कोरोना ने पेशेवर जिंदगी बदली, व्यवस्था बनाए रखने में छोटे व्यापारियों का महत्वपूर्ण योगदान: पीएम मोदी
कोरोना से जारी जंग के बीच पीएम नरेंद्र मोदी ने कहा कि वायरस हमला करने से पहले जाति, धर्म, नस्ल, वर्ग की सीमाएं नहीं देखता। कोविड-19 की चुनौती से निपटने के लिए हमें एकता और भाईचारे का परिचय देना होगा। उन्होंने लिखा-‘उत्तर-कोविड’ दुनिया में नए अवसर लाएगा, जिसमें भारत विश्व का नेतृत्व कर सकता है। पढ़िए उन्हीं की जुबानी...
शताब्दी का तीसरा दशक उलट-पलट के साथ शुरू हुआ है। कोविड-19 कई तरह की उथल-पुथल मचा रहा है। मेरे लिए इन दिनों घर नया दफ्तर है, इंटरनेट नया बैठक कक्ष और कुछ समय के लिए सहकर्मियों के साथ ऑफिस ब्रेक इतिहास की बात हो चुका है। मैं इन बदलावों से तालमेल बैठाने में जुटा हूं।
कोविड-19 के बाद दुनिया में नए अवसर पैदा होंगे और भारत नेतृत्व कर सकता है। बैठकें चाहे मंत्रियों या अधिकारियों के साथ हों या विश्व नेताओं के साथ, वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग से कर रहा हूं। जमीनी हालात जानने के लिए समाज के कई तबकों के साथ भी वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग करता हूं।
एनजीओ, सिविल सोसायटी समूहों व सामुदायिक संगठनों से लंबी बातचीत हुई है। रेडियो जॉकी का काम करने वालों से भी वार्ता की है। इनके अलावा, मैं रोज कई कॉल करता हूं। समाज के अलग-अलग वर्गों से उनकी राय जानने का प्रयास करता हूं।
इस समय लोग किस तरह अपना काम कर रहे हैं, मैं उसे देख रहा हूं। हमारे फिल्म स्टार रचनात्मक वीडियो बनाकर जनता को घर में रहने का संदेश दे रहे हैं, गायक ऑनलाइन संगीत कार्यक्रम आयोजित कर रहे हैं, शतरंज के खिलाड़ी डिजिटल माध्यम से इस खेल को खेल रहे हैं।
नौकरशाही में मठाधीशी व बिचौलिए खत्म कर रही तकनीक
कार्यस्थल सबसे पहले डिजिटल हो रहे हैं। हो भी क्यों न? आखिर, तकनीक का सबसे प्रभावशाली असर गरीबों के जीवन पर हो रहा है। तकनीक ही है, जो नौकरशाही की मठाधीशी को ध्वस्त कर रही है, बिचौलियों को खत्म कर रही है और लोककल्याण के कामों में तेजी ला रही है। मैं एक उदाहरण देता हूं। जब 2014 में हमें सेवा का अवसर मिला, तो भारतीयों को एकदूसरे से जोड़ना शुरू कर दिया था। खासतौर से गरीबों को जनधन खातों, आधार कार्ड, मोबाइल नंबरों से जोड़ा।
इन बेहद साधारण से दिखने वाले कनेक्शनों ने दशकों से चल रहे भ्रष्टाचार और सरकारी योजनाओं में हेरफेर को रोका, बल्कि सरकार को भी केवल एक बटन दबाकर पैसा ट्रांसफर करने की क्षमता दी। इस क्लिक ने फाइलों पर कई स्तरों पर चल रही मठाधीशी और हफ्तों की देरी को मिटा डाला।
मुझे लगता है भारत का यह काम विश्व में सबसे बड़ा है। इन बुनियादी सुविधाओं ने कोविड-19 युग में जरूरतमंदों तक सीधे व तत्काल पैसा पहुंचाने में काफी मदद की, इसका फायदा करोड़ों परिवारों को मिला है। दूसरा मामला शिक्षा क्षेत्र का है। कई शानदार पेशेवर विशेषज्ञ पहले ही इनोवेटिव काम कर रहे हैं।
तकनीक से इस क्षेत्र को मजबूत बनाने के कई फायदे हैं। सरकार ने भी दीक्षा-पोर्टल से ऐसे प्रयास किए, ताकि शिक्षकों को मदद मिले और ई-लर्निंग को बढ़ावा मिले। साथ ही ‘स्वयं’ भी लाया गया, जो शिक्षा तक पहुंच, स्तर व उपयोगिता बढ़ा रहा है। ई-पाठशाला कई भाषाओं में उपलब्ध है, इससे ई-पुस्तकें और शिक्षण सामग्री मुहैया करवाई जा रही हैं।
लॉकडाउन में सामाजिक व्यवस्था बनाए रखने में छोटे व्यापारियों ने महत्वपूर्ण योगदान दिया
वहीं, प्रधानमंत्री मोदी ने लॉकडाउन के बीच छोटे व्यापारियों और दुकानदारों के योगदान की सराहना की। पीएम ने कहा कि इस संकट की घड़ी में देशवासी लॉकडाउन का पालन कर पा रहे हैं, इसमें समाज के अनेक वर्गों की सकारात्मक भूमिका है। उन्होंने कहा कि हम कल्पना करें कि हमारे ये छोटे-छोटे व्यापारी और दुकानदार खुद के जीवन का रिस्क न लेते और रोजमर्रा की जरूरत का सामान न पहुंचाते तो क्या होता?
पीएम मोदी ने कहा कि छोटे-छोटे दुकानदारों ने पूरी सामाजिक व्यवस्था को सुचारू बनाए रखने में महत्वपूर्ण योगदान दिया है। उन्होंने कहा कि समाज और देश इनके इस योगदान को हमेशा याद रखेगा। मैं जानता हूं कि खुद सोशल डिस्टेंसिंग का पालन करना और दूसरों से इसका पालन करवाना चुनौतीपूर्ण है।
प्रधानमंत्री ने कहा कि भविष्य में भी दुकानें सोशल डिस्टेंसिंग का पालन करते हुए चलें, हमें यह सुनिश्चित करना है। संकट की घड़ी में इस योगदान के लिए सभी दुकानदार और व्यापारी बधाई के पात्र हैं।
इस संकट की घड़ी में देशवासी लॉकडाउन का पालन कर पा रहे हैं, इसमें समाज के अनेक वर्गों की सकारात्मक भूमिका है। हम कल्पना करें कि हमारे ये छोटे-छोटे व्यापारी और दुकानदार खुद के जीवन का रिस्क न लेते और रोजमर्रा की जरूरत का सामान न पहुंचाते तो क्या होता?
— Narendra Modi (@narendramodi) April 19, 2020