{"_id":"66dab069ac08d44c590550f1","slug":"pm-narendra-modi-launches-jal-sanchay-jan-bhagidari-initiative-in-gujarat-jal-shakti-ministry-2024-09-06","type":"story","status":"publish","title_hn":"PM Modi: प्रधानमंत्री ने 'जल संचय जन भागीदारी पहल' की शुरुआत की, बोले-जल संरक्षण मानवता के भविष्य का सवाल","category":{"title":"India News","title_hn":"देश","slug":"india-news"}}
PM Modi: प्रधानमंत्री ने 'जल संचय जन भागीदारी पहल' की शुरुआत की, बोले-जल संरक्षण मानवता के भविष्य का सवाल
Fri, 06 Sep 2024 02:32 PM IST
नितिन गौतम
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, अहमदाबाद
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, अहमदाबाद
Published by: नितिन गौतम
Updated Fri, 06 Sep 2024 02:32 PM IST
सार
प्रधानमंत्री ने कहा कि 'गुजरात को भी भारी संकट का सामना करना पड़ा। हमारी सारी व्यवस्थाओं में भी इतनी क्षमता नहीं है कि इस प्राकृतिक आपदा की घड़ी में हमारी मदद कर सकें, लेकिन गुजरात के लोगों और अन्य देशवासियों में ये आदत है कि संकट की घड़ी में सभी कंधे से कंधा मिलाकर खड़े हो जाते हैं।'
विज्ञापन
पीएम मोदी
- फोटो : अमर उजाला
विस्तार
प्रधानमंत्री ने गुजरात में जल संचय, जन भागीदारी पहल की शुरुआत की। प्रधानमंत्री वर्चुअली कार्यक्रम से जुड़े। कार्यक्रम के दौरान अपने संबोधन में पीएम मोदी ने कहा कि 'यह बेहद अहम पहल है, जिसकी गुजरात की धरती से शुरुआत हो रही है। जल शक्ति मंत्रालय ने इस पहल की शुरुआत की है। हाल के दिनों में देश के हर कोने में भारी बारिश से तबाही जारी है। देश को कोई हिस्सा ही शायद होगा, जिसने इस प्राकृतिक आपदा की वजह से संकट न झेला हो। इस बार गुजरात को भी भारी संकट का सामना करना पड़ा। हमारी सारी व्यवस्थाओं में भी इतनी क्षमता नहीं है कि इस प्राकृतिक आपदा की घड़ी में हमारी मदद कर सकें, लेकिन गुजरात के लोगों और अन्य देशवासियों में ये आदत है कि संकट की घड़ी में सभी कंधे से कंधा मिलाकर खड़े हो जाते हैं।'
'जल संरक्षण मानवता के भविष्य का सवाल'
प्रधानमंत्री ने कहा कि 'जल संरक्षण सिर्फ एक नीति नहीं है बल्कि यह एक प्रथा है। यह हमारी जिम्मेदारी भी है। जब भावी पीढ़ियां हमारा आकलन करेंगी तो हमारा जल के प्रति जो रवैया है, उसका भावी पीढ़ी सबसे पहले आकलन करेंगी। यह जीवन-मरण का सवाल है और यह मानवता के भविष्य का सवाल है। इसलिए हमने सतत विकास के लिए जिन नौ संकल्पों को सामने रखा है, उनमें जल संरक्षण पहला संकल्प है।''
जल संरक्षण भारत की सांस्कृतिक चेतना का हिस्सा
प्रधानमंत्री ने कहा 'जल संरक्षण, प्रकृति संरक्षण...हमारे लिए नए शब्द नहीं हैं। ये भारत की सांस्कृतिक चेतना का हिस्सा है। हम उस संस्कृति के लोग हैं, जहां जल को ईश्वर का रूप कहा गया है। नदियों को देवी माना गया और सरोवरों, कुंडों को देवालय का दर्जा मिला है।' प्रधानमंत्री मोदी ने कहा कि 'मैंने सरदार सरोवर बांध को पूरा करने की चुनौती ली थी और कई चुनौतियों और बाधाओं के बावजूद गुजरात में जल संरक्षण पहल की शुरुआत की। शुरुआत में हमारे विरोधियों ने हम पर तंज कसे कि जो पाइप डाले जा रहे हैं, उनसे पानी की जगह हवा की सप्लाई होगी, लेकिन हमारी मेहनत का फल मिला और इसे अब पूरी दुनिया देख रही है।'
प्रधानमंत्री ने कहा कि मैंने पर्यावरण के लिए देशवासियों से एक पेड़ मां के नाम लगाने की अपील की है। जब पेड़ लगते हैं तो भूजल का स्तर बढ़ता है। बीते कुछ सप्ताह में मां के नाम पर देश में करोड़ों पेड़ लगाए जा चुके हैं। ऐसे कितने ही अभियान और संकल्प हैं, जो 140 करोड़ देशवासियों की भागीदारी से आज जनांदोलन बनते जा रहे हैं। हमारी सरकार पूरे समाज के लिए काम करने की सोच के साथ काम कर रही है। बीते 10 वर्षों में हमारी सभी प्रमुख योजनाओं को देखें तो हमने जल संबंधी मुद्दों पर कई वर्जनाओं को तोड़ा है।
'जल जीवन मिशन से 1.25 लाख बच्चों की असमय मौत रोकी जा सकेगी'
'रिपोर्ट्स के अनुसार जल जीवन मिशन से 1.25 लाख से ज्यादा बच्चों की असमय मौत भी रोकी जा सकेगी। हम हर साल 4 लाख से ज्यादा लोगों को डायरिया जैसी बीमारियों से भी बचा पाएंगे। यानी बीमारियों पर लोगों का जो खर्च होता था, वो भी कम हुआ है।' उन्होंने कहा कि 'पहले देश के तीन करोड़ परिवारों को ही पाइपों के जरिए पानी की सप्लाई हो रही थी। आज देश में 15 करोड़ से ज्यादा परिवारों को यह सुविधा मिल रही है। जल जीवन मिशन के जरिए देश के 75 फीसदी परिवारों को पीने का साफ पानी मिल रहा है। विश्व स्वास्थ्य संगठन के अनुसार, पाइपों के जरिए घर-घर पानी पहुंचने से साढ़े पांच करोड़ घंटे बचेंगे और इस समय में हमारी बहन-बेटियां देश की अर्थव्यवस्था में सीधे योगदान देंगी।'
विज्ञापन
'जल संरक्षण मानवता के भविष्य का सवाल'
प्रधानमंत्री ने कहा कि 'जल संरक्षण सिर्फ एक नीति नहीं है बल्कि यह एक प्रथा है। यह हमारी जिम्मेदारी भी है। जब भावी पीढ़ियां हमारा आकलन करेंगी तो हमारा जल के प्रति जो रवैया है, उसका भावी पीढ़ी सबसे पहले आकलन करेंगी। यह जीवन-मरण का सवाल है और यह मानवता के भविष्य का सवाल है। इसलिए हमने सतत विकास के लिए जिन नौ संकल्पों को सामने रखा है, उनमें जल संरक्षण पहला संकल्प है।''
विज्ञापन
#WATCH | Prime Minister Narendra Modi launches 'Jal Sanchay Jan Bhagidari' initiative in Gujarat, virtually
विज्ञापन विज्ञापन
He says, " Water conservation is not just a policy, it is also an effort and let's say, it is also a virtue. There is generosity as well as responsibility in it. When… pic.twitter.com/sTgFNOtBlX — ANI (@ANI) September 6, 2024
जल संरक्षण भारत की सांस्कृतिक चेतना का हिस्सा
प्रधानमंत्री ने कहा 'जल संरक्षण, प्रकृति संरक्षण...हमारे लिए नए शब्द नहीं हैं। ये भारत की सांस्कृतिक चेतना का हिस्सा है। हम उस संस्कृति के लोग हैं, जहां जल को ईश्वर का रूप कहा गया है। नदियों को देवी माना गया और सरोवरों, कुंडों को देवालय का दर्जा मिला है।' प्रधानमंत्री मोदी ने कहा कि 'मैंने सरदार सरोवर बांध को पूरा करने की चुनौती ली थी और कई चुनौतियों और बाधाओं के बावजूद गुजरात में जल संरक्षण पहल की शुरुआत की। शुरुआत में हमारे विरोधियों ने हम पर तंज कसे कि जो पाइप डाले जा रहे हैं, उनसे पानी की जगह हवा की सप्लाई होगी, लेकिन हमारी मेहनत का फल मिला और इसे अब पूरी दुनिया देख रही है।'
प्रधानमंत्री ने कहा कि मैंने पर्यावरण के लिए देशवासियों से एक पेड़ मां के नाम लगाने की अपील की है। जब पेड़ लगते हैं तो भूजल का स्तर बढ़ता है। बीते कुछ सप्ताह में मां के नाम पर देश में करोड़ों पेड़ लगाए जा चुके हैं। ऐसे कितने ही अभियान और संकल्प हैं, जो 140 करोड़ देशवासियों की भागीदारी से आज जनांदोलन बनते जा रहे हैं। हमारी सरकार पूरे समाज के लिए काम करने की सोच के साथ काम कर रही है। बीते 10 वर्षों में हमारी सभी प्रमुख योजनाओं को देखें तो हमने जल संबंधी मुद्दों पर कई वर्जनाओं को तोड़ा है।
'जल जीवन मिशन से 1.25 लाख बच्चों की असमय मौत रोकी जा सकेगी'
'रिपोर्ट्स के अनुसार जल जीवन मिशन से 1.25 लाख से ज्यादा बच्चों की असमय मौत भी रोकी जा सकेगी। हम हर साल 4 लाख से ज्यादा लोगों को डायरिया जैसी बीमारियों से भी बचा पाएंगे। यानी बीमारियों पर लोगों का जो खर्च होता था, वो भी कम हुआ है।' उन्होंने कहा कि 'पहले देश के तीन करोड़ परिवारों को ही पाइपों के जरिए पानी की सप्लाई हो रही थी। आज देश में 15 करोड़ से ज्यादा परिवारों को यह सुविधा मिल रही है। जल जीवन मिशन के जरिए देश के 75 फीसदी परिवारों को पीने का साफ पानी मिल रहा है। विश्व स्वास्थ्य संगठन के अनुसार, पाइपों के जरिए घर-घर पानी पहुंचने से साढ़े पांच करोड़ घंटे बचेंगे और इस समय में हमारी बहन-बेटियां देश की अर्थव्यवस्था में सीधे योगदान देंगी।'
विज्ञापन
रहें हर खबर से अपडेट, डाउनलोड करें Android Hindi News apps, iOS Hindi News apps और Amarujala Hindi News apps अपने मोबाइल पे|
Get all India News in Hindi related to live update of politics, sports, entertainment, technology and education etc. Stay updated with us for all breaking news from India News and more news in Hindi.
विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन