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Hindi News ›   India News ›   PM Modi Attends Event To Mark 200 Years Of Mumbai Samachar Hails Work Of Parsis BJP Leader Subramanian Swamy raised Question

Mumbai: पीएम मोदी ने की पारसियों के काम की तारीफ, भाजपा नेता सुब्रमण्यम स्वामी ने उठाए सवाल

Wed, 15 Jun 2022 01:39 AM IST
देव कश्यप न्यूज डेस्क, अमर उजाला, मुंबई/ नई दिल्ली।
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, मुंबई/ नई दिल्ली। Published by: देव कश्यप Updated Wed, 15 Jun 2022 01:39 AM IST
सार

1822 में फरदुनजी मरजबान द्वारा स्थापित गुजराती अखबार 'मुंबई समाचार' के 200 साल पूरे होने पर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने देश में उनके अपार योगदान के लिए पारसी समुदाय की सराहना की। लेकिन पीएम मोदी द्वारा पारसी समुदाय के काम की सराहना करने पर भाजपा नेता सुब्रह्मण्यम स्वामी ने सवाल उठाया।

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PM Modi Attends Event To Mark 200 Years Of Mumbai Samachar Hails Work Of Parsis BJP Leader Subramanian Swamy raised Question
‘मुंबई समाचार’ की 200वीं वर्षगांठ पर समारोह को संबोधित करते पीएम मोदी। - फोटो : वीडियो स्क्रीनग्रैब

विस्तार

प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी मंगलवार को महाराष्ट्र के एक दिन के दौरे पर थे। इस दौरान उन्होंने पुणे के समीप देहू में 17वीं सदी के संत को समर्पित संत तुकाराम महाराज मंदिर में एक शिला मंदिर, राजभवन में जल भूषण भवन और क्रांतिकारियों की गैलरी का उद्घाटन किया और गुजराती समाचार पत्र ‘मुंबई समाचार’ के द्विशताब्दी समारोह में भाग लिया। उन्होंने कहा कि हमें स्वस्थ बहस और खुली चर्चा की संस्कृति को मजबूत करने की जरूरत है जो वर्षों से भारत की पहचान रही है।

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भाजपा नेता सुब्रह्मण्यम स्वामी ने उठाए सवाल
1822 में फरदुनजी मरजबान द्वारा स्थापित गुजराती अखबार 'मुंबई समाचार' के 200 साल पूरे होने पर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने देश में उनके अपार योगदान के लिए पारसी समुदाय की सराहना की। पीएम मोदी ने समाज में पत्रकारिता और समाचारों की प्रासंगिकता और योगदान पर भी बात की।  लेकिन पीएम मोदी द्वारा पारसी समुदाय के काम की सराहना करने पर भाजपा नेता सुब्रह्मण्यम स्वामी ने सवाल उठाते हुए कहा कि "मोदी को अचानक क्यों एहसास हो गया है कि पारसी अद्भुत होते हैं ? मुंबई समाचार समारोह में उन्होंने पारसी समुदाय की प्रशंसा की।"
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महाराष्ट्र में शिवसेना और भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) के कटु संबंधों के बीच प्रधानमंत्री मोदी और मुख्यमंत्री उद्धव ठाकरे ने चार महीने से अधिक समय बाद मंगलवार को मंच साझा किया। दोनों नेताओं ने राजभवन में जल भूषण भवन और क्रांतिकारियों की गैलरी का उद्घाटन किया और बाद में मुंबई में अखबार ‘मुंबई समाचार’ की 200 वीं वर्षगांठ के समारोह में भाग लिया।

पीएम मोदी ने ‘मुंबई समाचार’ की 200वीं वर्षगांठ के समारोह में कहा, मुंबई समाचार के सभी पाठकों, पत्रकारों और कर्मचारियों को इस ऐतिहासिक समाचार पत्र की 200वीं वर्षगांठ पर हार्दिक शुभकामनाएं! इन दो सदियों में अनेक पीढ़ियों के जीवन को, उनके सरोकारों को मुंबई समाचार ने आवाज दी है।"

उन्होंने कहा कि "मुंबई समाचार ने आजादी के आंदोलन को भी आवाज दी और फिर आजाद भारत के 75 वर्षों को भी हर आयु के पाठकों तक पहुंचाया। भाषा का माध्यम जरूर गुजराती रहा, लेकिन सरोकार राष्ट्रीय था।"

क्या कहा था पीएम मोदी ने पारसी समुदाय के बारे में?
पीएम मोदी ने आगे कहा, ‘‘भारत का हजारों वर्षों का इतिहास हमें बहुत कुछ सिखाता है। यहां जो भी आया, छोटा हो या बड़ा, कमजोर हो या बलवान, सभी को मां भारती ने अपनी गोद में फलने-फूलने का भरपूर अवसर दिया। पारसी समुदाय से बेहतर इसका उदाहरण क्या हो सकता है।"

पीएम मोदी ने आगे कहा, "आजादी के आंदोलन से लेकर भारत के नवनिर्माण तक पारसी बहन-भाईयों का योगदान बहुत बड़ा है। संख्या से हिसाब से समुदाय देश के सबसे छोटे समुदायों में से है, एक तरह से माइक्रो-माइनॉरिटी है, लेकिन सामर्थ्य और सेवा के हिसाब से बहुत बड़ा है।"


पीएम मोदी ने कहा, "समाचार पत्रों का, मीडिया का काम समाचार पहुंचाना है, लोक शिक्षा का है, समाज और सरकार में कुछ कमियां हैं तो उनको सामने लाने का है। मीडिया का जितना अधिकार आलोचना का है, उतना ही बड़ा दायित्व सकारात्मक खबरों को सामने लाने का भी है। बीते दो वर्षों में कोरोना काल के दौरान जिस प्रकार हमारे पत्रकार साथियों ने राष्ट्रहित में एक कर्मयोगी की तरह काम किया, उसको भी हमेशा याद किया जाएगा। भारत के मीडिया के सकारात्मक योगदान से भारत को 100 साल के इस सबसे बड़े संकट से निपटने में बहुत मदद मिली।"

उन्होंने कहा कि "ये देश डिबेट और डिस्कशन्स के माध्यमों से आगे बढ़ने वाली समृद्ध परिपाटी का देश है। हजारों वर्षों से हमने स्वस्थ बहस को, स्वस्थ आलोचना को, सही तर्क को सामाजिक व्यवस्था का हिस्सा बनाया है। हमने बहुत कठिन सामाजिक विषयों पर भी खुलकर स्वस्थ चर्चा की है। यही भारत की परिपाटी रही है, जिसको हमें सशक्त करना है।"

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