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कभी पांव छूकर तो कभी पैर धोकर चुनावी निशाने साधते रहे हैं प्रधानमंत्री मोदी, क्या गमोसा से इस बार सधेगा असम?
Mon, 01 Mar 2021 12:05 PM IST
Harendra Chaudhary
डिजिटल ब्यूरो, अमर उजाला, नई दिल्ली
डिजिटल ब्यूरो, अमर उजाला, नई दिल्ली
Published by: Harendra Chaudhary
Updated Mon, 01 Mar 2021 12:05 PM IST
सार
- असमिया गमछा गमोसा पहन कर गए थे एम्स, इससे साधा असम को
- पुडुचेरी की नर्स निवेदा और केरल की रोसम्मा अनिल ने लगाया टीका। इससे साधा दक्षिण भारत को। राजनैतिक विश्लेषक बोले, यह लोगों को जोड़ने का है तरीका
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PM Modi took the first dose of Covid-19 vaccine at AIIMS
- फोटो : AmarUjala
विस्तार
माहौल चुनावी हो तो बहुत कुछ चुनावी चश्मे से ही देखना लाजिमी भी है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने एम्स में जब सोमवार को कोविड 19 की वैक्सीन ली, तो इस दौरान भी उन्होंने कई चुनावी राज्यों को साध लिया। प्रधानमंत्री जब टीकाकरण के लिए सुबह सवेरे बिना किसी स्पेशल रूट के एम्स पहुंचे, तो उन्होंने अपने गले में असमिया गमछा पहना हुआ था। सवेरे का वक्त इसलिए चुना गया ताकि आम जनता को वीआईपी रूट लगने के चलते कोई परेशानी न हो।
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प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को टीका लगाने वाली स्टाफ नर्स भी पुडुचेरी और केरल की ही थीं। राजनैतिक विश्लेषकों का कहना है अब इसे महज संयोग कहें या तयबद्ध योजना, लेकिन प्रधानमंत्री ने टीके की पहली डोज से कम से कम असम से लेकर दक्षिण भारत के चुनावों को साध तो लिया ही है। ऐसा पहला मौका नहीं है, जब प्रधानमंत्री ने इस तरीके से चुनावी दौर में लोगों को जोड़ने का प्रयास ना किया हो। उन्हें अगली डोज 28 दिन बाद दी जाएगी।
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बहुत पुरानी बात नहीं है। 2019 के लोकसभा चुनाव में जब प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी बनारस में अपना नामांकन कराने पहुंचे थे, उस वक्त वहां पर मौजूद शिरोमणि अकाली दल के मुखिया प्रकाश सिंह बादल के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने पैर छू कर न सिर्फ भारतीय परंपरा से खुद को जोड़ा था ,बल्कि सिख समाज से जुड़ने का प्रयास भी किया था। ऐसा प्रधानमंत्री ने पहली बार नहीं किया था। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने इससे पहले उत्तर प्रदेश के प्रयागराज में हुए कुंभ में सफाई कर्मियों के भी पैर भी धोए थे। प्रधानमंत्री ने ऐसा करके एक बड़े तबके को जोड़ने का प्रयास किया था।
प्रधानमंत्री मोदी खुद से लोगों को कनेक्ट करने के लिए स्थानीय भाषाओं में संवाद करते हैं। वे लगातार अपनी जनसभाओं में स्थानीय भाषाओं का प्रयोग करते हैं जहां पर वह चुनावी रैलियां करने जाते हैं। राजनीतिक विशेषज्ञों का मानना है कि ऐसा करके सीधे तौर पर लोगों से जुड़ा जा सकता है। इसका चुनाव में बहुत फायदा भी होता है। प्रधानमंत्री ने अभी संसद ने भोजपुरी बोलकर और इससे पहले उत्तर प्रदेश के कई चुनावी रैलियों में भोजपुरी बोल कर लोगों से जुड़ने का सीधा प्रयास किया था।
अगले कुछ दिनों में असम, पुडुचेरी, तमिलनाडु, केरल और पश्चिम बंगाल में चुनाव हैं। दिल्ली विश्वविद्यालय में राजनीति शास्त्र पढ़ाने वाले प्रोफेसर अनिल चंद्रा कहते हैं कि चुनावी दौर में बड़े नेताओं की हरेक गतिविधि के कई मायने होते हैं। खासतौर से जब कोई कद्दावर नेता जब किसी विशेष प्रकार की ड्रेस पहनते हैं या किसी विशेष समुदाय में जाते हैं तो अमूमन यह माना जाता है कि वह उन लोगों के बीच में न सिर्फ अपनी पैठ बढ़ाना चाहते हैं, बल्कि उनको खुद से और अपनी राजनैतिक पार्टी से जोड़ना चाहते हैं।
प्रोफेसर चंद्रा कहते हैं कि सोमवार को एम्स में जिस तरीके से प्रधानमंत्री ने असमिया गमछा पहना वह निश्चित तौर पर असम में होने वाले चुनाव में लोगों को जोड़ने का प्रयास है। इसी प्रकार से जिस तरह प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को दक्षिण भारत की एक महिला नर्स ने टीका लगाया, वह भी दक्षिण भारत खासकर केरल और पुडुचेरी में होने वाले चुनाव में वोटबैंक पर निशाना ही है। हो सकता है यह चीजें महज एक संयोग हो, लेकिन चुनावी माहौल में इसे राजनीतिक चश्मे से ही देखा जाएगा और इसके मायने भी निकाले जाएंगे।
मनोवैज्ञानिक डॉक्टर आदर्श कहते हैं कि यह लोगों से जुड़ने का एक सीधा तरीका होता है। जब कोई व्यक्ति किसी को किसी के नाम से बुलाता है। उसकी कम्युनिटी में उसी वेशभूषा में जाता है। उसकी भाषा में बात करता है। तो यह एक संकेत होता है कि सामने वाला व्यक्ति एक बहुत बड़े जनसमुदाय से जुड़ने का प्रयास कर रहा है और इसका असर भी होता है। फिर वह चाहे राजनीतिक हो या व्यक्तिगत।