प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी उर्दू में ट्वीट करते हैं, पर सांसद-मंत्री हैं कि मानते ही नहीं
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प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने पहली बार उर्दू में ट्वीट करके ईद की बधाई दी है। प्रधानमंत्री इसके जरिए सबका साथ-सबका विकास का संदेश देना चाहते हैं, लेकिन उनके सांसद और मंत्री हैं कि मानते ही नहीं। पार्टी के एक महासचिव का कहना है कि कुछ बड़बोले नेता हैं, जिन्हें पार्टी ने सख्त संदेश दे दिया है। सूत्र का ईशारा भाजपा अध्यक्ष अमित शाह द्वारा केंद्रीय मंत्री गिरिराज सिंह को दी गई चेतावनी से है।
Have a blessed Id-ul-Fitr. pic.twitter.com/71R9GMW3Tf
— Narendra Modi (@narendramodi) June 5, 2019
गिरिराज सिंह को यह चेतावनी बिहार के मुख्यमंत्री नीतीश कुमार के रोजा इफ्तार की दावत में शरीक होने पर किए गए तंज को लेकर दी गई थी। गिरिराज सिंह को भाजपा अध्यक्ष और केंद्रीय मंत्री अमित शाह ने भले ही चेतावनी दे दी हो और उन्हें संयम बरतने को कहा, लेकिन बुलंदशहर के सांसद भोला सिंह ने इसके बाद रही-सही कसर भी पूरी कर दी। भोला सिंह ने अल्पसंख्यक समाज के लोगों के सड़क पर नमाज अता करने पर विवादित बयान दे दिया है।
ऐसे बयानवीरों से दूरी बना रहे हैं प्रधानमंत्री
भाजपा की भोपाल से सांसद साध्वी प्रज्ञा सिंह चुनाव जीतकर आईं। उन्होंने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का अभिवादन भी किया, लेकिन प्रधानमंत्री ने उनकी तरफ ध्यान तक नहीं दिया। प्रधानमंत्री ने इस घटना के कुछ दिन पहले ही कहा था कि वह साध्वी प्रज्ञा को माफ नहीं करेंगे। प्रधानमंत्री ने यह टिप्पणी सार्वजनिक तौर पर की थी और इसके पीछे की वजह प्रज्ञा सिंह ठाकुर के बोल थे।
इतना ही नहीं प्रधानमंत्री ने अपने मंत्रिमंडल में तमाम बड़बोले नेताओं को शामिल करने से दूरी बनाई। उन्होंने अनंत हेगड़े, विवादित बोल में माहिर महेश शर्मा समेत तमाम लोगों को मंत्रिमंडल में जगह नहीं दी। मेनका गांधी को भी मंत्रिमंडल का हिस्सा नहीं बनाया।
पिछली सरकार के समय भी कराई थी किरकिरी
केंद्रीय मंत्री गिरिराज सिंह, साक्षी महाराज, महेश शर्मा, साध्वी निरंजन ज्योति जैसे नेताओं ने बयानों ने मोदी सरकार की मुसीबत बढ़ा दी थी। गोरक्षा से लेकर तमाम मुद्दों की आड़ लेकर ऐसे नेताओं ने कई बार ओछे बयान दिए थे। प्रधानमंत्री ने खुद ऐसे नेताओं को सोच-समझकर अपना वक्तव्य देने की सलाह भी दी थी, लेकिन भाजपा के ये नेता कभी नहीं रुके।