दुनिया का सबसे बहादुर देश है इजरायल, भारत को भी लेने चाहिए ये 5 सबक
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प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी इजरायल की यात्रा पर निकलने के साथ ही इतिहास के ऐसे पहले भारतीय प्रधानमंत्री बन गए हैं जो इस यहूदी देश की यात्रा करेगा। इजरायल को लेकर बाहरी दुनिया में कई तरह की बातें होती हैं लेकिन एक बात जो पूरी दुनिया एक सुर में मानती है वो है इस छोटे से देश की बहादुरी।
अपनी आजादी के साथ ही तमाम बाहरी संकटों से जूझते रहे इजरायल ने तेजी से तरक्की की राह पकड़ी और खुद को दुनिया में एक अलग ताकत के रूप में स्थापित किया, ऐसी ताकत जिसकी ओर बड़े से बड़े देश भी आंख उठाने से डरते हैं। भारत की तरह ही लंबे समय तक आतंकवाद से जूझते रहे इजरायल ने उसके आगे घुटने नहीं टेके बल्कि उसे जड़ से नेस्तनाबूद कर दिया।
एक दौर में इजरायल भी अपने पडोसियों से उसी तरह परेशान रहा जैसे भारत, लेकिन आज शायद ही कोई देश उसके पंगा लेने की जुर्रत कर पाता है। भारत और इजरायल लगभग एकसाथ ही आजाद हुए लेकिन आज अर्थव्यवस्था, शिक्षा, निर्यात, आतंकवाद के निवारण और वैश्विक ताकत के मामले में इजरायल कई पायदान आगे खड़ा है। ऐसे में भारत को इजरायल से कुछ जरूरी सबक लेने की जरूरत है, जिन्हें अपनाकर वह अपनी समस्याओं से पार पा सकता है।
आतंकवाद से लड़ाई
अपने जन्म के साथ ही इजरायल को शुरू से आतंकवाद और बाहरी दुश्मनों से जूझना पड़ा है। इजरायल के जन्म के साथ ही अरब देशों के साथ उसका युद्ध शुरू हो गया, जो लंबे समय तक चला। इसके बाद फलस्तीन संगठन पीएलओ के साथ भी उसकी लड़ाई जारी रही।
एक दौर में शायद ही कोई दिन बीतता था जब इजरायल के किसी न किसी हिस्से में आतंकवादी घटना न होती हो। यहां तक की म्युनिख ओलंपिक में उसके नौ खिलाड़ियों को भी मौत के घाट उतार दिया गया। लेकिन इसके बाद इजरायल ने आतंकवाद के खिलाफ ऐसा कड़ा रुख अख्तियार किया कि धीरे धीरे उसके देश से इसका नामोनिशान मिट गया।
आतंकियों और उनका सहयोग करने वालों के खिलाफ किसी तरह की मुर्रव्वत न करने की नीति ने इजरायल से आतंकवाद को जड़ से खत्म कर दिया। आतंक के प्रति इजरायल में किसी तरह की दया नहीं दिखाई जाती, इसी का नतीजा है कि पडोसी देश सीरिया में जहां खुंखार आतंकी संगठन IS ने कहर बरपाया हुआ है वहीं वह कभी इजरायल में घुसने की जुर्रत भी नहीं कर पाता। भारत को भी आतंक के प्रति इजरायल की इस नीति से सबक लेना चाहिए।
सबसे खतरनाक खुफिया एजेंसी है मोसाद
इजरायल की खुफिया एजेंसी मोसाद को दुनिया की सबसे खतरनाक खुफिया एजेंसी कहा जाता है। मोसाद की सटीकता का अंदाजा इसी से लगाया जा सकता है कि आज तक उसका कोई ऑपरेशन फेल नहीं हुआ। 1972 के म्यूनिख ओलंपिक में फलस्तीन के आतंकी संगठन ने इजराल के 12 खिलाड़ियों को मौत के घाट उतार दिया था।
जिसका बदला मोसाद ने तीन दशक तक लिया और उस हमले में शामिल रहे सभी आतंकियों को बेहद खतरनाक मौत दी। उसी ऑपरेशन में शामिल रहे बेंजामिन नेतन्याहू आज इजरायल के प्रधानमंत्री भी हैं। इसके अलावा आतंकियों ने जब इजरायल के जहाज का अपहरण कर लिया तब मोसाद ने बिना किसी की जान गंवाए आतंकवादियों को मार गिराया और अपने जहाज को सकुशल रिहा करवा लिया। मोसाद की तरह ही भारत को भी अपनी सुरक्षा एजेंसियों को शक्तिशाली बनाने की जरूरत है।
आंख उठाकर देखने की जुर्रत नहीं करता कोई देश
1948 में आजादी पाने के बाद इजरायल ने तेजी से खुद को अपने पैरों पर खड़ा किया। रक्षा के क्षेत्र में अपनी ताकत को इतना बढ़ाया कि दुनिया के सबसे बड़े रक्षा उत्पादकों में उसका नाम लिया जाता है। अमेरिका के बाद इजरायल ही भारत का सबसे बड़ा रक्षा उपकरण निर्यातक है। इजरायल की वायु सेना दुनिया की चौथी सबसे ताकतवर वायु सेना है, ब्रिटेन, जर्मनी फ्रांस जैसे तमाम विकसित देश भी उससे पीछे हैं।
इसकी मारक क्षमता इतनी खतरनाक है कि जून 1967 में जार्डन, सीरिया और इराक सहित आधा दर्जन मुस्लिम देशों ने मिलकर इजरायल पर हमला किया था, लेकिन इसकी वायुसेना ने छह दिनों में ही एकसाथ सभी को धूल चटा दी। उसके बाद कोई देश इजरायल के खिलाफ इस तरह हमला करने की हिम्मत नहीं कर पाया।
अपने जन्म के बाद से इजरायल ने अभी तक सात लड़ाइयां लड़ी हैं सभी में उसे एकतरफा जीत मिली है। इजरायल दुनिया का एकलौता देश है जिस पर किसी मिसाइल से हमला नहीं किया जा सकता, उसकी बड़ी वजह है पूरे देश का एंटी बैलेस्टिक मिसाइल डिफेंस सिस्टम से लैस होना।
विज्ञान के क्षेत्र में ढेरों उपलब्धियां
साइंस के क्षेत्र में इजरायल ने शानदार तरक्की की है। पूरे देश में ऐंटी बैलेस्टिक मिसाइल डिफेंस सिस्टम के अलावा रक्षा के क्षेत्र में इजरायल में ढेरों अविष्कार किए गए हैं। घरेलू कंप्यूटर के उपयोग के मामले में इजरायल पहले नंबर पर है। अमेरिका के बाहर माइक्रोसाफ्ट ने अपने रिसर्च सेंटर सिर्फ इजरायल में ही बनाए हैं।
सिलिकॉन वैली के बाद सबसे ज्यादा साफ्टवेयर कंपनियां भी इजरायल में ही हैं। माइक्रोसाफ्ट का पहला पेंटियम चिप भी इजरायल में ही बनाया गया था। इजरायल की सीमाएं पूरी तरह हाइटेक सिस्टम से लैस हैं जहां से किसी तरह की घुसपैठ नहीं हो सकती। इजरायल के बैंक द्वारा जारी नोटों को दृष्टिहीन भी आसानी से पहचान सकते हैं।
शिक्षा के क्षेत्र में शानदार उपलब्धियां
शिक्षा के क्षेत्र में भी इजरायल की शानदार उपलब्धियां हैं। आबादी के हिसाब से इजरायल में सबसे ज्यादा विश्वविद्यालय हैं। वहां सरकार शिक्षा पर विशेष फोकस करती है। यहां शिक्षा और सेना में जाना हर नागरिक के लिए अनिवार्य है। इजरायल में शिक्षा की तमाम किताबें सरकार ही उपलब्ध कराती है यही कारण है कि पूरे देश में मात्र 40 बुक स्टोर हैं। यहां छपने वाली प्रत्येक किताब को जेविश नेशनल यूनिवर्सिटी की लाइब्रेरी में रखा जाता है। इजरायल में प्राथमिक शिक्षा में भी हाइटेक तकनीक का इस्तेमाल किया जाता है जो पूरी तरह पेपर लैस है। यहां प्रति दस हजार की आबादी पर 109 रिसर्च पेपर प्रकाशित किए जाते हैं, जो दुनिया में सबसे ज्यादा हैं।