CSIR: पीएम मोदी ने सीएसआईआर से 2042 के लिए विजन विकसित करने को कहा, ऊर्जा जरूरतों के लिए एकजुट पहल की अपील
पीएम मोदी ने वैज्ञानिक समुदाय के अग्रणी लोगों से वैज्ञानिक अनुसंधान और विकास को बढ़ावा देने में मदद के लिए ‘एक व्यक्ति, एक प्रयोगशाला’ का दृष्टिकोण अपनाने को कहा। प्रधानमंत्री ने यह भी सुझाव दिया कि सभी प्रयोगशालाओं का एक वर्चुअल शिखर सम्मेलन नियमित रूप से आयोजित किया जा सकता है, जिसमें वे एक-दूसरे के अनुभव से नई चीजें सीख सकते हैं।
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प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने शनिवार को देश के विकास में वैज्ञानिक और औद्योगिक अनुसंधान परिषद (सीएसआईआर) के प्रयासों की सराहना की और सीएसआईआर के 100 साल के होने पर 'विजन-2042' विकसित करने का आग्रह किया। प्रधानमंत्री मोदी ने भारत की ऊर्जा जरूरतों को पूरा करने और सतत विकास के लिए ‘सर्कुलर इकोनॉमी’ को बढ़ावा देने के लिए उद्योग, शैक्षणिक और अनुसंधान संगठनों से समेकित प्रयास की अपील की।
पीएम मोदी ने शनिवार को 7, लोक कल्याण मार्ग पर सीएसआईआर सोसाइटी की बैठक की अध्यक्षता के दौरान यह टिप्पणी की। प्रधानमंत्री वैज्ञानिक और औद्योगिक अनुसंधान परिषद के अध्यक्ष भी हैं। प्रधानमंत्री ने सीएसआईआर की पिछले 80 वर्षों की यात्रा के दस्तावेजीकरण के महत्व पर प्रकाश डाला, जो अब तक हुई प्रगति की समीक्षा में मदद कर सकता है और कमियों की पहचान कर उन्हें दूर किया जा सकता है।
बैठक में केंद्रीय विज्ञान और प्रौद्योगिकी मंत्री जितेंद्र सिंह, जो सीएसआईआर के उपाध्यक्ष हैं और केंद्रीय वाणिज्य और उद्योग मंत्री पीयूष गोयल सहित सीएसआईआर सोसाइटी के अन्य सदस्य जिनमें प्रख्यात वैज्ञानिक, उद्योगपति और सरकार में वैज्ञानिक और अन्य मंत्रालयों के सचिव उपस्थित थे। बैठक के दौरान, प्रधानमंत्री ने इस बात पर जोर दिया कि प्रौद्योगिकी को आम आदमी तक पहुंचाने के लिए वैज्ञानिक, वाणिज्यिक और सामाजिक घटकों का एक एकीकृत दृष्टिकोण अपनाया जाना चाहिए।
पीएम मोदी ने वैज्ञानिक समुदाय के अग्रणी लोगों से वैज्ञानिक अनुसंधान और विकास को बढ़ावा देने में मदद के लिए ‘एक व्यक्ति, एक प्रयोगशाला’ का दृष्टिकोण अपनाने को कहा। प्रधानमंत्री ने यह भी सुझाव दिया कि सभी प्रयोगशालाओं का एक वर्चुअल शिखर सम्मेलन नियमित रूप से आयोजित किया जा सकता है, जिसमें वे एक-दूसरे के अनुभव से नई चीजें सीख सकते हैं।
उन्होंने वैज्ञानिक समुदाय से अनाज और बाजरे की नई किस्मों में प्रोटीन की मात्रा बढ़ाने के लिए तकनीकी समाधान लाने का आह्वान किया, ताकि उपज और पोषण सामग्री में सुधार किया जा सके। उन्होंने वैज्ञानिकों से स्वदेशी खाद्य उत्पादों के उच्च पोषण मूल्य की एक सूची विकसित करने को कहा, जो उनकी वैश्विक स्वीकार्यता को बढ़ाने में मदद करेगा।
पीएम मोदी ने उद्योग और अकादमिक और अनुसंधान संगठनों से भारत की ऊर्जा जरूरतों को पूरा करने पर ध्यान केंद्रित करने और अधिक एकीकरण के साथ काम करने और ‘सर्कुलर इकोनॉमी’ को बढ़ावा देने और सतत विकास की दिशा में आर्थिक रूप से व्यवहार्य समाधान विकसित करने का आह्वान किया। प्रधानमंत्री ने भारत से न केवल भारत के लिए बल्कि दुनिया के लिए प्रौद्योगिकियों का विकास करने और हरित ऊर्जा पर ध्यान केंद्रित करने वाली ऊर्जा जरूरतों को पूरा करने के लिए नए दृष्टिकोणों को अपनाने का आह्वान किया।
पीएम मोदी ने भविष्य के भारत और दुनिया की मांगों की जरूरतें पूरी करने के लिए पारंपरिक ज्ञान से लेकर छात्रों की रुचियों, कौशल सेट और दक्षताओं की मैपिंग तक विभिन्न क्षेत्रों में कृत्रिम बुद्धिमत्ता जैसे वैज्ञानिक दृष्टिकोण और प्रौद्योगिकी के इस्तेमाल करने की आवश्यकता पर प्रकाश डाला। इससे पहले अपने उद्घाटन भाषण में, विज्ञान और प्रौद्योगिकी मंत्री डॉ जितेंद्र सिंह ने इस बात पर प्रकाश डाला कि जब भारत ने इस वर्ष आजादी के 75 साल पूरे किए तो सीएसआईआर ने 80 साल पूरे कर लिए हैं।उन्होंने उद्योग, शिक्षा और अनुसंधान के एकीकरण, तालमेल और निर्मूलीकरण पर जोर दिया।
सीएसआईआर के महानिदेशक डॉ एन कलाईसेल्वी ने सीएसआईआर की हालिया उपलब्धियों और योगदान पर एक प्रस्तुति दी। उन्होंने भारत की पहली हाइड्रोजन फ्यूएल सेल बस, जम्मू-कश्मीर में बैंगनी क्रांति की शुरुआत और भारत के समृद्ध पारंपरिक ज्ञान पर आधारित नवाचार को बढ़ावा देने के लिए टीकेडीएल पुस्तकालय खोलने के प्रयासों पर भी प्रकाश डाला।
एमआरएनए प्लेटफॉर्म प्रौद्योगिकी के माध्यम से भविष्य की महामारियों के लिए तैयारी, युवा वैज्ञानिक नेताओं का पोषण, और टिकाऊ स्टार्ट-अप और जिज्ञासा वर्चुअल लैब के माध्यम से स्कूली छात्रों तक पहुंच बनाना जैसे कुछ अन्य प्रमुख पहल थीं, जिनके बारे में डीजी सीएसआई में जानकाकी दी। उन्होंने सीएसआईआर के 'विजन 2030' का रोड मैप भी पेश किया, जो राष्ट्रीय महत्वाकांक्षाओं और विजन-2042 के अनुरूप है।