मोदी-ट्रंप मुलाकात से भारत को ये चार बड़ी उम्मीदें
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
दो दिवसीय दौरे पर अमेरिका पहुंचे पीएम मोदी की यह यात्रा कई मायनों में खास है। नोटबंदी के बाद भारतीय बाजार में आई मंदी और घटते रोजगार के बीच अमेरिका दौरे पर पहुंचे मोदी इस यात्रा से उद्योग जगत भी काफी उम्मीदें लगाए बैठा है। इसी कड़ी में प्रधानमंत्री मोदी ने अमेरिका की टॉप कंपनीज के सीईओ से मुलाकात की।
अब निगाहें मोदी-ट्रंप मुलाकात पर हैं, दुनिया के दो बड़े नेताओं की यह मुलाकात पूरी दुनिया के लिए महत्वपूर्ण है, इसी मुलाकात पर दक्षिण एशिया की स्थिरता और व्यापार की बड़ी संभावनाएं छिपी हैं। वहीं निगाहें इस बात पर भी हैं कि ट्रंप जैसे आक्रामक नेता के साथ क्या मोदी बराक ओबामा वाली कैमिस्ट्री जमा पाते हैं, जिन्होंने कूटनीतिक संबंधों के साथ ही निजी रिश्तों को ऊंचाइयों के नए मुकाम तक पहुंचाया था।
हालांकि मोदी और ट्रंप के बीच भी नई केमिस्ट्री की उम्मीद दिखने लगी हैं, ट्रंप ने मोदी के लिए व्हाइट हाउस की पुरानी परंपरांओं को तोड़ते हुए स्पेशल डिनर का अयोजन किया है। जानिए इस डिनर पार्टी के बीच अमेरिका से भारत की बड़ी उम्मीदें क्या हैं?
एजेंडा सेट करने पर जोर
प्रधानमंत्री बनने के बाद मोदी पांच-छह बार अमेरिका की यात्रा कर चुके हैं, हालांकि वे सभी यात्राएं पूर्व राष्ट्रपति बराक ओबामा के कार्यकाल में हुई थी। ट्रंप के इस पद पर आने के बाद मोदी की यह पहली यात्रा है। ऐसे में मोदी की यह यात्रा खास मायने रखती है। ट्रंप से बातचीत के दौरान दोनों देशों के बीच नए सिरे से एकसाथ आगे बढ़ने पर बातचीत हो सकती है। टाइम की रिपोर्ट के अनुसार अमेरिकी विशेषज्ञ ध्रुव जयशंकर कहते हैं कि ट्रंप और मोदी की यह मुलाकात आगे बढ़ने के लिए सही रास्ता तय करेगी।
क्षेत्रीय स्थिरता को मजबूत करना
मोदी-ट्रंप की यह मुलाकात दक्षिण एशिया की स्थिरता के लिए बहुत मायने रखती है। दक्षिण एशिया में भारत और चीन दो बड़ी ताकतें हैं। चीन को लेकर ट्रंप का रुख शुरू से ही कड़ा रहा है, ऐसे में अमेरिकी राष्ट्रपति भारत को अपना महत्वपूर्ण साझेदार बनाना चाहेंगे। दोनों देशों की यह जुगलबंदी दक्षिण एशिया में स्थिरता स्थापित करने की दिशा में बड़ा कदम हो सकती है। खासकर आतंक का सामना कर रहे अफगानितस्तान के बारे में। अमेरिका में कुछ दिन पहले ही रिपब्लिकन सांसदों के एक गुट ने कहा था कि भारत अफगानिस्तान का सबसे अच्छा दोस्त है, ऐसे में अमेरिका अफगानिस्तान में भारतीय हितों को और तरजीह दे सकता है।
निवेश को बढ़ावा देना
नोटबंदी के बाद भारतीय अर्थव्यवस्था को बड़ा झटका लगा है। बहुत दिनों बाद विकास दर में भी गिरावट आई है। ऐसे में अमेरिका दौरे पर मोदी की निगाहें अमेरिकी निवेशकों को रिझाने की भी रहेगी। इसी कड़ी में मोदी अमेरिका की टॉप कंपनियों के सीईओज से मुलाकात कर चुके हैं। हालांकि मोदी के मेक इन इंडिया को लेकर अमेरिकी निवेशकों में अभी थोड़ी अनिश्चितता है, मोदी का प्रयास इसी अनिश्चितता को दूर कर उन्हें भारत लाने का रहेगा।
ओबामा जैसी कैमिस्ट्री तैयार करना
अमेरिका के पूर्व राष्ट्रपति बराक ओबामा के साथ भारतीय प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी की खास केमिस्ट्री थी, दोनों नेताओं के बीच कूटनीतिक संबंधों से इतर आपसी रिश्ते भी बहुत घनिष्ठ थे। ऐसे में पीएम मोदी डोनाल्ड ट्रंप के साथ भी ऐसे ही रिश्तों स्थापित करने का प्रयास करेंगे। हालांकि ट्रंप के अनिश्चित व्यवहार को लेकर इस तरह का दावा करना बड़ा कठिन है। ट्रंप का मूड और रुख हर घड़ी बदलता रहता है, ऐसे में उनके व्यवहार को लेकर अटकलें लगाना थोड़ा मुश्किल है। लेकिन अगर मोदी ऐसा कर पाए तो यह उनकी कई मुश्किलें आसान कर सकता है। खासकर एच1बी वीजा मुद्दे पर ट्रंप के रुख में थोड़ी नरमी लाई जा सकती है।