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गुजरात और राजस्थान में जीत से उत्साहित कांग्रेस पर पीएम मोदी का आक्रामक प्रहार
संजय मिश्र, नई दिल्ली
Updated Wed, 07 Feb 2018 09:40 PM IST
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नरेंद्र मोदी
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गुजरात चुनाव के परिणामों के बाद से उत्साह में दिख रही कांग्रेस पार्टी पर आक्रामक प्रहार के जरिए पीएम मोदी ने उसे मनोवैज्ञानिक रूप से बैकफुट पर धकेलने की कोशिश की है। गुजरात के बेहतर प्रदर्शन और उसके बाद राजस्थान उपचुनाव में मिली जीत का असर कांग्रेस पार्टी के मनोबल पर साफ झलक रहा है। लंबे समय के बाद लोकसभा में ऐसा नजारा देखने को मिला है कि पीएम के संबोधन के वक्त विपक्ष के सांसद नारेबाजी करते रहे। बुधवार को लोकसभा में राष्ट्रपति अभिभाषण पर जब पीएम मोदी चर्चा का जवाब देने उठे तब से लेकर उनके भाषण के खत्म होने तक कांग्रेस, वामपंथी दल और सरकार की सहयोगी टीडीपी के सांसदों ने जमकर नारेबाजी की। इसका असर पीएम के संबोधन पर पड़ा।
उम्मीदों के विपरित पीएम मोदी ने कांग्रेस के खिलाफ आक्रामकता दिखाई। पीएम मोदी ने देश के बंटवारे से लेकर आंध्र विभाजन तक में हुई गलतियों के लिए कांग्रेस को जिम्मेदार ठहराया। इसके अलावा पीएम मोदी ने कांग्रेस पार्टी के परिवारवाद और लोकतंत्र विरोधी उसके कदमों को एक-एक कर गिनाया। उन्होंने देश के पहले प्रधानमंत्री पंडित जवाहर लाल नेहरू, श्रीमति इंदिरा गांधी और राजीव गांधी तक के कार्यों का उल्लेख करते हुए कांग्रेस पार्टी पर उसके पुराने कारनामों का बोझ लादने का प्रयास किया।
देश बंटवारे के वक्त कांग्रेस के घोले जहर को आज भी देश भुगत रहा है-मोदी
पीएम मोदी ने विपक्ष पर सियासी हमले की शुरूआत करते हुए कहा कि राष्ट्रपति के अभिभाषण का सम्मान होना चाहिए। सिर्फ विरोध की खातिर विरोध नहीं होना चाहिए। उन्होंने कहा कि अटल बिहारी वाजपेई की सरकार के वक्त तीन राज्यों का गठना की गई। तीनों ही राज्यों में अधिकारी से लेकर संपत्ति का बंटवारा इस तरह हुआ कि बाद में कोई चूं-चा नहीं हुई। लेकिन यह कांग्रेस पार्टी की दृष्टि का असर है कि देश के बंटवारे से लेकर आंध्र के विभाजन तक में परेशानी झेलनी पड़ रही है। उन्होंने कहा कि देश विभाजन के वक्त कांग्रेस पार्टी ने ऐसा जहर बोया की आज 70 साल बाद भी देश को भुगतना पड़ रहा है। ऐसी ही गलती कांग्रेस ने आंध्र विभाजन के वक्त की। चुनावी लाभ के लिए उसने आनन-फानन में संसद का दरवाजा बंद करके हड़बड़ी में प्रदेश का विभाजन किया। जिसका खामियाजा आज भी राज्य को भुगतना पड़ रहा है।
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नेहरू की जगह पटेल पीएम बनते तो नहीं रहती जम्मू-कश्मीर की समस्या
कांग्रेस पार्टी को लोकतंत्र की परिभाषा का बोध कराते हुए पीएम मोदी ने कहा कि मां भारती के बंटवारे के बावजूद भी देश कांग्रेस के साथ था। मगर कांग्रेस पार्टी ने वैसा कार्य नहीं किया जिससे की देश आगे बढ़े। उन्होंने कहा कि भारत के बाद आजाद हुए देशों की विकास के मामले में स्थिति ऐसी है कि वे हमसे आगे हैं। मगर कांग्रेस पार्टी ने केवल एक परिवार के विकास पर ही ध्यान केंद्रीत रखा। लोकसभा में कांग्रेस के नेता मल्लिकार्जुन खड़गे के संबोधन का जिक्र करते हुए पीएम मोदी ने उन्हें लोकतंत्र समर्थक होने का आईना दिखाया। मोदी ने कहा कि देश के पहले पीएम के चयन के वक्त कांग्रेस की 15 समितियों में से 12 ने सरदार पटेल के पक्ष में मतदान किया था। और तीन समितियों ने नोटा यानि किसी का नाम नहीं लिया था। बावजूद उसके पटेल की जगह नेहरू को पीएम बनाया गया था। क्या यही लोकतंत्र है, कांग्रेस पार्टी किस लोकतंत्र की बात कर रही है।
इसके साथ ही मोदी ने कहा कि यदि नेहरू की जगह पटेल देश के पहले पीएम बनते तो जम्मू-कश्मीर की आज समस्या नहीं होती। राजीव गांधी के जरिए आंध्र प्रदेश के तत्कालीन दलित मुख्यमंत्री के अपमान का मुद्दा उठाते हुए पीएम मोदी ने टीडीपी को भी आईना दिखाया कि उनकी स्थापना अपमान का बदला लेने के लिए हुई थी। कांग्रेस पार्टी की लोकतंत्र विरोधी मानसिकता का हवाला देते हुए मोदी ने कहा कि कांग्रेस पार्टी ने अपने राजनीतिक नफे-नुकसान के लिए देश में 90 बार से अधिक धारा 356 का इस्तेमाल किया है।
राहुल गांधी पर अपरोक्ष तंज कसते हुए उन्होंने कहा कि क्या यही लोकतंत्र है कि कैबिनेट के नोट को उनके नेता सीधे मीडिया के सामने फाड़ दें। उन्होंने कांग्रेस अध्यक्ष पद पर राहुल गांधी के चयन के वक्त शहजाद पूनावाला के जरिए हुए विरोध के मुद्दे को उठाया। तो राहुल के चयन से पहले जयराम रमेश के जरिए दिए गए शाहजांह, जहांगीर और औरंगजेब को लेकर दिए गए बयान का उल्लेख किया।
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उम्मीदों के विपरित पीएम मोदी ने कांग्रेस के खिलाफ आक्रामकता दिखाई। पीएम मोदी ने देश के बंटवारे से लेकर आंध्र विभाजन तक में हुई गलतियों के लिए कांग्रेस को जिम्मेदार ठहराया। इसके अलावा पीएम मोदी ने कांग्रेस पार्टी के परिवारवाद और लोकतंत्र विरोधी उसके कदमों को एक-एक कर गिनाया। उन्होंने देश के पहले प्रधानमंत्री पंडित जवाहर लाल नेहरू, श्रीमति इंदिरा गांधी और राजीव गांधी तक के कार्यों का उल्लेख करते हुए कांग्रेस पार्टी पर उसके पुराने कारनामों का बोझ लादने का प्रयास किया।
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देश बंटवारे के वक्त कांग्रेस के घोले जहर को आज भी देश भुगत रहा है-मोदी
पीएम मोदी ने विपक्ष पर सियासी हमले की शुरूआत करते हुए कहा कि राष्ट्रपति के अभिभाषण का सम्मान होना चाहिए। सिर्फ विरोध की खातिर विरोध नहीं होना चाहिए। उन्होंने कहा कि अटल बिहारी वाजपेई की सरकार के वक्त तीन राज्यों का गठना की गई। तीनों ही राज्यों में अधिकारी से लेकर संपत्ति का बंटवारा इस तरह हुआ कि बाद में कोई चूं-चा नहीं हुई। लेकिन यह कांग्रेस पार्टी की दृष्टि का असर है कि देश के बंटवारे से लेकर आंध्र के विभाजन तक में परेशानी झेलनी पड़ रही है। उन्होंने कहा कि देश विभाजन के वक्त कांग्रेस पार्टी ने ऐसा जहर बोया की आज 70 साल बाद भी देश को भुगतना पड़ रहा है। ऐसी ही गलती कांग्रेस ने आंध्र विभाजन के वक्त की। चुनावी लाभ के लिए उसने आनन-फानन में संसद का दरवाजा बंद करके हड़बड़ी में प्रदेश का विभाजन किया। जिसका खामियाजा आज भी राज्य को भुगतना पड़ रहा है।
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नेहरू की जगह पटेल पीएम बनते तो नहीं रहती जम्मू-कश्मीर की समस्या
कांग्रेस पार्टी को लोकतंत्र की परिभाषा का बोध कराते हुए पीएम मोदी ने कहा कि मां भारती के बंटवारे के बावजूद भी देश कांग्रेस के साथ था। मगर कांग्रेस पार्टी ने वैसा कार्य नहीं किया जिससे की देश आगे बढ़े। उन्होंने कहा कि भारत के बाद आजाद हुए देशों की विकास के मामले में स्थिति ऐसी है कि वे हमसे आगे हैं। मगर कांग्रेस पार्टी ने केवल एक परिवार के विकास पर ही ध्यान केंद्रीत रखा। लोकसभा में कांग्रेस के नेता मल्लिकार्जुन खड़गे के संबोधन का जिक्र करते हुए पीएम मोदी ने उन्हें लोकतंत्र समर्थक होने का आईना दिखाया। मोदी ने कहा कि देश के पहले पीएम के चयन के वक्त कांग्रेस की 15 समितियों में से 12 ने सरदार पटेल के पक्ष में मतदान किया था। और तीन समितियों ने नोटा यानि किसी का नाम नहीं लिया था। बावजूद उसके पटेल की जगह नेहरू को पीएम बनाया गया था। क्या यही लोकतंत्र है, कांग्रेस पार्टी किस लोकतंत्र की बात कर रही है।
इसके साथ ही मोदी ने कहा कि यदि नेहरू की जगह पटेल देश के पहले पीएम बनते तो जम्मू-कश्मीर की आज समस्या नहीं होती। राजीव गांधी के जरिए आंध्र प्रदेश के तत्कालीन दलित मुख्यमंत्री के अपमान का मुद्दा उठाते हुए पीएम मोदी ने टीडीपी को भी आईना दिखाया कि उनकी स्थापना अपमान का बदला लेने के लिए हुई थी। कांग्रेस पार्टी की लोकतंत्र विरोधी मानसिकता का हवाला देते हुए मोदी ने कहा कि कांग्रेस पार्टी ने अपने राजनीतिक नफे-नुकसान के लिए देश में 90 बार से अधिक धारा 356 का इस्तेमाल किया है।
राहुल गांधी पर अपरोक्ष तंज कसते हुए उन्होंने कहा कि क्या यही लोकतंत्र है कि कैबिनेट के नोट को उनके नेता सीधे मीडिया के सामने फाड़ दें। उन्होंने कांग्रेस अध्यक्ष पद पर राहुल गांधी के चयन के वक्त शहजाद पूनावाला के जरिए हुए विरोध के मुद्दे को उठाया। तो राहुल के चयन से पहले जयराम रमेश के जरिए दिए गए शाहजांह, जहांगीर और औरंगजेब को लेकर दिए गए बयान का उल्लेख किया।
पीएम नरेंद्र मोदी
विपक्ष में होना चाहिए सुनने का माद्दा
पीएम मोदी ने विपक्ष खासतौर से कांग्रेस को ललकारते हुए कहा कि उसमें सुनने की हिम्मत होनी चाहिए। उन्होंने कहा कि उनके सराकर की दिशा और दशा दोनों ही सही है। उन्होंने अपने सरकार के कामकाज का रिपोर्ट रखते हुए यूपीए के अंतिम तीन वर्ष के काल की उपलब्धियों और अपनी सरकार के तीन वर्ष के कामकाज को एक-एक कर गिनाया।
कार्टून का उल्लेख कर राजीव गांधी पर सियासी हमला
पीएम मोदी ने कांग्रेस के पुराने कारनामों की याद जनता के बीच ताजा कराने की कवायद में नेहरू, इंदिरा से लेकर राजीव गांधी के अहम कार्यों को निशाना बनाया। राजीव के 21वीं सदी के सपने पर हमला बोलते हुए पीएम ने कहा कि लोग युवाओं को 21वीं सदी का सपना दिखाते थे। उन्होंने एक कार्टून का जिक्र करते हुए कहा कि एक ट्रेन पर 21वीं सदी लिखा था और एक युवा उसपर कूदकर चढ़ने की तैयारी में था। तभी एक बुजुर्ग ने उक्त युवा से कहा कि यहीं रहो 21वीं सदी खुद-ब-खुद आ जाएगी।
खड़गे को जवाब के साथ येदियुरप्पा का गुणगान
पीएम मोदी ने भाषण के शुरूआत में बेशक कहा कि राष्ट्रपति के अभिभाषण पर राजनीति नहीं होनी चाहिए। लेकिन वे खुद भी राजनीति साधने से बाज नहीं आए। उन्होंने मल्लिकार्जुन खड़गे पर गांधी परिवार की चापलूसी करने का आरोप लगाते हुए कर्नाटक चुनाव के बाद कुर्सी बचाने की कवायद करार दिया। तो बिदर रेल लाईन के शुरूआत को अटल सरकार की देन बताते हुए इसे पूरा करने में येदियुरप्पा के कार्य को श्रेय दिया।
विपक्ष भी पूरी रणनीति के साथ था सदन में मौजूद
दरअसल पीएम मोदी के संबोधन से पहले ही लोकसभा में विपक्ष की ओर से हंगामा और नारेबाजी शुरू हो गई थी। शायद विपक्ष भी पीएम मोदी के भाषण के विरोध की पूरी रणनीति बनाकर लोकसभा में उतरा था। विपक्ष के सांसदों पर लोकसभा अध्यक्ष और संसदीय कार्य मंत्री के अपील का भी असर नहीं हुआ। दोनों ही नेताओं ने विपक्ष की ओर से हंगामा काट रहे कांग्रेस और तेलगू देशम पार्टी के सांसदों से आग्रह किया कि वे पीएम के संबोधन का ख्याल करें और अपने आसन पर बैठ जाएं। मगर विपक्ष की ओर से इन अपीलों की अनदेखी की गई। तो पीएम मोदी ने भी इस शोर-गुल और नारेबाजी के बीच अपना भाषण देना शुरू किया।
कांग्रेस और टीडीपी के साथ वाम दल के सांसद भी सदन के वेल में नारेबाजी करने सामने उतर आए थे। कहीं न कहीं कांग्रेस की रणनीति काम आ रही थी। हुआ यूं कि पहले तो टीडीपी के सांसद सरकार से आंध्र प्रदेश के पैकेज के वायदे को पूरा करने की मांग कर रहे थे। लेकिन पीएम के संबोधन से पहले अनंत कुमार ने उनसे आकर आग्रह किया तो वे अपने आसन की ओर लौटने लगे। इतने में सोनिया गांधी ने ज्योतिरादित्य और खड़गे को कुछ कान में कहा। और उसके बाद खड़गे आंध्र प्रदेश के मामले पर बोलने खड़े हुए। लोकसभा अध्यक्ष ने इसकी अनुमति नहीं दी। तो कांग्रेस सांसद वेल में पहुंच गए और सरकार के खिलाफ नारेबाजी शुरू कर दी। इसे देख टीडीपी सांसद भी वापस लौट आए। तो वामदम के सांसद भी कांग्रेस का साथ देने लगे।
शोरगुल और नारेबाजी के बीच पहली दफे भाषण देते हुए पीएम मोदी शुरू में तो संबोधन की औपचारिकता पूरी करते वक्त नरम रहे उसके बाद उनका अंदाज बेहद आक्रामक हो गया। अंदाज में आते ही मोदी ने देश के इतिहास का हवाला देने के साथ कांग्रेस पार्टी के पुराने कारनामों की याद दिलाई। कांग्रेस पर सियासी प्रहार के क्रम को जारी रखते हुए पीएम मोदी ने लोकसभा में करीब दो घंटे का भाषण दिया। संसद में दिए गए अपने सबसे लंबे भाषण में पीएम मोदी का जोर कांग्रेस की बखिया उधेड़ने पर ही रहा। हालांकि राज्यसभा में संबोधन के वक्त उन्होंने कांग्रेस के खिलाफ उतनी आक्रामकता नहीं दिखाई जितनी वे लोकसभा में दिखा गए थे।
पीएम मोदी ने विपक्ष खासतौर से कांग्रेस को ललकारते हुए कहा कि उसमें सुनने की हिम्मत होनी चाहिए। उन्होंने कहा कि उनके सराकर की दिशा और दशा दोनों ही सही है। उन्होंने अपने सरकार के कामकाज का रिपोर्ट रखते हुए यूपीए के अंतिम तीन वर्ष के काल की उपलब्धियों और अपनी सरकार के तीन वर्ष के कामकाज को एक-एक कर गिनाया।
कार्टून का उल्लेख कर राजीव गांधी पर सियासी हमला
पीएम मोदी ने कांग्रेस के पुराने कारनामों की याद जनता के बीच ताजा कराने की कवायद में नेहरू, इंदिरा से लेकर राजीव गांधी के अहम कार्यों को निशाना बनाया। राजीव के 21वीं सदी के सपने पर हमला बोलते हुए पीएम ने कहा कि लोग युवाओं को 21वीं सदी का सपना दिखाते थे। उन्होंने एक कार्टून का जिक्र करते हुए कहा कि एक ट्रेन पर 21वीं सदी लिखा था और एक युवा उसपर कूदकर चढ़ने की तैयारी में था। तभी एक बुजुर्ग ने उक्त युवा से कहा कि यहीं रहो 21वीं सदी खुद-ब-खुद आ जाएगी।
खड़गे को जवाब के साथ येदियुरप्पा का गुणगान
पीएम मोदी ने भाषण के शुरूआत में बेशक कहा कि राष्ट्रपति के अभिभाषण पर राजनीति नहीं होनी चाहिए। लेकिन वे खुद भी राजनीति साधने से बाज नहीं आए। उन्होंने मल्लिकार्जुन खड़गे पर गांधी परिवार की चापलूसी करने का आरोप लगाते हुए कर्नाटक चुनाव के बाद कुर्सी बचाने की कवायद करार दिया। तो बिदर रेल लाईन के शुरूआत को अटल सरकार की देन बताते हुए इसे पूरा करने में येदियुरप्पा के कार्य को श्रेय दिया।
विपक्ष भी पूरी रणनीति के साथ था सदन में मौजूद
दरअसल पीएम मोदी के संबोधन से पहले ही लोकसभा में विपक्ष की ओर से हंगामा और नारेबाजी शुरू हो गई थी। शायद विपक्ष भी पीएम मोदी के भाषण के विरोध की पूरी रणनीति बनाकर लोकसभा में उतरा था। विपक्ष के सांसदों पर लोकसभा अध्यक्ष और संसदीय कार्य मंत्री के अपील का भी असर नहीं हुआ। दोनों ही नेताओं ने विपक्ष की ओर से हंगामा काट रहे कांग्रेस और तेलगू देशम पार्टी के सांसदों से आग्रह किया कि वे पीएम के संबोधन का ख्याल करें और अपने आसन पर बैठ जाएं। मगर विपक्ष की ओर से इन अपीलों की अनदेखी की गई। तो पीएम मोदी ने भी इस शोर-गुल और नारेबाजी के बीच अपना भाषण देना शुरू किया।
कांग्रेस और टीडीपी के साथ वाम दल के सांसद भी सदन के वेल में नारेबाजी करने सामने उतर आए थे। कहीं न कहीं कांग्रेस की रणनीति काम आ रही थी। हुआ यूं कि पहले तो टीडीपी के सांसद सरकार से आंध्र प्रदेश के पैकेज के वायदे को पूरा करने की मांग कर रहे थे। लेकिन पीएम के संबोधन से पहले अनंत कुमार ने उनसे आकर आग्रह किया तो वे अपने आसन की ओर लौटने लगे। इतने में सोनिया गांधी ने ज्योतिरादित्य और खड़गे को कुछ कान में कहा। और उसके बाद खड़गे आंध्र प्रदेश के मामले पर बोलने खड़े हुए। लोकसभा अध्यक्ष ने इसकी अनुमति नहीं दी। तो कांग्रेस सांसद वेल में पहुंच गए और सरकार के खिलाफ नारेबाजी शुरू कर दी। इसे देख टीडीपी सांसद भी वापस लौट आए। तो वामदम के सांसद भी कांग्रेस का साथ देने लगे।
शोरगुल और नारेबाजी के बीच पहली दफे भाषण देते हुए पीएम मोदी शुरू में तो संबोधन की औपचारिकता पूरी करते वक्त नरम रहे उसके बाद उनका अंदाज बेहद आक्रामक हो गया। अंदाज में आते ही मोदी ने देश के इतिहास का हवाला देने के साथ कांग्रेस पार्टी के पुराने कारनामों की याद दिलाई। कांग्रेस पर सियासी प्रहार के क्रम को जारी रखते हुए पीएम मोदी ने लोकसभा में करीब दो घंटे का भाषण दिया। संसद में दिए गए अपने सबसे लंबे भाषण में पीएम मोदी का जोर कांग्रेस की बखिया उधेड़ने पर ही रहा। हालांकि राज्यसभा में संबोधन के वक्त उन्होंने कांग्रेस के खिलाफ उतनी आक्रामकता नहीं दिखाई जितनी वे लोकसभा में दिखा गए थे।