PM Modi: प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी पालम हवाई अड्डे पहुंचे, पोलैंड और यूक्रेन यात्रा पूरी कर वापस आए
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी पोलैंड और यूक्रेन की अपनी दो देशों की यात्रा पूरी करने के बाद दिल्ली के पालम हवाई अड्डे पर पहुंचे। दो दिन पोलैंड में रहने के बाद प्रधानमंत्री मोदी ने शुक्रवार को यूक्रेन की सात घंटे की यात्रा की थी। इसके बाद वे यहां से रवाना हो गए थे। इस दौरान उन्होंने राष्ट्रपति वोलोदिमीर जेलेंस्की के साथ सार्थक वार्ता की थी। उन्होंने रूस के साथ जारी युद्ध को समाप्त करने में व्यक्तिगत रूप से योगदान देने का आश्वासन दिया था।
कई बैठकों में हिस्सा लेने के बाद प्रधानमंत्री मोदी ने ‘एक्स’ पर लिखा, 'यूक्रेन की मेरी यात्रा ऐतिहासिक रही। मैं भारत-यूक्रेन मित्रता को और गहरा करने के उद्देश्य से इस महान देश में आया हूं। राष्ट्रपति जेलेंस्की के साथ मेरी सार्थक बातचीत हुई। भारत का दृढ़ विश्वास है कि शांति हमेशा बनी रहनी चाहिए। मैं यूक्रेन की सरकार और लोगों को उनके आतिथ्य के लिए धन्यवाद देता हूं।'
इससे पहले दिन में पीएम मोदी ने यहां राष्ट्रपति जेलेंस्की के साथ व्यापक वार्ता की। उन्होंने यूक्रेन और रूस के बीच जारी संघर्ष का समाधान निकालने के लिए एक-दूसरे से बातचीत की जरूरत पर बल दिया। उन्होंने कहा था कि भारत, शांति के हर प्रयास में सक्रिय भूमिका निभाने के लिए तैयार है। रूस ने 24 फरवरी, 2022 को यूक्रेन पर हमला किया था। तब से लेकर अभी तक दोनों देशों के बीच युद्ध जारी है। प्रधानमंत्री मोदी सुबह एक विशेष ट्रेन से कीव पहुंचे थे।
चार भीष्म क्यूब्स भेंट किए
यूक्रेन यात्रा पर प्रधानमंत्री ने जेलेंस्की को चार भीष्म (भारत स्वास्थ्य सहयोग हित और मैत्री पहल) क्यूब्स भेंट किए। प्रत्येक भीष्म क्यूब में सभी प्रकार की चोटों और चिकित्सा स्थितियों के लिए प्राथमिक देखभाल से जुड़ी दवाइयां और उपकरण शामिल हैं। जेलेंस्की ने क्यूब्स की मानवीय सहायता के लिए प्रधानमंत्री को धन्यवाद दिया, जिससे घायलों के उपचार में तेजी आएगी और बहुमूल्य जीवन बचाने में मदद मिलेगी।
भीष्म क्यूब्स के बारे में जानिए
बयान के मुताबिक, इसमें बुनियादी ऑपरेशन कक्ष के लिए सर्जिकल उपकरण भी शामिल हैं जो प्रतिदिन 10-15 बुनियादी सर्जरी सुनिश्चित कर सकते हैं। ‘भीष्म क्यूब’ में तरह-तरह की आपातकालीन चिकित्सीय स्थिति जैसे आघात लगने, रक्तस्राव होने, जल जाने, हड्डी टूटने, इत्यादि के लगभग 200 मरीजों का इलाज करने की क्षमता है। इसमें सीमित मात्रा में अपनी जरूरत की बिजली और ऑक्सीजन भी उत्पन्न हो सकती है। यूक्रेन की चिकित्सा टीम को ‘भीष्म क्यूब’ के संचालन का प्रारंभिक प्रशिक्षण प्रदान करने के लिए भारतीय विशेषज्ञों की एक टीम तैनात की गई है। इन क्यूब्स को एक ऐसे ढांचे पर रखा जाता है जो समायोज्य (अड्जस्टबल) एवं मजबूत होता है और वायु, समुद्र, भूमि तथा ड्रोन द्वारा लाया व ले जाया जा सकता है। वास्तव में, मिनी क्यूब्स को एक व्यक्ति द्वारा ले जाया जा सकता है, क्योंकि उनका अधिकतम वजन 20 किलोग्राम है।