CAPF: सीएपीएफ का नया कानून लागू होने के बाद पीएम मोदी करेंगे अर्धसैनिक बलों की कॉन्फ्रेंस, आईबी करेगी आयोजन
केंद्र CAPF की पहली शीर्ष कॉन्फ्रेंस आयोजित करेगा, जिसे प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी संबोधित करेंगे। IB इसकी जिम्मेदारी संभालेगा। नए CAPF कानून का विरोध तेज है, पूर्व अधिकारी सुप्रीम कोर्ट जाने और 6 मई को जंतर-मंतर पर प्रदर्शन की तैयारी में हैं।
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केंद्रीय अर्धसैनिक बलों 'सीएपीएफ' की एक अहम कॉन्फ्रेंस के आयोजन की तैयारी की जा रही है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी, इस कॉन्फ्रेंस को संबोधित करेंगे। खुफिया ब्यूरो 'आईबी' को इस कॉन्फ्रेंस के आयोजन की जिम्मेदारी सौंपी गई है। यह पहली बार हो रहा है, जब आंतरिक सुरक्षा को लेकर सीएपीएफ की इस तरह की कॉन्फ्रेंस होगी। अभी तक डीजी/आईजी का सालाना सम्मेलन होता रहा है, जिसमें प्रधानमंत्री और केंद्रीय गृह मंत्री हिस्सा लेते हैं। सभी केंद्रीय बलों में इस खास सम्मेलन को लेकर एक आदेश जारी किया गया है, जिसमें कुछ रैंकों से सम्मेलन के एजेंडे को लेकर सुझाव देने के लिए कहा गया है।
बता दें कि पिछले दिनों संसद में 'केंद्रीय सशस्त्र पुलिस बल (सामान्य प्रशासन) विधेयक, 2026', पारित होने के बाद उसे राष्ट्रपति की मंजूरी मिल गई थी। देश में अब सीएपीएफ का नया कानून लागू हो गया है। सीएपीएफ के पूर्व कैडर अफसर इस कानून को सुप्रीम कोर्ट में चुनौती देने की तैयारी कर रहे हैं। पूर्व कैडर अफसर, नए कानून की खिलाफत कर रहे हैं। उनका कहना है कि इससे कैडर अफसरों की पदोन्नति के अवसर खत्म होंगे। वे पदोन्नति में पिछड़ते चले जाएंगे। गृह मंत्रालय को इस मामले में असीमित शक्तियां मिल जाएंगी।
'अलायंस ऑफ ऑल एक्स पैरामिलिट्री फोर्सेस वेलफेयर एसोसिएशन' के तत्वावधान में पूर्व कैडर अफसर और उनके परिजन छह मई को दिल्ली के जंतर मंतर पर विरोध प्रदर्शन करेंगे। सूत्रों के मुताबिक, इससे पहले जब डीजी आईजी कॉन्फ्रेंस होती है तो उसमें सभी केंद्रीय बलों के डीजी मौजूद रहते हैं। केवल सीएपीएफ के शीर्ष अफसरों की कॉन्फ्रेंस, पहली बार आयोजित की जा रही है। जिस तरह से डीजी आईजी सम्मेलन, आईबी द्वारा आयोजित किया जाता है, उसी तरह सीएपीएफ सम्मेलन भी खुफिया ब्यूरो ही आयोजित कर रह है। हालांकि अभी सम्मेलन की तिथि निर्धारित नहीं की गई है, लेकिन कहा जा रहा है कि यह सम्मेलन जल्द ही आयोजित होगा।
इस सम्मेलन का मकसद, सीएपीएफ के शीर्ष नेतृत्व को विभिन्न तरह की जिम्मेदारियों का निर्वहन करने के लिए एक यूनिफाइड प्लेटफार्म मुहैया कराना है। इसके जरिए आंतरिक सुरक्षा के मोर्चे पर पहले से ज्यादा मजबूती के साथ काम किया जाएगा। आंतरिक सुरक्षा की नई चुनौतियां क्या हो सकती है, इस बाबत उक्त प्लेटफार्म पर चर्चा होगी। बढ़ती चुनौतियों के मद्देनजर, सीएपीएफ और राज्यों की पुलिस किस तरह से बेहतर समन्वय के साथ काम कर सकती है, सम्मेलन में चर्चा की जाएगी।
आईबी ने सभी केंद्रीय बलों को संदेश भेजकर सम्मेलन के लिए सुझाव मांगे हैं। सीएपीएफ के अफसरों को कई विषयों पर सुझाव देने हैं। ये सुझाव, बीस अप्रैल तक संबंधित फोर्स के मुख्यालय को भेजे जाने हैं। डीजी द्वारा उन सुझावों पर गौर करने के बाद ही उन्हें आईबी को भेजा जाएगा। वहां से इन सुझावों की एक प्रति पीएमओ और एनएसए दफ्तर के भेजी जाएगी। हालांकि इससे पहले केंद्रीय गृह सचिव, सीएपीएफ से मिले सुझावों पर नजर डालेंगे। इस संबंध में पूर्व कैडर अफसरों का कहना है कि सीएपीएफ को जो भी जिम्मेदारी सौंपी गई है, वह हर सूरत में पूरी की गई है। बात चाहे आतंकवाद की हो या नक्सल की, दोनों ही जगहों पर सीएपीएफ ने खुद को साबित कर दिखाया है।
अब सरकार ने नया कानून बनाकर कैडर अफसरों के हितों पर कुठाराघात किया है। सीआरपीएफ और बीएसएफ में कंपनी कमांड करने वाले सहायक कमांडेंट को 15 वर्ष में पहली पदोन्नति नहीं मिल रही। ऐसे में वे अपने पूरे सेवा कार्यकाल के दौरान कमांडेंट के पद से ही रिटायर हो जाएंगे। कैडर अफसर, उक्त सम्मेलन के द्वारा प्रधानमंत्री मोदी तक अपनी बात पहुंचाने का प्रयास करेंगे।