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Supreme Court: 'SIR मामले में ममता बनर्जी की व्यक्तिगत पेशी कानूनी रूप से अनुचित', शीर्ष कोर्ट में याचिका दायर
Sun, 08 Feb 2026 11:03 PM IST
निर्मल कांत
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली।
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली।
Published by: निर्मल कांत
Updated Sun, 08 Feb 2026 11:03 PM IST
सार
Supreme Court: सुप्रीम कोर्ट में दायर आवेदन में कहा गया है कि बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी की एसआईआर मामले में व्यक्तिगत पेशी संविधान और कानून के अनुसार उचित नहीं है। आवेदन में तर्क दिया गया कि राज्य पहले से ही अपने वकीलों के जरिए पर्याप्त रूप से प्रतिनिधित्व कर रहा है, इसलिए मुख्यमंत्री का व्यक्तिगत रूप से पेश होना अनावश्यक है। पढ़ें रिपोर्ट-
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सुप्रीम कोर्ट
- फोटो : पीटीआई
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विस्तार
सुप्रीम कोर्ट में एक आवेदन दायर किया गया है। इसमें आरोप लगाया गया है कि एसआईआर मामले में पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी की व्यक्तिगत पेशी सांविधानिक रूप से अनुचित और कानूनी रूप से टिकाऊ नहीं है। ममता बनर्जी चार फरवरी को शीर्ष कोर्ट में बहस करने वाली पहली वर्तमान मुख्यमंत्री बनी थीं।
मुख्यमंत्री बनर्जी ने की एसआईआर में दखल की मांग
उन्होंने अदालत से जारी मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण (एसआईआर) में दखल देने की मांग की थी। उन्होंने कहा था कि लोकतंत्र को बचाने के लिए अदालत का दखल जरूरी है। ममता बनर्जी ने आरोप लगाया था कि पश्चिम बंगाल को निशाना बनाया जा रहा है और वहां के लोगों को परेशान किया जा रहा है। मुख्य न्यायाधीश (सीजेआई) सूर्य कांत और न्यायमूर्ति जॉयमाल्या बागची तथा एनवी अंजारिया की पीठ सोमवार को एसआईआर से जुड़ी याचिकाओं के एक समूह की सुनवाई करेगी। इनमें ममता बनर्जी की याचिका भी शामिल है।
याचिका किसने दायर की है?
यह आवेदन अखिल भारत हिंदू महासभा के पूर्व उपाध्यक्ष सतीश कुमार अग्रवाल ने दायर किया है। उन्होंने ममता बनर्जी की याचिका में दखल देने की मांग की है। पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ने राज्य में मतदाता सूची के एसआईआर के खिलाफ सुप्रीम कोर्ट में याचिका दायर की है। आवेदन में कहा गया है कि यह मामला कोई व्यक्तिगत या निजी विवाद नहीं है। यह राज्य के शासन से जुड़ा विषय है और चुनाव आयोग की ओर से संविधान और लागू चुनाव कानूनों के तहत शक्तियों के प्रयोग से संबंधित है।
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आवेदन में क्या कहा गया है?
ये बी पढ़ें: Telangana: 'पिछली BRS सरकार ने फोन टैपिंग कर कारोबारियों से की करोड़ों की वसूली', सीएम रेवंत रेड्डी का दावा
ममता बनर्जी की याचिका पर शीर्ष कोर्ट ने जारी किया था नोटिस
चार फरवरी को सुप्रीम कोर्ट ने ममता बनर्जी की याचिका पर नोटिस जारी किया था। कोर्ट ने चुनाव आयोग और पश्चिम बंगाल के मुख्य निर्वाचन अधिकारी से 9 फरवरी तक जवाब मांगा था। 19 जनवरी को सुप्रीम कोर्ट ने कई निर्देश जारी किए थे। कोर्ट ने कहा था कि पश्चिम बंगाल में एसआईआर की प्रक्रिया पारदर्शी होनी चाहिए और किसी को असुविधा नहीं होनी चाहिए।
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मुख्यमंत्री बनर्जी ने की एसआईआर में दखल की मांग
उन्होंने अदालत से जारी मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण (एसआईआर) में दखल देने की मांग की थी। उन्होंने कहा था कि लोकतंत्र को बचाने के लिए अदालत का दखल जरूरी है। ममता बनर्जी ने आरोप लगाया था कि पश्चिम बंगाल को निशाना बनाया जा रहा है और वहां के लोगों को परेशान किया जा रहा है। मुख्य न्यायाधीश (सीजेआई) सूर्य कांत और न्यायमूर्ति जॉयमाल्या बागची तथा एनवी अंजारिया की पीठ सोमवार को एसआईआर से जुड़ी याचिकाओं के एक समूह की सुनवाई करेगी। इनमें ममता बनर्जी की याचिका भी शामिल है।
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याचिका किसने दायर की है?
यह आवेदन अखिल भारत हिंदू महासभा के पूर्व उपाध्यक्ष सतीश कुमार अग्रवाल ने दायर किया है। उन्होंने ममता बनर्जी की याचिका में दखल देने की मांग की है। पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ने राज्य में मतदाता सूची के एसआईआर के खिलाफ सुप्रीम कोर्ट में याचिका दायर की है। आवेदन में कहा गया है कि यह मामला कोई व्यक्तिगत या निजी विवाद नहीं है। यह राज्य के शासन से जुड़ा विषय है और चुनाव आयोग की ओर से संविधान और लागू चुनाव कानूनों के तहत शक्तियों के प्रयोग से संबंधित है।
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आवेदन में क्या कहा गया है?
- आवेदन में कहा गया है कि इस मामले में उठाए गए मुद्दे सीधे तौर पर पश्चिम बंगाल की संस्थागत कार्यप्रणाली और चुनाव आयोग के साथ उसके सांविधानिक संबंधों से जुड़े हैं। ऐसी स्थिति में ममता बनर्जी मुख्यमंत्री होने के नाते व्यक्तिगत क्षमता में पेश नहीं हो सकतीं।
- इसमें कहा गया है कि कोर्ट में राज्य की ओर से सिर्फ नियुक्त वकीलों के जरिये ही पक्ष रखा जाना चाहिए।
- आवेदन में यह भी कहा गया है कि पश्चिम बंगाल राज्य इस मामले में अपने वकीलों के जरिये पहले से ही पर्याप्त रूप से प्रतिनिधित्व कर रहा है। इसलिए इस तरह की कार्यवाही में ममता बनर्जी की व्यक्तिगत पेशी की कोई जरूरत नहीं है।
- इसमें कहा गया कि किसी मौजूदा मुख्यमंत्री की इस तरह की व्यक्तिगत पेशी सांविधानिक रूप से अनुचित है। यह संस्थागत रूप से भी अवांछनीय है और कानूनी रूप से टिकाऊ नहीं है।
- याचिकाकर्ता ने कहा कि यह स्थापित न्यायिक परंपराओं, अदालती प्रक्रियाओं और न्यायिक अनुशासन के सिद्धांतों के खिलाफ है। खास तौर पर तब, जब पेशेवर कानूनी प्रतिनिधित्व पहले से मौजूद हो।
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ममता बनर्जी की याचिका पर शीर्ष कोर्ट ने जारी किया था नोटिस
चार फरवरी को सुप्रीम कोर्ट ने ममता बनर्जी की याचिका पर नोटिस जारी किया था। कोर्ट ने चुनाव आयोग और पश्चिम बंगाल के मुख्य निर्वाचन अधिकारी से 9 फरवरी तक जवाब मांगा था। 19 जनवरी को सुप्रीम कोर्ट ने कई निर्देश जारी किए थे। कोर्ट ने कहा था कि पश्चिम बंगाल में एसआईआर की प्रक्रिया पारदर्शी होनी चाहिए और किसी को असुविधा नहीं होनी चाहिए।
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