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कोविड-19 समिट: वैक्सीन के कच्चे माल पर अमेरिका और सर्टिफिकेट पर ब्रिटेन को घेरा, 10 पॉइंट्स में पीएम मोदी का भाषण

Wed, 22 Sep 2021 10:55 PM IST
कीर्तिवर्धन मिश्र वर्ल्ड डेस्क, अमर उजाला, न्यूयॉर्क
वर्ल्ड डेस्क, अमर उजाला, न्यूयॉर्क Published by: कीर्तिवर्धन मिश्र Updated Wed, 22 Sep 2021 10:55 PM IST
सार

मोदी ने अपने संबोधन में कहा, "हमने अब तक 150 देशों को दवाएं और मेडिकल सप्लाई भेजी हैं। भारत में ही बने दो टीकों को देश में आपात इस्तेमाल की मंजूरी मिली है। इनमें एक डीएनए आधारित वैक्सीन है। कुछ भारतीय कंपनियां अलग-अलग वैक्सीन के लाइसेंसी उत्पादन में भी जुटी हैं।" 

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PM Narendra Modi speaks in Global COVID-19 Summit Vaccination and US-Britain 10 points
ग्लोबल कोविड-19 समिट में वर्चुअल तौर पर शामिल हुए प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी। - फोटो : ANI

विस्तार

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी बुधवार को अमेरिका के राष्ट्रपति जो बाइडन की तरफ से वर्चुअल तौर पर आयोजित ग्लोबल कोविड-19 समिट का हिस्सा बने। यहां उन्होंने कोरोना से लड़ाई में भारत की उपलब्धियां गिनाईं। साथ ही भारत की सप्लाई चेन का इस्तेमाल पूरी दुनिया को वैक्सीन मुहैया कराने में करने की बात कही। इसके साथ ही मोदी ने इशारों-इशारों में भारत में वैक्सीन उत्पादन में आई रुकावटों का जिक्र कर अमेरिका पर निशाना साधा। आखिर में उन्होंने महामारी के आर्थिक प्रभाव का जिक्र किया और ब्रिटेन को भारत के टीकाकरण सर्टिफिकेट मंजूर करने के संकेत दिए। 
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10 पॉइंट्स में जानें, मोदी के संबोधन की खास बातें

1. प्रधानमंत्री ने भाषण की शुरुआत में कहा, "कोरोनावायरस महामारी अभूतपूर्व समस्या रही और यह अभी तक खत्म नहीं हुई है। अधिकतर दुनिया को अभी भी टीका दिए जाने की जरूरत है। इसीलिए राष्ट्रपति बाइडन की पहल काफी सामयिक है और इसका स्वागत है।" 

2. मोदी ने कहा कि भारत ने हमेशा मानवता को एक परिवार की तरह देखा है। भारत की फार्मास्यूटिकल इंडस्ट्री ने कम कीमत की जांच किट्स, दवाएं, चिकित्सा उपकरण और पीपीई किट्स का उत्पादन किया है। हमारा उद्योग कई विकासशील देशों को वहन योग्य विकल्प मुहैया करा रहा है। 
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3. पीएम ने भारत में वैक्सीन तैयार किए जाने की जानकारी देते हुए कहा, "हमने अब तक 150 देशों को दवाएं और मेडिकल सप्लाई भेजी हैं। भारत में ही बने दो टीकों को देश में आपात इस्तेमाल की मंजूरी मिली है। इनमें एक डीएनए आधारित वैक्सीन है। कुछ भारतीय कंपनियां अलग-अलग वैक्सीन के लाइसेंसी उत्पादन में भी जुटी हैं।" 

4. मोदी ने आगे कहा, "इस साल की शुरुआत में हमने अपने वैक्सीन उत्पादन को 95 देशों के साथ साझा किया था। उन्होंने कहा कि मदद पाने वालों में यूएन के पीसकीपर्स भी शामिल रहे।" 
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5. प्रधानमंत्री ने दूसरी लहर के समय दुनियाभर से भेजी गई मदद का भी जिक्र किया। उन्होंने कहा, "जब भारत कोरोनावायरस महामारी से जूझ रहा था तब पूरी दुनिया एक परिवार की तरह मदद के लिए भारत के साथ खड़ी रही। इस समर्थन के लिए मैं आप सभी का शुक्रिया अदा करता हूं।" 

6. उन्होंने कहा कि भारत अब दुनिया का सबसे बड़ा टीकाकरण अभियान चला रहा है। हाल ही में हमने एक दिन के अंदर 2.5 करोड़ लोगों को वैक्सीन दी। हमारे आधारभूत हेल्थकेयर सिस्टम ने अब तक 80 करोड़ वैक्सीन पहुंचाई हैं। भारत में 20 करोड़ लोग पूरी तरह वैक्सिनेटेड हैं।

7. पीएम ने भारत की डिजिटल व्यवस्था की तारीफ करते हुए कहा कि यह सिर्फ कोविन की वजह से संभव हुआ है। साझा करने की अपनी प्रेरणा के तहत भारत ने कोविन और कई अन्य प्लेटफॉर्म को ओपन सोर्स सॉफ्टवेयर के तौर पर मुहैया कराया है। 

8. मोदी ने कहा कि जैसे-जैसे भारत में नई वैक्सीन विकसित हो रही हैं, वैसे ही हम अपनी मौजूदा वैक्सीन उत्पादन क्षमता को भी बढ़ाते जा रहे हैं। हमारा उत्पादन बढ़ते ही हम दूसरे देशों को वैक्सीन देना भी शुरू कर देंगे। 

9. प्रधानमंत्री ने इशारों में अमेरिका को नसीहत देते हुए कहा, "वैक्सीन उत्पादन के लिए कच्चे माल की सप्लाई चेनों को खुला रखना जरूरी है। पीएम ने कहा कि क्वाड साझेदारों के साथ भारत अपनी उत्पादन क्षमता का फायदा हिंद-प्रशांत क्षेत्र को वैक्सीन मुहैया कराने में देगा।" बता दें कि अमेरिका ने भारत में कोरोना की दूसरी लहर के दौरान कच्चे माल की सप्लाई पर प्रतिबंध जारी रखा था। हालांकि, बाद में राष्ट्रपति बाइडन ने इस सप्लाई को बहाल करने की मंजूरी दी थी।

10. इसके बाद मोदी ने भारत का वैक्सीन सर्टिफिकेट मंजूर न करने के लिए ब्रिटेन को भी सलाह दे डाली। उन्होंने कहा, "हमें आगे महामारी के आर्थिक प्रभावों पर भी ध्यान केंद्रित करने की जरूरत है। इसलिए एक-दूसरे के वैक्सीन सर्टिफिकेट को मान्यता देकर अंतरराष्ट्रीय यात्राओं को आसान बनाना जरूरी है।" गौरतलब है कि ब्रिटेन ने हाल ही में कोविशील्ड को मान्यता देकर भारत से आने वाले यात्रियों की राह आसान कर दी। लेकिन भारत के कोरोना सर्टिफिकेशन को लेकर अभी भी उसकी तरफ से मंजूरी नहीं दी गई है। यानी भारत से ्ब्रिटेन जाने वाले यात्रियों के लिए संशय की स्थिति बरकरार है।
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