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स्वच्छता श्रमदान: शहरी और ग्रामीण भारत से गोद लिए गए 6.4 लाख स्थल, चलेगा दुनिया का सबसे बड़ा सफाई अभियान

Fri, 29 Sep 2023 05:18 PM IST
निर्मल कांत न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली Published by: निर्मल कांत Updated Fri, 29 Sep 2023 05:18 PM IST
सार

"यह मेगा स्वच्छता अभियान जीवन के सभी क्षेत्रों के नागरिकों से अपील करता है कि वे सार्वजनिक स्थानों जैसे बाजार, रेल पटरियों, जल निकायों, पर्यटन स्थलों, पूजा स्थलों आदि पर सफाई गतिविधियों में शामिल हों, जिसके परिणामस्वरूप वास्तविक स्वच्छता दिखाई दे।"

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PM’s call for Ek Tareekh Ek Ghanta Ek Saath could be worlds largest voluntary effort for a cleaner India: puri
मीडिया से बातचीत करते केंद्रीय मंत्री हरदीप सिंह पुरी। - फोटो : पीआईबी

विस्तार

आवास एवं शहरी मामलों के मंत्री हरदीप सिंह पुरी ने शुक्रवार को जानकारी दी कि 'एक तारीख, एक घंटा, एक साथ' अभियान स्वच्छता गतिविधियों को लेकर है। उन्होंने बताया कि यह अभियान 'स्वच्छता के लिए श्रमदान' के बारे में है। इसमें प्लॉग रन, रंगोली कंपीटिशन, वॉल पेंटिंग, नुक्कड़ नाटक आदि शामिल नहीं हैं। 

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एक आधिकारिक विज्ञप्ति में कहा गया है, "मन की बात की 105वीं कड़ी में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने गांधी जयंती की पूर्व संध्या को 'स्वच्छांजलि' के रूप में मनाने की अपील की है और सभी नागरिकों से सामूहिक रूप से एक अक्तूबर को सुबह 10 बजे स्वच्छता के लिए एक घंटे का श्रमदान करने का आह्वान किया है।"

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इसमें आगे कहा गया, "यह मेगा स्वच्छता अभियान जीवन के सभी क्षेत्रों के नागरिकों से अपील करता है कि वे सार्वजनिक स्थानों जैसे बाजार, रेल पटरियों, जल निकायों, पर्यटन स्थलों, पूजा स्थलों आदि पर सफाई गतिविधियों में शामिल हों, जिसके परिणामस्वरूप वास्तविक स्वच्छता दिखाई दे।"

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केंद्रीय मंत्री ने 'स्वच्छता ही सेवा' पर बात करते हुए कहा, "श्रमदान के लिए शहरी और ग्रामीण भारत से  6.4 लाख से अधिक स्थानों को अपनाया गया है। इस मेगा स्वच्छता अभियान का मकसद कचरा संवेदनशील बिंदुओं, रेल पटरियों और स्टेशनों, हवाई अड्डों और आसपास के क्षेत्रों, सड़कों के किनारे- राष्ट्रीय और राज्य राजमार्गों के हिस्सों, जल निकायों, घाटों, झुग्गियों, पुलों के नीचे, बाजार स्थानों, बैकलेन, पूजा स्थलों, पर्यटन स्थलों, बस स्टैंड/टोल प्लाजा, चिड़ियाघरों और वन्यजीव क्षेत्रों, गौशालाओं, पहाड़ियों, समुद्र तटों, बंदरगाहों, आवासीय क्षेत्रों, आंगनवाड़ियों, स्कूलों /कॉलेजों आदि को साफ करना है।"

स्वच्छता कार्यक्रमों की सुविधा के लिए शहरी स्थानीय निकायों, कस्बों, ग्राम पंचायतों, मंत्रालयों ने स्वच्छता ही सेवा (नागरिक पोर्टल https://swachhatahiseva.com/) पर स्वच्छता श्रमदान के लिए कार्यक्रम जोड़े हैं। नागरिक इस विशेष रूप से आर्किटेक्ट किए गए आईटी प्लेटफॉर्म पर अपने निकटतम स्वच्छता कार्यक्रमों को देख सकते हैं और भाग लेने के लिए शामिल हो सकते हैं। स्वच्छता के विभिन्न स्थानों पर नागरिक स्वच्छता के लिए श्रमदान के दौरान तस्वीरें क्लिक कर सकते हैं और पोर्टल पर अपलोड कर सकते हैं। 

यह पोर्टल नागरिकों, प्रभावशाली लोगों को आंदोलन में शामिल होने और स्वच्छता का राजदूत बनकर लोगों के आंदोलन का नेतृत्व करने के लिए आमंत्रित करने वाला एक अनुभाग भी आयोजित करता है। मंत्री ने मीडिया को बताया कि बड़ी संख्या में रेजिडेंट वेलफेयर एसोसिएशन लगभग एक लाख आवासीय क्षेत्रों में श्रमदान के लिए आगे आए हैं, जबकि ग्रामीण समुदाय के पूरे देश में  लगभग 35,000 आंगनवाड़ी केंद्रों को गोद लेने के लिए आगे आए हैं।  
 

उन्होंने बताया कि गैर-सरकारी संगठन, बाजार संघ, स्वयं सहायता समूह, धार्मिक समूह, व्यापार निकाय, निजी क्षेत्र आदि से 22,000 बाजार क्षेत्रों; 10,000 जल निकायों; लगभग 7,000 बस स्टैंड/टोल प्लाजा; लगभग 1000 गौशालाओं; लगभग 300 चिड़ियाघरों और वन्यजीव क्षेत्रों और विभिन्न स्थानों में श्रमदान करने के लिए आगे आए हैं, जहां ग्रामीण और शहरी भारत में मेगा स्वच्छता अभियान होंगे। 

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