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मोदी ने याद किया बचपन: 'एक मुस्लिम मेहरबान जब अलीगढ़ के ताले बेचने आते थे तो मेरे पिता के पास अपने पैसे रखवाते थे'
Tue, 14 Sep 2021 01:14 PM IST
कीर्तिवर्धन मिश्र
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, अलीगढ़
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, अलीगढ़
Published by: कीर्तिवर्धन मिश्र
Updated Tue, 14 Sep 2021 01:14 PM IST
सार
भाषण के दौरान प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी बोले- कल तक जो अलीगढ़ ताले के जरिए घरों की, दुकानों की रक्षा करता था। 21वीं सदी में वो मेरा अलीगढ़ हिंदुस्तान की सीमाओं की रक्षा का काम करेगा।
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अलीगढ़ में विश्वविद्यालय उद्घाटन में पहुंचे पीएम मोदी ने भाषण के दौरान किया अपने कनेक्शन का जिक्र
- फोटो : ANI
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विस्तार
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी मंगलवार को राजा महेंद्र प्रताप सिंह विश्वविद्यालय के शिलान्यास समारोह में हिस्सा लेने के लिए उत्तर प्रदेश के अलीगढ़ पहुंचे। यहां उन्होंने अपने भाषण के दौरान यूपी का चुनावी बिगुल भी फूंका। मोदी ने विपक्ष पर निशाना साधते हुए उन्हें विकास विरोधी ताकतें करार दिया और यूपी को उनसे बचाने की अपील भी कर दी। हालांकि, इस बीच उन्होंने अलीगढ़ से अपने एक बचपन के कनेक्शन का जिक्र किया। पीएम ने बताया कि जब वे छोटे थे, तो उन्हें यूपी के दो जिलों का नाम काफी सुनाई देता था। इनमें एक अलीगढ़ था, जिसके तालों का जिक्र एक मुस्लिम विक्रेता के कारण सुनने को मिलता था। पीएम ने कहा कि जो अलीगढ़ कभी तालों से घरों-दुकानों की सुरक्षा करता था अब डिफेंस कॉरीडोर के बाद वह रक्षा उत्पादों से देश की रक्षा करेगा।
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मोदी ने सुनाया अलीगढ़ से जुड़ा बचपन का किस्सा
पीएम मोदी ने भाषण के दौरान कहा, "अभी तक लोग अपने घर की या अपनी दुकान की सुरक्षा के लिए अलीगढ़ के भरोसे रहते थे। पता है न, क्योंकि अलीगढ़ का ताला अगर लगा होता था तो लोग निश्चिंत हो जाते थे। और मुझे आज बचपन की एक बात याद करने का मन कर रहा है। करीब 55-60 साल पुरानी बात है। हम बच्चे थे, तो अलीगढ़ से ताले के जो सेल्समैन होते थे। एक मुस्लिम मेहरबान थे, वो हर तीन महीने हमारे गांव आते थे। अभी भी मुझे याद है, वे काली जैकेट पहनते थे और सेल्समैन के नाते दुकानों में अपना ताला रख कर जाते थे और तीन महीने बाद आकर पैसे ले जाते थे।"
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'अलीगढ़ से जो महाशय ताले बेचने आते थे, उनके साथ पिताजी की थी अच्छी दोस्ती'
मोदी ने बताया- "ताला विक्रेता अगल-बगल के गांवों में भी व्यापारियों के पास जाते थे और उनको ताले देते थे। मेरे पिताजी से उनकी बहुत अच्छी दोस्ती थी और वो आते थे तो चार-छह दिन हमारे गांव में रुकते थे और दिन भर जो पैसे वो वसूल कर के ले आते थे, वो पैसे वो मेरे पिताजी के पास छोड़ देते थे। मेरे पिताजी उनके पैसों को संभालते थे। जब चार-छह दिन बाद वो मेरा गांव छोड़कर जाते थे, तो मेरे पिताजी से पैसे लेकर फिर अपनी ट्रेन से निकल जाते थे।"
तालों के बाद अब अलीगढ़ के आयुध करेंगे हिंदुस्तान की सीमाओं की रक्षा
प्रधानमंत्री ने आगे कहा, "हम बचपन में उत्तर प्रदेश के दो शहरों से बड़े परिचित रहे। एक सीतापुर और दूसरा अलीगढ़। हमारे गांव में अगर किसी को आंख की बीमारी में ट्रीटमेंट करनी है, तो हर कोई कहता था कि सीतापुर जाओ। हम ज्यादा समझते नहीं थे, लेकिन सीतापुर शब्द सुनते थे। दूसरा इन महाशय के कारण अलीगढ़ बार-बार सुनते थे। लेकिन अब अलीगढ़ के रक्षा उपकरण भी काम आएंगे। कल तो जो अलीगढ़ ताले के जरिए घरों की, दुकानों की रक्षा करता था। 21वीं सदी में वो मेरा अलीगढ़ हिंदुस्तान की सीमाओं की रक्षा का काम करेगा। यहां ऐसे आयुध बनेंगे। वन डिस्ट्रिक्ट, वन प्रोडक्ट योजना के तहत यूपी सरकार ने अलीगढ़ के तालों और हार्डवेयर को नई पहचान दिलाने का काम किया है।"