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Indian Navy: PM मोदी और नौसेना प्रमुख की मुलाकात; समुद्री सुरक्षा, नौसेना की रणनीति के साथ चुनौतियों पर चर्चा
Sat, 30 May 2026 10:06 PM IST
हिमांशु सिंह चंदेल
पीटीआई, नई दिल्ली
पीटीआई, नई दिल्ली
Published by: हिमांशु सिंह चंदेल
Updated Sat, 30 May 2026 10:06 PM IST
सार
PM Modi and Navy Chief Meet: सेवानिवृत्ति से पहले भारतीय नौसेना प्रमुख एडमिरल दिनेश के त्रिपाठी ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को हिंद महासागर क्षेत्र की सुरक्षा स्थिति, नौसेना की तैयारियों और समुद्री चुनौतियों की जानकारी दी। भारतीय नौसेना ने कहा कि वह हर परिस्थिति में देश के समुद्री हितों की रक्षा के लिए तैयार है। वहीं केंद्र सरकार ने वाइस एडमिरल कृष्णा स्वामीनाथन को अगला नौसेना प्रमुख नियुक्त किया है।
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नौसेना प्रमुख ने पीएम को बताई समुद्री चुनौतियों की पूरी तस्वीर
- फोटो : अमर उजाला ग्राफिक्स
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विस्तार
भारतीय नौसेना प्रमुख एडमिरल दिनेश के त्रिपाठी ने सेवानिवृत्ति से पहले प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से मुलाकात कर हिंद महासागर क्षेत्र यानी आईओआर की सुरक्षा स्थिति, नौसेना की ऑपरेशनल तैयारी और समुद्री क्षेत्र में उभरती चुनौतियों की जानकारी दी। भारतीय नौसेना ने कहा कि तेजी से बदलती तकनीक और समुद्री सुरक्षा के नए खतरे भारत के लिए बड़ी चुनौती बन रहे हैं। ऐसे में नौसेना हर परिस्थिति से निपटने के लिए पूरी तरह तैयार है। एडमिरल त्रिपाठी 31 मई को सेवा से सेवानिवृत्त हो रहे हैं।
प्रधानमंत्री मोदी से मुलाकात के दौरान एडमिरल दिनेश के त्रिपाठी ने हिंद महासागर क्षेत्र की मौजूदा सुरक्षा स्थिति पर विस्तार से चर्चा की। उन्होंने बताया कि समुद्री क्षेत्र में तेजी से बदल रही तकनीक, सुरक्षा चुनौतियां और रणनीतिक गतिविधियां भारत के लिए बेहद महत्वपूर्ण हैं। भारतीय नौसेना ने सोशल मीडिया मंच एक्स पर कहा कि नौसेना एक “युद्ध के लिए तैयार, भरोसेमंद, संगठित और भविष्य के लिए तैयार आत्मनिर्भर बल” के रूप में देश के समुद्री हितों की रक्षा के लिए प्रतिबद्ध है। नौसेना ने यह भी कहा कि भारत किसी भी समय, कहीं भी और किसी भी परिस्थिति में अपने समुद्री हितों की सुरक्षा करने में सक्षम है।
हिंद महासागर क्षेत्र भारत के लिए इतना अहम क्यों?
हिंद महासागर क्षेत्र भारत की समुद्री सुरक्षा और व्यापार के लिहाज से बेहद महत्वपूर्ण माना जाता है। दुनिया के बड़े व्यापारिक मार्ग इसी क्षेत्र से होकर गुजरते हैं। ऐसे में इस इलाके में बढ़ती सामरिक गतिविधियां और नई तकनीकी चुनौतियां भारत की चिंता बढ़ा रही हैं। नौसेना प्रमुख ने प्रधानमंत्री को बताया कि समुद्री क्षेत्र में तेजी से बदलते हालात पर लगातार नजर रखी जा रही है। भारत अपनी नौसैनिक क्षमता को आधुनिक तकनीक और आत्मनिर्भरता के जरिए मजबूत करने पर भी तेजी से काम कर रहा है।
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भारतीय नौसेना की तैयारी को लेकर क्या जानकारी दी गई?
एडमिरल त्रिपाठी ने प्रधानमंत्री मोदी को भारतीय नौसेना की ऑपरेशनल तैयारियों की भी जानकारी दी। उन्होंने बताया कि नौसेना हर तरह की चुनौती से निपटने के लिए लगातार अभ्यास और तकनीकी सुधार कर रही है। समुद्री निगरानी, युद्ध क्षमता और इलेक्ट्रॉनिक सिस्टम को आधुनिक बनाया जा रहा है। नौसेना का फोकस आत्मनिर्भरता बढ़ाने और स्वदेशी तकनीक को मजबूत करने पर भी है। अधिकारियों के मुताबिक भारत की नौसेना अब भविष्य की चुनौतियों को ध्यान में रखते हुए खुद को तेजी से तैयार कर रही है।
नए नौसेना प्रमुख कौन होंगे?
केंद्र सरकार ने इसी महीने वाइस एडमिरल कृष्णा स्वामीनाथन को भारतीय नौसेना का अगला प्रमुख नियुक्त किया है। वह एडमिरल दिनेश के त्रिपाठी के सेवानिवृत्त होने के बाद पदभार संभालेंगे। वाइस एडमिरल कृष्णा स्वामीनाथन 31 जुलाई 2025 से पश्चिमी नौसेना कमान के 34वें फ्लैग ऑफिसर कमांडिंग-इन-चीफ के रूप में कार्यरत हैं। उन्हें संचार और इलेक्ट्रॉनिक युद्ध प्रणाली का विशेषज्ञ माना जाता है।
वाइस एडमिरल कृष्णा स्वामीनाथन का अनुभव कितना अहम?
वाइस एडमिरल कृष्णा स्वामीनाथन का नौसेना में लंबा अनुभव रहा है। उन्हें 1 जुलाई 1987 को भारतीय नौसेना में कमीशन मिला था। वह राष्ट्रीय रक्षा अकादमी खड़कवासला, ब्रिटेन के जॉइंट सर्विसेज कमांड एंड स्टाफ कॉलेज, करंजा के कॉलेज ऑफ नेवल वारफेयर और अमेरिका के यूनाइटेड स्टेट्स नेवल वॉर कॉलेज से प्रशिक्षण प्राप्त कर चुके हैं। माना जा रहा है कि उनके नेतृत्व में भारतीय नौसेना तकनीकी और रणनीतिक दोनों स्तरों पर और मजबूत होगी।
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प्रधानमंत्री मोदी से मुलाकात के दौरान एडमिरल दिनेश के त्रिपाठी ने हिंद महासागर क्षेत्र की मौजूदा सुरक्षा स्थिति पर विस्तार से चर्चा की। उन्होंने बताया कि समुद्री क्षेत्र में तेजी से बदल रही तकनीक, सुरक्षा चुनौतियां और रणनीतिक गतिविधियां भारत के लिए बेहद महत्वपूर्ण हैं। भारतीय नौसेना ने सोशल मीडिया मंच एक्स पर कहा कि नौसेना एक “युद्ध के लिए तैयार, भरोसेमंद, संगठित और भविष्य के लिए तैयार आत्मनिर्भर बल” के रूप में देश के समुद्री हितों की रक्षा के लिए प्रतिबद्ध है। नौसेना ने यह भी कहा कि भारत किसी भी समय, कहीं भी और किसी भी परिस्थिति में अपने समुद्री हितों की सुरक्षा करने में सक्षम है।
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हिंद महासागर क्षेत्र भारत के लिए इतना अहम क्यों?
हिंद महासागर क्षेत्र भारत की समुद्री सुरक्षा और व्यापार के लिहाज से बेहद महत्वपूर्ण माना जाता है। दुनिया के बड़े व्यापारिक मार्ग इसी क्षेत्र से होकर गुजरते हैं। ऐसे में इस इलाके में बढ़ती सामरिक गतिविधियां और नई तकनीकी चुनौतियां भारत की चिंता बढ़ा रही हैं। नौसेना प्रमुख ने प्रधानमंत्री को बताया कि समुद्री क्षेत्र में तेजी से बदलते हालात पर लगातार नजर रखी जा रही है। भारत अपनी नौसैनिक क्षमता को आधुनिक तकनीक और आत्मनिर्भरता के जरिए मजबूत करने पर भी तेजी से काम कर रहा है।
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भारतीय नौसेना की तैयारी को लेकर क्या जानकारी दी गई?
एडमिरल त्रिपाठी ने प्रधानमंत्री मोदी को भारतीय नौसेना की ऑपरेशनल तैयारियों की भी जानकारी दी। उन्होंने बताया कि नौसेना हर तरह की चुनौती से निपटने के लिए लगातार अभ्यास और तकनीकी सुधार कर रही है। समुद्री निगरानी, युद्ध क्षमता और इलेक्ट्रॉनिक सिस्टम को आधुनिक बनाया जा रहा है। नौसेना का फोकस आत्मनिर्भरता बढ़ाने और स्वदेशी तकनीक को मजबूत करने पर भी है। अधिकारियों के मुताबिक भारत की नौसेना अब भविष्य की चुनौतियों को ध्यान में रखते हुए खुद को तेजी से तैयार कर रही है।
नए नौसेना प्रमुख कौन होंगे?
केंद्र सरकार ने इसी महीने वाइस एडमिरल कृष्णा स्वामीनाथन को भारतीय नौसेना का अगला प्रमुख नियुक्त किया है। वह एडमिरल दिनेश के त्रिपाठी के सेवानिवृत्त होने के बाद पदभार संभालेंगे। वाइस एडमिरल कृष्णा स्वामीनाथन 31 जुलाई 2025 से पश्चिमी नौसेना कमान के 34वें फ्लैग ऑफिसर कमांडिंग-इन-चीफ के रूप में कार्यरत हैं। उन्हें संचार और इलेक्ट्रॉनिक युद्ध प्रणाली का विशेषज्ञ माना जाता है।
वाइस एडमिरल कृष्णा स्वामीनाथन का अनुभव कितना अहम?
वाइस एडमिरल कृष्णा स्वामीनाथन का नौसेना में लंबा अनुभव रहा है। उन्हें 1 जुलाई 1987 को भारतीय नौसेना में कमीशन मिला था। वह राष्ट्रीय रक्षा अकादमी खड़कवासला, ब्रिटेन के जॉइंट सर्विसेज कमांड एंड स्टाफ कॉलेज, करंजा के कॉलेज ऑफ नेवल वारफेयर और अमेरिका के यूनाइटेड स्टेट्स नेवल वॉर कॉलेज से प्रशिक्षण प्राप्त कर चुके हैं। माना जा रहा है कि उनके नेतृत्व में भारतीय नौसेना तकनीकी और रणनीतिक दोनों स्तरों पर और मजबूत होगी।