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PM Modi Security Breach: अमरिंदर सिंह ने पंजाब में राष्ट्रपति शासन लगाने का मुद्दा क्यों उठाया, उनके बयान के क्या मायने निकाले जा रहे ?
Thu, 06 Jan 2022 05:28 PM IST
प्रतिभा ज्योति
प्रतिभा ज्योति, अमर उजाला, नई दिल्ली।
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Published by: प्रतिभा ज्योति
Updated Thu, 06 Jan 2022 05:28 PM IST
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पीएम मोदी ने की राष्ट्रपति से मुलाकात
- फोटो :
पीटीआई
विस्तार
पंजाब में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की सुरक्षा में हुई चूक के कारण पंजाब में राष्ट्रपति शासन लगाए जाने के राज्य के पूर्व मुख्यमंत्री कैप्टन अमरिंदर सिंह के बयान के कई गंभीर मायने लगाए जा रहे हैं। माना जा रहा है कि कैप्टन ने ऐसा बयान देकर चरणजीत सिंह सरकार की नाकामी के बहाने कांग्रेस को चौतरफा घेरने और उसके खिलाफ माहौल बनाने की रणनीति बनाई है। कैप्टन के पंजाब में राष्ट्रपति शासन लगाए जाने वाले बयान और प्रधानमंत्री की राष्ट्रपति रामनाथ कोविंद से हुई मुलाकात को भी इसी से जोड़ कर देखा जा रहा है।प्रधानमंत्री ने आज यानी गुरुवार को राष्ट्रपति से राष्ट्रपति भवन में मुलाकात की और बुधवार को पंजाब में उनके काफिले में हुए सुरक्षा चूक का पूरा ब्यौरा दिया। राष्ट्रपति ने इस मामले पर चिंता जताई। वहीं उप राष्ट्रपति एम वेंकैया नायडू ने भी पीएम मोदी को फोन किया। हालांकि सूत्र अभी पंजाब में राष्ट्रपति शासन लगाए जाने की किसी संभावना से इनकार कर रहे हैं।
विपक्षी दल भी चन्नी पर टूटे
पंजाब के विपक्षी दलों ने भी एक सुर में पीएम की सुरक्षा में चूक की निंदा करते हुए चन्नी सरकार को आड़े हाथों लिया है। कई भाजपा शासित राज्यों के मुख्यमंत्रियों ने पंजाब सरकार को बर्खास्त करने की मांग की है। गृह मंत्रालय ने इस गंभीर सुरक्षा चूक पर पंजाब सरकार से विस्तृत रिपोर्ट मांगी है। मंत्रालय ने कहा कि प्रधानमंत्री के कार्यक्रम और यात्रा की योजना के बारे में पंजाब सरकार को पहले ही जानकारी दे दी गयी थी।
पीएम मोदी की सुरक्षा में भारी चूक का मामला सुप्रीम कोर्ट पहुंचा
- फोटो :
ANI
क्या बड़े एक्शन लेने की तैयारी में केंद्र सरकार
माना जा रहा है कि केंद्र सरकार पंजाब में बड़े एक्शन की तैयारी में है। तो क्या यह एक्शन पंजाब में राष्ट्रपति शासन लगाने की हो सकती है? विशेषज्ञ मानते हैं कि राज्य के कानून-व्यवस्था का हवाला देकर केंद्र सरकार राज्य में राष्ट्रपति शासन लगाने की सिफारिश कर सकती है।
दूसरी संभावना यह है कि राज्य के डीजीपी और मुख्य सचिव पर भी इसकी गाज गिर सकती है। हालांकि सूत्रों ने बताया है कि राष्ट्रपति शासन लगाने से पहले भाजपा इसके सभी सियासी समीकरणों को जरूर देखेगी और जल्दबाजी में कोई फैसला नहीं लेगी।
क्या था मामला
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की सुरक्षा में बुधवार को 'गंभीर चूक' हुई। इस कारण पीएम मोदी 20 मिनट तक एक फ्लाईओवर पर फंसे रहे। जिस इलाके में पीएम मोदी का काफिला रुका था, वह आतंकियों के अलावा हेरोइन तस्करों का गढ़ माना जाता है। पिछले साल सितंबर माह में इसी क्षेत्र में आतंकी वारदात हुई थी। मामले की संवेदनशीलता को देखते हुए अब यह मामला सुप्रीम कोर्ट भी पहुंच गया है और इस पर शुक्रवार को सुनवाई होनी है। भाजपा अध्यक्ष जेपी नड्डा ने आरोप लगाया है कि जिस वक्त पीएम का काफिला फ्लाइओवर पर फंसा था उस वक्त सीएम ने फोन नहीं उठाया। वहीं भाजपा नेता स्मृति इरानी ने सवाल उठाया कि सुरक्षा भंग करने वालों को पीएम के रूट तक किसने पहुंचाया?
माना जा रहा है कि केंद्र सरकार पंजाब में बड़े एक्शन की तैयारी में है। तो क्या यह एक्शन पंजाब में राष्ट्रपति शासन लगाने की हो सकती है? विशेषज्ञ मानते हैं कि राज्य के कानून-व्यवस्था का हवाला देकर केंद्र सरकार राज्य में राष्ट्रपति शासन लगाने की सिफारिश कर सकती है।
दूसरी संभावना यह है कि राज्य के डीजीपी और मुख्य सचिव पर भी इसकी गाज गिर सकती है। हालांकि सूत्रों ने बताया है कि राष्ट्रपति शासन लगाने से पहले भाजपा इसके सभी सियासी समीकरणों को जरूर देखेगी और जल्दबाजी में कोई फैसला नहीं लेगी।
क्या था मामला
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की सुरक्षा में बुधवार को 'गंभीर चूक' हुई। इस कारण पीएम मोदी 20 मिनट तक एक फ्लाईओवर पर फंसे रहे। जिस इलाके में पीएम मोदी का काफिला रुका था, वह आतंकियों के अलावा हेरोइन तस्करों का गढ़ माना जाता है। पिछले साल सितंबर माह में इसी क्षेत्र में आतंकी वारदात हुई थी। मामले की संवेदनशीलता को देखते हुए अब यह मामला सुप्रीम कोर्ट भी पहुंच गया है और इस पर शुक्रवार को सुनवाई होनी है। भाजपा अध्यक्ष जेपी नड्डा ने आरोप लगाया है कि जिस वक्त पीएम का काफिला फ्लाइओवर पर फंसा था उस वक्त सीएम ने फोन नहीं उठाया। वहीं भाजपा नेता स्मृति इरानी ने सवाल उठाया कि सुरक्षा भंग करने वालों को पीएम के रूट तक किसने पहुंचाया?
कैप्टन अमरिंदर सिंह
- फोटो :
ANI
कैप्टन ने क्यों उठाया यह मुद्दा
अमरिंदर सिंह ने कहा, 'अगर हमें अपने राज्य को सुरक्षित रखना है और यहां कानून-व्यवस्था बनाए रखनी है, तो मुझे लगता है कि राष्ट्रपति शासन लगाया जाना चाहिए।' बताया जा रहा है कि अमरिंदर सिंह ने सोच-विचार कर राष्ट्रपति शासन लगाए जाने की बात छेड़ी है ताकि पंजाब के मुख्यमंत्री चरणजीत सिंह चन्नी और सीधे कांग्रेस नेतृत्व पर हमला बोला जा सके। जानकार बताते हैं कि चन्नी सरकार ने अमरिंदर सिंह और भाजपा दोनों को एक बड़ा मुद्दा दे दिया है जिसे लेकर वे चुनाव में जाएंगे और इसे बड़ा सियासी रंग देने की कोशिश करेंगे।
जानकार बताते हैं कि अमरिंदर सिंह के लिए यह कांग्रेस पर हमला करने का एक बेहतरीन मौका हाथ लगा है और इसका वे सियासी फायदा उठाने की कोशिश जरूर करेंगे। यदि केंद्र राष्ट्रपति शासन लगा देती है तो सीधा नियंत्रण केंद्र के हाथों में आ जाएगा, जिसके बाद कैप्टन आसानी से कांग्रेस के खिलाफ राज्य की कानून व्यवस्था नहीं संभाल पाने का आरोप लगाकर चुनाव में सियासी फायदा उठाने की कोशिश करेंगे। कांग्रेस छोड़कर अपनी पार्टी बनाने वाले अमरिंदर सिंह ने आगामी चुनाव लड़ने के लिए भारतीय जनता पार्टी के साथ गठबंधन किया है।
अमरिंदर सिंह ने कहा, 'अगर हमें अपने राज्य को सुरक्षित रखना है और यहां कानून-व्यवस्था बनाए रखनी है, तो मुझे लगता है कि राष्ट्रपति शासन लगाया जाना चाहिए।' बताया जा रहा है कि अमरिंदर सिंह ने सोच-विचार कर राष्ट्रपति शासन लगाए जाने की बात छेड़ी है ताकि पंजाब के मुख्यमंत्री चरणजीत सिंह चन्नी और सीधे कांग्रेस नेतृत्व पर हमला बोला जा सके। जानकार बताते हैं कि चन्नी सरकार ने अमरिंदर सिंह और भाजपा दोनों को एक बड़ा मुद्दा दे दिया है जिसे लेकर वे चुनाव में जाएंगे और इसे बड़ा सियासी रंग देने की कोशिश करेंगे।
जानकार बताते हैं कि अमरिंदर सिंह के लिए यह कांग्रेस पर हमला करने का एक बेहतरीन मौका हाथ लगा है और इसका वे सियासी फायदा उठाने की कोशिश जरूर करेंगे। यदि केंद्र राष्ट्रपति शासन लगा देती है तो सीधा नियंत्रण केंद्र के हाथों में आ जाएगा, जिसके बाद कैप्टन आसानी से कांग्रेस के खिलाफ राज्य की कानून व्यवस्था नहीं संभाल पाने का आरोप लगाकर चुनाव में सियासी फायदा उठाने की कोशिश करेंगे। कांग्रेस छोड़कर अपनी पार्टी बनाने वाले अमरिंदर सिंह ने आगामी चुनाव लड़ने के लिए भारतीय जनता पार्टी के साथ गठबंधन किया है।
अमरिंदर सिंह
- फोटो :
पीटीआई
क्या है अमरिंदर सिंह के बयान के मायने?
अमरिंदर सिंह के बयान पर गौर करें तो क्या पंजाब में राष्ट्रपति शासन लगाए जाने की संभावना हो सकती है? इस बारे में कानूनी मामलों के जानकार वरिष्ठ पत्रकार अनूप भटनागर बताते हैं, पीएम की सुरक्षा में चूक गंभीर मामला है। ये जो घटना है काफी गंभीर है। देश के प्रधानमंत्री की सुरक्षा का मामला है। प्रधानमंत्री मोदी जिस फ्लाईओवर पर फंसे थे, वो पाकिस्तान की सीमा से बहुत ज्यादा दूर भी नहीं था। इतना ही नहीं, ये गंभीर चूक इसलिए भी है क्योंकि प्रधानमंत्री ने इशारों में अपनी जान को खतरा बताया।
कहीं गहरी साजिश तो नहीं
उनका कहना है कि इसके पीछे कहीं कोई गहरी साजिश तो नहीं? इंदिरा गांधी और राजीव गांधी की हत्या के मामले में भी ऐसा हुआ था। जब राजीव गांधी की हत्या हुई थी तो लिट्टे ने ड्राईरन किया था। जांच के बाद ही पूरा मामला सामने आएगा लेकिन अब ये जरूर हो सकता है कि यदि केंद्र सरकार चाहे तो इतनी बड़ी चूक को कानून व्यवस्था का मुद्दा बताकर राष्ट्रपति शासन लगाने की सिफारिश कर सकती है।
अब तो चुनावों की घोषणा होने वाली है तो क्या होगा?
इस बारे में अनूप भटनागर कहते हैं चुनावों के दौरान राष्ट्रपति शासन नहीं लगाया जा सकता, लेकिन सरकार चाहे तो उससे पहले इसकी सिफारिश कर सकती है। हो सकता है, पंजाब चुनाव कुछ समय के लिए टल भी जाए। जब केंद्र को वहां की कानून व्यवस्था ठीक होने की रिपोर्ट मिले तब विधानसभा को बहाल करने के लिए चुनाव कराए जा सकते हैं। यानी हो सकता है कि सिर्फ पंजाब चुनाव को आगे भी बढ़ा दिया जाए।
अमरिंदर सिंह के बयान पर गौर करें तो क्या पंजाब में राष्ट्रपति शासन लगाए जाने की संभावना हो सकती है? इस बारे में कानूनी मामलों के जानकार वरिष्ठ पत्रकार अनूप भटनागर बताते हैं, पीएम की सुरक्षा में चूक गंभीर मामला है। ये जो घटना है काफी गंभीर है। देश के प्रधानमंत्री की सुरक्षा का मामला है। प्रधानमंत्री मोदी जिस फ्लाईओवर पर फंसे थे, वो पाकिस्तान की सीमा से बहुत ज्यादा दूर भी नहीं था। इतना ही नहीं, ये गंभीर चूक इसलिए भी है क्योंकि प्रधानमंत्री ने इशारों में अपनी जान को खतरा बताया।
कहीं गहरी साजिश तो नहीं
उनका कहना है कि इसके पीछे कहीं कोई गहरी साजिश तो नहीं? इंदिरा गांधी और राजीव गांधी की हत्या के मामले में भी ऐसा हुआ था। जब राजीव गांधी की हत्या हुई थी तो लिट्टे ने ड्राईरन किया था। जांच के बाद ही पूरा मामला सामने आएगा लेकिन अब ये जरूर हो सकता है कि यदि केंद्र सरकार चाहे तो इतनी बड़ी चूक को कानून व्यवस्था का मुद्दा बताकर राष्ट्रपति शासन लगाने की सिफारिश कर सकती है।
अब तो चुनावों की घोषणा होने वाली है तो क्या होगा?
इस बारे में अनूप भटनागर कहते हैं चुनावों के दौरान राष्ट्रपति शासन नहीं लगाया जा सकता, लेकिन सरकार चाहे तो उससे पहले इसकी सिफारिश कर सकती है। हो सकता है, पंजाब चुनाव कुछ समय के लिए टल भी जाए। जब केंद्र को वहां की कानून व्यवस्था ठीक होने की रिपोर्ट मिले तब विधानसभा को बहाल करने के लिए चुनाव कराए जा सकते हैं। यानी हो सकता है कि सिर्फ पंजाब चुनाव को आगे भी बढ़ा दिया जाए।
पंजाब विधानसभा चुनाव।
- फोटो :
अमर उजाला
चुनावों की घोषणा होनी है, राष्ट्रपति शासन की संभावना नहीं
हालांकि एक कानून विशेषज्ञ इस बात से इनकार करते हैं कि अभी पंजाब में राष्ट्रपति शासन लगाया जा सकता है, क्योंकि चुनाव आयोग जल्दी ही चुनावों की घोषणा करने वाला है, इसलिए इस समय राष्ट्रपति शासन लगाए जाने की जरूरत दिखाई नहीं दे रही। चुनावों की घोषणा होते ही राज्य का प्रशासन चुनाव आयोग के हाथों में आ जाएगा। ऐसे में केंद्र सरकार राष्ट्रपति शासन लगाने का कदम क्यों उठाएगी?
क्या कहते हैं चुनाव आयोग के पूर्व अधिकारी
जबकि चुनाव आयोग के एक पूर्व वरिष्ठ अधिकारी का कहना है कि चुनाव की घोषणा और राष्ट्रपति शासन के बीच कोई संबंध या कोई सांविधानिक बाध्यता नहीं है। केंद्र सरकार को यदि लगता है कि राज्य सरकार कानून व्यवस्था नहीं चला पा रही है तो राष्ट्रपति शासन लगाया जा सकता है।
हालांकि एक कानून विशेषज्ञ इस बात से इनकार करते हैं कि अभी पंजाब में राष्ट्रपति शासन लगाया जा सकता है, क्योंकि चुनाव आयोग जल्दी ही चुनावों की घोषणा करने वाला है, इसलिए इस समय राष्ट्रपति शासन लगाए जाने की जरूरत दिखाई नहीं दे रही। चुनावों की घोषणा होते ही राज्य का प्रशासन चुनाव आयोग के हाथों में आ जाएगा। ऐसे में केंद्र सरकार राष्ट्रपति शासन लगाने का कदम क्यों उठाएगी?
क्या कहते हैं चुनाव आयोग के पूर्व अधिकारी
जबकि चुनाव आयोग के एक पूर्व वरिष्ठ अधिकारी का कहना है कि चुनाव की घोषणा और राष्ट्रपति शासन के बीच कोई संबंध या कोई सांविधानिक बाध्यता नहीं है। केंद्र सरकार को यदि लगता है कि राज्य सरकार कानून व्यवस्था नहीं चला पा रही है तो राष्ट्रपति शासन लगाया जा सकता है।
राष्ट्रपति रामनाथ कोविंद
- फोटो :
अमर उजाला
राष्ट्रपति शासन क्या है?
राष्ट्रपति शासन एक राज्य सरकार का निलंबन और केंद्र का प्रत्यक्ष शासन है। राष्ट्रपति शासन लगाकर केंद्र सरकार राज्य का सीधा नियंत्रण अपने हाथों में ले लेती है और राज्यपाल इसके संवैधानिक प्रमुख बन जाते हैं। विधान सभा या तो भंग हो जाती है या सत्रावसान हो जाता है। ऐसी स्थिति में चुनाव आयोग को छह महीने के भीतर फिर से चुनाव कराने के लिए मजबूर होना पड़ता है।
किसी राज्य में राष्ट्रपति शासन कैसे लगाया जाता है?
भारत के संविधान का अनुच्छेद 356 भारत के राष्ट्रपति को केंद्रीय मंत्रिपरिषद की सलाह पर किसी राज्य पर इसे लागू करने की शक्ति देता है। कुछ शर्तें हैं जिन पर राष्ट्रपति को शासन लागू करने से पहले विचार करना होता है।
1- यदि राष्ट्रपति इस बात से संतुष्ट हैं कि ऐसी स्थिति उत्पन्न हो गई है जिसमें राज्य की सरकार संविधान के प्रावधानों के अनुसार नहीं चल सकती है। ऐसा जरूरी नहीं है कि राष्ट्रपति उस राज्य के राज्यपाल की रिपोर्ट के आधार पर ही यह फैसला लें। यह अनुच्छेद एक साधन है जो केंद्र सरकार को किसी नागरिक अशांति जैसे कि दंगे जिनसे निपटने में राज्य सरकार विफल रही हो, उस दशा में किसी राज्य सरकार पर अपना अधिकार स्थापित करने में सक्षम बनाता है।
2- राज्य सरकार निर्धारित समय के भीतर मुख्यमंत्री के रूप में एक नेता का चुनाव करने में असमर्थ है।
3- एक गठबंधन टूट जाता है जिसके कारण मुख्यमंत्री सदन में अल्पमत में आ जाते हैं और मुख्यमंत्री दी गई अवधि में बहुमत साबित करने में विफल रहते हैं।
राष्ट्रपति शासन एक राज्य सरकार का निलंबन और केंद्र का प्रत्यक्ष शासन है। राष्ट्रपति शासन लगाकर केंद्र सरकार राज्य का सीधा नियंत्रण अपने हाथों में ले लेती है और राज्यपाल इसके संवैधानिक प्रमुख बन जाते हैं। विधान सभा या तो भंग हो जाती है या सत्रावसान हो जाता है। ऐसी स्थिति में चुनाव आयोग को छह महीने के भीतर फिर से चुनाव कराने के लिए मजबूर होना पड़ता है।
किसी राज्य में राष्ट्रपति शासन कैसे लगाया जाता है?
भारत के संविधान का अनुच्छेद 356 भारत के राष्ट्रपति को केंद्रीय मंत्रिपरिषद की सलाह पर किसी राज्य पर इसे लागू करने की शक्ति देता है। कुछ शर्तें हैं जिन पर राष्ट्रपति को शासन लागू करने से पहले विचार करना होता है।
1- यदि राष्ट्रपति इस बात से संतुष्ट हैं कि ऐसी स्थिति उत्पन्न हो गई है जिसमें राज्य की सरकार संविधान के प्रावधानों के अनुसार नहीं चल सकती है। ऐसा जरूरी नहीं है कि राष्ट्रपति उस राज्य के राज्यपाल की रिपोर्ट के आधार पर ही यह फैसला लें। यह अनुच्छेद एक साधन है जो केंद्र सरकार को किसी नागरिक अशांति जैसे कि दंगे जिनसे निपटने में राज्य सरकार विफल रही हो, उस दशा में किसी राज्य सरकार पर अपना अधिकार स्थापित करने में सक्षम बनाता है।
2- राज्य सरकार निर्धारित समय के भीतर मुख्यमंत्री के रूप में एक नेता का चुनाव करने में असमर्थ है।
3- एक गठबंधन टूट जाता है जिसके कारण मुख्यमंत्री सदन में अल्पमत में आ जाते हैं और मुख्यमंत्री दी गई अवधि में बहुमत साबित करने में विफल रहते हैं।
पंजाब का किसान
4- सदन में अविश्वास प्रस्ताव के कारण विधानसभा में सरकार के पास बहुमत नहीं रह जाता है।
5- प्राकृतिक आपदा, युद्ध या महामारी जैसी स्थितियों के कारण चुनाव स्थगित कर दिए गए हों।
पंजाब में कितनी बार लगा है राष्ट्रपति शासन
पंजाब में करीब 10 साल तक प्रभावी रूप से राष्ट्रपति शासन रहा है और यह करीब 3510 दिनों के लिए लगा रहा। इसका अधिकांश हिस्सा 80 के दशक में पंजाब में उग्रवाद के चरम पर था। वास्तव में, पंजाब 1987 से 1992 तक लगातार पांच सालों तक तक राष्ट्रपति शासन के अधीन था।
5- प्राकृतिक आपदा, युद्ध या महामारी जैसी स्थितियों के कारण चुनाव स्थगित कर दिए गए हों।
पंजाब में कितनी बार लगा है राष्ट्रपति शासन
पंजाब में करीब 10 साल तक प्रभावी रूप से राष्ट्रपति शासन रहा है और यह करीब 3510 दिनों के लिए लगा रहा। इसका अधिकांश हिस्सा 80 के दशक में पंजाब में उग्रवाद के चरम पर था। वास्तव में, पंजाब 1987 से 1992 तक लगातार पांच सालों तक तक राष्ट्रपति शासन के अधीन था।