मासूम बच्ची ने लिखी पीएम मोदी को चिट्ठी, फ्री में हुआ दिल का ऑपरेशन
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रहने को घर नहीं, खाने को पेट भर भोजन नहीं, ऊपर से दिल की बीमारी! बच्ची के दिल में सुराख था। उसके पास बीपीएल (गरीबी रेखा के नीचे) कार्ड नहीं था, जो योजनांतर्गत अपना इलाज करवा पाती।
दूसरी कक्षा में पढ़ने वाली वैशाली याद अपने चाचा के साथ रहती हैं। चाचा पेशे से पेंटर हैं। कमाई का अंजाता इसी से लगा सकते हैं कि बच्ची के लिए दवाइयों की जरूरत आन पड़ी तो चाचा को महज 90 रुपए में उसकी साइकिल बेचनी पड़ी।
बेबस, बेहाल और लाचार बच्ची जाए तो कहां जाए, हर अस्पताल इलाज के एवज में मोटी रकम मांग रहा था। एक दिन बच्ची अपने चाचा के साथ टीवी देख रही थी, तभी प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को देखकर उसके मन एक विचार आया। उसने अपनी नोटबुक से कागज फाड़ा और सारी आपबीती लिखकर चिट्ठी प्रधानमंत्री को भेज दी।
हफ्ते भर के अंदर करिश्मा ही हो गया। वो गुआ जिसकी उम्मीद तो थी लेकिन न के बराबर। नन्हीं बच्ची की आवाज पीएम ने सुन ली थी।
सात साल की बच्ची के दिल में था सुराख, नहीं थे इलाज कराने के पैसे
दिल की बीमारी से पीड़ित छह साल की वैशाली ने प्रधानमंत्री को पत्र लिखकर आर्थिक मदद मांगी थी। बच्ची को तुरंत मदद दी गई जिसके बाद उसका इलाज जारी है और वह ठीक हो रही है।
एक हफ्ते के अंदर प्रधानमंत्री कार्यालय से पुणे के जिला प्रशासन को बच्ची का इलाज कराने का आदेश दिया गया। बच्ची ने अपने पत्र के साथ स्कूल का पहचान पत्र लगया था, इससे जिला प्रशासन ने परिवार का पता लगाने में मदद मिली। तुरंत बच्ची को शहर के रूबी हॉल क्लिनिक में बीते दो जून को भर्ती कराया गया।
डॉ. संजय पठारे ने बताया कि दो जून को बच्ची को भर्ती किया गया और फिर चार जून को उसका सफल ऑपरेशन किया गया। डॉक्टर के मुताबिक बच्ची अब पूरी तरह से स्वस्थ है। 7 जून को उसे डिस्जार्च भी कर दिया गया।
टीवी पर पीएम को देखकर लिख डाली थी चिट्ठी
दूसरी कक्षा की छात्रा वैशाली के पिता मोनीष यादव मूल रुप से अहमदनगर के रहने वाले हैं। वो हड़पसर इलाके में पेंटिंग का काम करते हैं।
ऑपरेशन के बाद वैशाली ने कहा कि ''कई अस्पतालों ने उसके इलाज के लिए मना कर दिया था, इसलिए एक दिन काका दुखी बैठे थे। तभी टीवी पर मोदी दिखे। मैंने एक पेन-पेपर लिया और प्रधानमंत्री को अपनी स्थित के बारे में बताने का फैसला लिया, ताकि फ्री में मेरी सर्जरी हो सके। मेरे काका भी इस बात पर राजी हो गए। मैंने अपनी नोटबुक से एक पेज फाड़ा और दिल की बीमारी से लेकर गरीबी तक सारी बातें प्रधानमंत्री को लिख डालीं।”
रूबी हॉल क्लिनिक के अध्यक्ष डॉ. परवेज ने कहा कि मरीज प्रधानमंत्री के रेफरेन्स से आया था और हमने उसका निःशुल्क इलाज किया।