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प्रधानमंत्री की सुरक्षा में चूक: सुरक्षा एजेंसियों की जांच से घबराया एसएफजे, अब मीडिया को भी भेज रहा धमकी भरे संदेश

Jitendra Bhardwaj जितेंद्र भारद्वाज
Updated Wed, 19 Jan 2022 06:42 PM IST
सार

पिछले दिनों प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की सुरक्षा चूक मामले की जांच के लिए सुप्रीम कोर्ट द्वारा गठित कमेटी की चेयरपर्सन रिटायर्ड जस्टिस इंदु मल्होत्रा को भी एसएफजे ने धमकी दी थी। अपनी धमकी में इस संगठन ने कहा था, इंदु मल्होत्रा को पीएम मोदी की सुरक्षा मामले में हुई चूक की जांच नहीं करने देंगे...

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PM Modi security lapse: Khalistani terrorist now sending threatening messages to the media after lawyers and retired Judge Indu Malhotra
आतंकी गुरपतवंत सिंह पन्नू - फोटो : Agency (File Photo)

विस्तार

प्रतिबंधित खालिस्तानी संगठन, सिख फॉर जस्टिस 'एसएफजे' जांच एजेंसियों के शिकंजा कसने से घबरा गया है। प्रधानमंत्री मोदी की सुरक्षा चूक मामले में जांच एजेंसियां जिस तरह से तेजी दिखा रही हैं, उससे खालिस्तानी संगठन का सरगना गुरपतवंत सिंह पन्नू बौखला गया है। इसी बौखलाहट में पन्नू वकीलों, मामले की जांच कर रही कमेटी की प्रमुख इंदु मल्होत्रा को धमकी देने के बाद अब मीडिया के जरिए आम लोगों को भी धमकाने लगा है। मीडिया से जुड़े लोगों के पास भेजे संदेश में पन्नू ने गणतंत्र दिवस को लेकर धमकी जारी की है।

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पिछले दिनों प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की सुरक्षा चूक मामले की जांच के लिए सुप्रीम कोर्ट द्वारा गठित कमेटी की चेयरपर्सन रिटायर्ड जस्टिस इंदु मल्होत्रा को भी एसएफजे ने धमकी दी थी। अपनी धमकी में इस संगठन ने कहा था, इंदु मल्होत्रा को पीएम मोदी की सुरक्षा मामले में हुई चूक की जांच नहीं करने देंगे। इसके साथ ही एसएफजे ने कई वकीलों के पास भी वॉयस संदेश भेजा था। उसमें कहा गया था कि हम सुप्रीम कोर्ट की पूर्व जज को प्रधानमंत्री मोदी की सुरक्षा चूक मामले की जांच नहीं करने देंगे। उन्हें पीएम मोदी और सिखों में से किसी एक को चुनना होगा।
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केंद्रीय गृह मंत्रालय द्वारा आतंकियों की सूची में शामिल प्रतिबंधित खालिस्तानी संगठन, सिख फॉर जस्टिस द्वारा कहा गया कि इस मामले में सुप्रीम कोर्ट के वकीलों की एक सूची तैयार की जा रही है। 'एसएफजे' के सदस्य और लुधियाना ब्लास्ट केस के आरोपी जसविंदर सिंह मुल्तानी के खिलाफ एनआईए ने केस दर्ज किया है। इस केस में मुल्तानी के सहयोगी भी शामिल हैं। इस केस में एसएफजे संचालक गुरपतवंत सिंह पन्नू तक भी जांच एजेंसियों के हाथ पहुंचेंगे।
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लुधियाना ब्लास्ट केस में पन्नू ने एनआईए और विदेश मंत्रालय को भी चेतावनी दी थी। उसने कहा था कि लुधियाना ब्लास्ट केस में प्रोडेक्शन वारंट पर लाए गए सुखविंद्र सिंह 'बॉक्सर' और रंजीत 'चीता' से पूछताछ के दौरान 'सिख फॉर जस्टिस' के नाम की स्वीकारोक्ति का दबाव न डाला जाए। जांच एजेंसी, एनआईए को इसके लिए मानवाधिकार उल्लंघन का सामना करना पड़ेगा। उसने अपने दूसरे मैसेज में कहा, जर्मनी आकर पूछताछ करने वाले खुद अरेस्ट हो जाएंगे। भारत का विदेश मंत्रालय भी इस केस में मदद नहीं कर सकेगा।


पिछले साल भी किसान आंदोलन के दौरान गुरपतवंत सिंह पन्नू ने दर्जनों वीडियो संदेश भेजे थे। इनमें सरकार के खिलाफ लोगों को भड़काने वाली सामग्री थी। पन्नू ने राष्ट्र विरोधी कुछ मामलों में करोड़ों रुपये बतौर इनाम देने की बात कही थी। एनआईए ने पंजाब में मौजूद उसकी संपत्ति को जब्त कर लिया था। अभी तक कोई भी जांच एजेंसी पन्नू तक नहीं पहुंच पा रही। वजह, वह कनाडा, अमेरिका या ब्रिटेन जैसे देशों से अपनी गतिविधियां संचालित करता है। वह भारत का नागरिक भी नहीं है। इसी के चलते जांच एजेंसियों के हाथ बंध जाते हैं।

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