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India-Iran: प्रधानमंत्री मोदी ने ईरानी राष्ट्रपति पेजेशकियन से फोन पर की बात, किन मुद्दों पर हुई चर्चा?

Tue, 30 Jun 2026 09:42 PM IST
राहुल कुमार एएनआई, नई दिल्ली।
एएनआई, नई दिल्ली। Published by: राहुल कुमार Updated Tue, 30 Jun 2026 09:42 PM IST
सार

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने मंगलवार की शाम को ईरान के राष्ट्रपति मसूद पेजेशकियन से फोन पर बात की। इस दौरान उन्होंने पश्चिम एशिया में हाल ही में हुए संघर्ष को खत्म करने के लिए बनी सहमति का स्वागत किया।

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PM Modi Speaks to Iranian President Pezeshkian, Reiterates Need for Dialogue and Lasting Peace in West Asia
PM मोदी ने ईरान के राष्ट्रपति पेजेशकियन से की फोन पर बात। - फोटो : अमर उजाला ग्राफिक्स

विस्तार

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने मंगलवार को ईरान के राष्ट्रपति मसूद पेजेशकियन से टेलीफोन पर बातचीत की। बातचीत के दौरान राष्ट्रपति पेजेशकियन ने प्रधानमंत्री मोदी को पश्चिम एशिया के हालिया घटनाक्रम और आगे की स्थिति से अवगत कराया। ईरान अमेरिका शांति समझौते के बाद दोनों नेताओं के बीच यह पहली बातचीत है। इससे पहले मार्च में प्रधानमंत्री मोदी ने राष्ट्रपति  मसूद पेजेशकियन से बात की थी और ईद-नौरोज की शुभकामनाएं दी थीं।  

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इन मुद्दों पर हुई चर्चा 
प्रधानमंत्री मोदी ने हाल में हुए शांति समझौते का स्वागत किया और दोहराया कि भारत का लगातार यह रुख रहा है कि सभी मुद्दों का समाधान बातचीत और कूटनीति के माध्यम से ही होना चाहिए। प्रधानमंत्री ने क्षेत्र में स्थायी शांति और स्थिरता सुनिश्चित करने के लिए निरंतर प्रयासों की आवश्यकता पर भी जोर दिया। 
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पीएम मोदी ने दिया समुद्री सुरक्षा पर जोर
पीएम मोदी ने विशेष रूप से समुद्री मार्गों की सुरक्षा और अंतरराष्ट्रीय व्यापार को निर्बाध बनाए रखने की आवश्यकता पर जोर दिया। उन्होंने कहा कि वैश्विक आपूर्ति श्रृंखला और आर्थिक स्थिरता के लिए समुद्री परिवहन की स्वतंत्रता सुनिश्चित करना बेहद महत्वपूर्ण है।
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प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने राष्ट्रपति मसूद पेजेशकियन से बातचीत के बाद सोशल मीडिया मंच एक्स पर कहा कि दोनों नेताओं के बीच पश्चिम एशिया के हालिया घटनाक्रम पर चर्चा हुई। उन्होंने वार्ता में हुई प्रगति का स्वागत करते हुए उम्मीद जताई कि निरंतर प्रयासों से क्षेत्र में स्थायी शांति स्थापित होगी। प्रधानमंत्री ने भारत और विश्व के लिए होर्मुज जलडमरूमध्य में नौवहन की स्वतंत्रता के महत्व को भी दोहराया।

इससे पहले दोनों नेताओं की 21 मार्च को भी बातचीत हुई थी। उस समय उन्होंने पश्चिम एशिया की सुरक्षा स्थिति पर विस्तार से चर्चा की थी। बातचीत में प्रधानमंत्री मोदी ने क्षेत्र के महत्वपूर्ण ढांचों (इन्फ्रास्ट्रक्चर) पर हुए हमलों की निंदा की थी। साथ ही उन्होंने समुद्री रास्तों की सुरक्षा और जहाजों की आवाजाही को सुरक्षित बनाए रखने के महत्व पर भी जोर दिया था। इससे पहले 12 मार्च को हुई बातचीत में भी प्रधानमंत्री मोदी ने क्षेत्र में बढ़ते तनाव पर चिंता जताई थी। उन्होंने कहा था कि इससे आम लोगों की जान गई है और बुनियादी ढांचे को भी नुकसान पहुंचा है।

पिछले महीने ब्रिक्स देशों के विदेश मंत्रियों की बैठक में शामिल होने के लिए नई दिल्ली आए ईरान के विदेश मंत्री सैयद अब्बास अराघची ने चाबहार बंदरगाह को भारत और ईरान के सहयोग का एक बड़ा प्रतीक बताया। उन्होंने भरोसा जताया कि भारत की मदद से विकसित हो रहा यह बंदरगाह भारत के लिए मध्य एशिया, कॉकेसस और यूरोप तक पहुंचने का 'सुनहरा द्वार' बनेगा।

अराघची ने कहा, चाबहार बंदरगाह भारत और ईरान के सहयोग की सबसे अहम मिसालों में से एक है। हमें खुशी है कि इसके विकास में भारत ने महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है। फिलहाल अमेरिका के प्रतिबंधों की वजह से इसकी रफ्तार कुछ धीमी हुई है, लेकिन मुझे पूरा विश्वास है कि यह बंदरगाह भारत के लिए मध्य एशिया, कॉकेसस और फिर यूरोप तक पहुंचने का सुनहरा रास्ता बनेगा। वहीं यूरोप, मध्य एशिया और दूसरे देशों के लिए भी यह हिंद महासागर तक पहुंचने का अहम मार्ग होगा।

उन्होंने कहा, यह एक बेहद रणनीतिक और महत्वपूर्ण बंदरगाह है, जो हमारे, भारत और कई दूसरे देशों के लिए भी काफी अहम है। मुझे उम्मीद है कि भारत चाबहार बंदरगाह पर अपना काम जारी रखेगा, ताकि इसका पूरा विकास हो सके और यह भारत व आसपास के देशों के हित में काम कर सके।

अराघची ने कहा, भारत की अंतरराष्ट्रीय स्तर पर अच्छी छवि है और वह इस क्षेत्र में कूटनीति, शांति और सुरक्षा को बढ़ावा देने में बड़ी भूमिका निभा सकता है। भारत की फारस की खाड़ी के लगभग सभी देशों से अच्छे संबंध हैं, इसलिए हम इस क्षेत्र में भारत की किसी भी सकारात्मक और रचनात्मक भूमिका का स्वागत करते हैं।


खामेनेई की अंतिम विदाई कार्यक्रम में ये करेंगे भारत का प्रतिनिधित्व
ईरान के पूर्व सुप्रीम नेता अयातुल्लाह अली खामेनेई को मौत के लगभग 130 दिनों के बाद 4 जुलाई को दफनाया जाएगा। सूत्रों के हवाले से मिली जानकारी के अनुसार, बिहार के राज्यपाल लेफ्टिनेंट जनरल (रिटायर्ड) सैयद अता हसनैन और विदेश राज्य मंत्री पबित्रा मार्गेरिटा खामेनेई के जनाजे और दफनाने की रस्मों में भारत का प्रतिनिधित्व करेंगे।

ईरान के राष्ट्रपति मसूद पेजेशकियन ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को इन कार्यक्रमों में शामिल होने के लिए आधिकारिक तौर पर आमंत्रित किया था। ईरान की सरकारी मीडिया के अनुसार, ईरान के पूर्व सुप्रीम लीडर अली खामेनेई को दफनाने का कार्यक्रम 4 से लेकर 9 जुलाई तक होगा। आधिकारिक बयान के मुताबिक, खामेनेई और उनके परिवार के सदस्यों के लिए समारोह तेहरान, कोम और मशहद में होंगे।




 

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