर्फ एक संकेत है कि देश किस दिशा में बढ़ रहा है। भारत दुनिया के प्रमुख देशों के साथ कंधे से कंधा मिलाकर चलेगा।
चौथी पीढ़ी की युद्धनीति में सिविल सोसायटी नई सरहद
राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार (एनएसए) अजीत डोभाल ने कहा कि राजनीतिक व सामरिक लक्ष्य हासिल करने के लिए युद्ध अब प्रभावशाली तरीका नहीं रहे। यह महंगे हैं, अनिश्चित भी, इसलिए प्रचलन से बाहर हो चुके हैं। आज लोग सबसे महत्वपूर्ण हैं और चौथी पीढ़ी की युद्धनीति में देश की सिविल सोसायटी नई सरहद बन चुकी है। सिविल सोसायटी को बिगाड़ा, ठगा, बांटा और चालाकियों से प्रभावित जा सकता है, ताकि देश हित को नुकसान पहुंचाया जा सके। यह देखना भी पुलिस का काम है कि इन सबसे लोगों को बचाएं।
हैदराबाद की सरदार वल्लभभाई पटेल राष्ट्रीय पुलिस अकादमी में प्रशिक्षु आईपीएस अधिकारियों के 73वें बैच के दीक्षांत समारोह में शुक्रवार को डोभाल ने कहा, यह न केवल राष्ट्र निर्माण बल्कि सुरक्षा के लिए भी जरूरी है। उन्होंने कहा, कोई भी देश कानून के शासन के बिना काम नहीं कर सकता। अगर कानून का अनुपालन करने वाले कमजोर, भ्रष्ट और पक्षपाती होंगे, तो लोग खुद को सुरक्षित महसूस नहीं करेंगे। और अगर अंदरूनी सुरक्षा विफल होगी तो कोई देश महान नहीं बन सकता, लोग अपनी पूर्ण क्षमता से आगे ही नहीं बढ़ सकेंगे।
डॉ. दर्पण ने किया परेड का नेतृत्व, देश को मिले 132 अफसर
अकादमी निदेशक अतुल करवाल ने बताया कि करीब 46 हफ्ते लंबे पहले चरण के बेसिक प्रशिक्षण के बाद हुई दीक्षांत परेड में 132 आईपीएस अफसर देश को मिले। वहीं मालदीव, भूटान व नेपाल के 17 अधिकारी भी यहां प्रशिक्षित हुए। परेड का नेतृत्व पंजाब काडर की प्रशिक्षु आईपीएस डॉ. दर्पण अहलूवालिया ने किया। महिला नेतृत्व का यह लगातार तीसरा व अकादमी के इतिहास का छठा मौका बना।
आईपीएस नए भारत के सैनिक
आईपीएस अधिकारी केवल पुलिस के मुखिया नहीं, बल्कि नए बनते भारत के सैनिक भी हैं, जिनके बिना देश सफल नहीं हो सकता। - अजीत डोभाल, एनएसए
कानून में है लोकतंत्र का मर्म
डोभाल ने कहा कि लोकतंत्र का मर्म मत-पेटी में नहीं, बल्कि वोट की ताकत से चुने प्रतिनिधियों के बनाए कानूनों में है। इन कानून को लागू करवाना आप (पुलिस) का दायित्व है। उचित अनुपालन व क्रियान्वयन से कानून अच्छे बनते हैं। उनसे लोगों की कितनी अच्छी सेवा हो रही है, यही मायने रखता है। ऐसा न हो, तो वही कानून बुरे बन जाते हैं। लोकतंत्र की सफलता इस पर ज्यादा टिकी है कि पुलिस ग्राउंड पर कैसा काम करती है।