Ayush sector: आयुष क्षेत्र की समीक्षा में पीएम बोले, पूरी क्षमता का दोहन करने के लिए रणनीतिक हस्तक्षेप जरूरी
समीक्षा बैठक में पहलों को सुव्यवस्थित करने, संसाधनों को अनुकूलतम बनाने तथा आयुष की वैश्विक उपस्थिति को बढ़ाने के लिए एक दूरदर्शी मार्ग तैयार करने पर जोर दिया गया। पसीएम मोदी ने इस क्षेत्र के महत्वपूर्ण योगदान पर जोर दिया
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समीक्षा बैठक में पहलों को सुव्यवस्थित करने, संसाधनों को अनुकूलतम बनाने तथा आयुष की वैश्विक उपस्थिति को बढ़ाने के लिए एक दूरदर्शी मार्ग तैयार करने पर जोर दिया गया। पसीएम मोदी ने इस क्षेत्र के महत्वपूर्ण योगदान पर जोर दिया, जिसमें निवारक स्वास्थ्य देखभाल, औषधीय पौधों की खेती के माध्यम से ग्रामीण अर्थव्यवस्था को बढ़ावा देने और पारंपरिक चिकित्सा में एक अग्रणी के रूप में भारत की वैश्विक स्थिति को बढ़ाने पर चर्चा हुई।
आयुष क्षेत्र ने तेजी से किया विकास
आयुष क्षेत्र ने तेजी से आर्थिक विकास किया है, विनिर्माण बाजार का आकार 2014 में 2.85 अरब डॉलर से बढ़कर 2023 में 23 अरब डॉलर हुआ। भारत ने साक्ष्य आधारित पारंपरिक चिकित्सा में खुद को वैश्विक लीडर के रूप में स्थापित किया है। आयुष अनुसंधान पोर्टल अब 43,000 से अधिक अध्ययनों की मेजबानी कर रहा है। बयान में कहा गया है कि पिछले 10 वर्षों में शोध प्रकाशनों की संख्या पिछले 60 वर्षों के प्रकाशनों के आंकड़े को पार कर गई है।
आयुष वीजा से बढ़ेगा चिकित्सा पर्यटन
पीएम मोदी ने कहा कि आयुष वीजा का उद्देश्य चिकित्सा पर्यटन को बढ़ावा देना और समग्र स्वास्थ्य सेवा समाधान चाहने वाले अंतरराष्ट्रीय रोगियों को आकर्षित करना है। आयुष क्षेत्र ने राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर प्रमुख संस्थानों के साथ सहयोग के माध्यम से महत्वपूर्ण सफलताएं हासिल की हैं। इन उपलब्धियों में बुनियादी ढांचे को मजबूत करना और आयुष ग्रिड के तहत आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस के एकीकरण पर नए सिरे से ध्यान केंद्रित करना भी शामिल है।
पीएमओ के मुताबिक योग के प्रचार-प्रसार के लिए डिजिटल तकनीकों पर जोर रहा। आईगॉट प्लेटफॉर्म वाई-ब्रेक योग जैसी समग्र सामग्री की मेजबानी करेगा। बयान में कहा गया कि गुजरात के जामनगर में डब्ल्यूएचओ ग्लोबल ट्रेडिशनल मेडिसिन सेंटर की स्थापना एक ऐतिहासिक उपलब्धि है, जो पारंपरिक चिकित्सा में भारत के नेतृत्व को मजबूत करती है। विश्व स्वास्थ्य संगठन के अंतरराष्ट्रीय रोग वर्गीकरण (आईसीडी)-11 में पारंपरिक चिकित्सा को शामिल करने और इस क्षेत्र के बुनियादी ढांचे और पहुंच के विस्तार में राष्ट्रीय आयुष मिशन की महत्वपूर्ण भूमिका पर भी प्रकाश डाला गया।