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मुंबई पात्रा चॉल घोटाला: राउत की जमानत पर ईडी की दलीलें पूरी, फैसला आज

Tue, 18 Oct 2022 05:31 AM IST
Amit Mandal न्यूज डेस्क, अमर उजाला, मुंबई
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, मुंबई Published by: Amit Mandal Updated Tue, 18 Oct 2022 05:31 AM IST
सार

एएसजी ने एक गवाह के बयान को पढ़ते हुए अदालत को बताया कि राउत बैठक में मौजूद थे और पूरी परियोजना में सक्रिय रुचि ली थी। उन्होंने दावा किया कि मनी लॉन्ड्रिंग मामले में राउत की संलिप्तता दिखाने के लिए रिकॉर्ड में सबूत मौजूद हैं।

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PMLA case: Sanjay Raut took 'active interest' in Patra Chawl project, ED tells court
संजय राउत - फोटो : ANI

विस्तार

पात्रा चॉल घोटाला मामले में शिवसेना सांसद संजय राउत की जमानत याचिका पर सोमवार को प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) ने अपनी दलीलें पूरी कर लीं। राउत को सोमवार को विशेष न्यायाधीश एमजी देशपांडे के समक्ष पेश किया गया, जहां उनकी हिरासत मंगलवार तक बढ़ा दी गई। जमानत याचिका पर मंगलवार को सुनवाई होगी।

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प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) ने सोमवार को विशेष अदालत को बताया कि शिवसेना सांसद संजय राउत ने पात्रा चॉल पुनर्विकास परियोजना में सक्रिय रुचि ली थी और धन शोधन मामले में उनकी संलिप्तता दिखाने के लिए ये सब रिकॉर्ड पर है। ईडी ने सोमवार को उत्तरी मुंबई के गोरेगांव में पात्रा चॉल के पुनर्विकास में अनियमितताओं से संबंधित धन शोधन मामले में राज्यसभा सांसद की जमानत याचिका पर अपनी दलीलें पूरी कीं।
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ईडी ने कहा, राउत पात्रा चॉल परियोजना में शामिल थे 
राउत को सोमवार को न्यायिक हिरासत की समाप्ति पर विशेष न्यायाधीश एमजी देशपांडे के समक्ष पेश किया गया था और उनकी जेल हिरासत को मंगलवार तक के लिए बढ़ा दिया गया था। उनकी जमानत याचिका पर आगे सुनवाई होगी। मनी लॉन्ड्रिंग मामले में कथित भूमिका के लिए जुलाई में गिरफ्तार किए गए शिवसेना नेता ने पिछले महीने विशेष धन शोधन निवारण अधिनियम (पीएमएलए) अदालत से जमानत मांगी थी। याचिका का विरोध करते हुए अतिरिक्त सॉलिसिटर जनरल (एएसजी) अनिल सिंह ने कहा कि जांच एजेंसी के पास 2011 से रिकॉर्ड मौजूद हैं, जो बताते हैं कि राउत पात्रा चॉल परियोजना में शामिल थे।


एएसजी ने एक गवाह के बयान को पढ़ते हुए अदालत को बताया कि राउत बैठक में मौजूद थे और पूरी परियोजना में सक्रिय रुचि ली थी। उन्होंने दावा किया कि मनी लॉन्ड्रिंग मामले में राउत की संलिप्तता दिखाने के लिए रिकॉर्ड में सबूत मौजूद हैं। ईडी पात्रा चॉल के पुनर्विकास में कथित वित्तीय अनियमितताओं और उनकी पत्नी और सहयोगियों से संबंधित वित्तीय लेनदेन से संबंधित मामले की जांच कर रहा है। पात्रा चॉल के नाम से पहचाने जाने वाला सिद्धार्थ नगर उपनगरीय गोरेगांव में 47 एकड़ में फैला हुआ है और इसमें 672 किरायेदार परिवार हैं।

2008 में महाराष्ट्र हाउसिंग एंड एरिया डेवलपमेंट अथॉरिटी (म्हाडा) ने एचडीआईएल (हाउसिंग डेवलपमेंट एंड इंफ्रास्ट्रक्चर लिमिटेड) की एक सहयोगी कंपनी गुरु आशीष कंस्ट्रक्शन प्राइवेट लिमिटेड (जीएसीपीएल) को चॉल के लिए एक पुनर्विकास अनुबंध सौंपा था। जीएसीपीएल को किरायेदारों के लिए 672 फ्लैट बनाने और म्हाडा को कुछ फ्लैट देने थे। हाती जमीन निजी डेवलपर्स को बेचने के लिए स्वतंत्र था। हालांकि, ईडी के अनुसार पिछले 14 वर्षों में किरायेदारों को एक भी फ्लैट नहीं मिला, क्योंकि कंपनी ने पात्रा चॉल का पुनर्विकास नहीं किया, बल्कि अन्य बिल्डरों को 1,034 करोड़ रुपये में भूमि पार्सल और फ्लोर स्पेस इंडेक्स (एफएसआई) बेच दिया।

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