फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
डाउनलोड करें

सब्सक्राइब करें
Hindi News ›   India News ›   Plea in Bombay high court against public holiday in Maharashtra on Ayodhya Ram Mandir opening on Jan 22

Maharashtra: प्राण प्रतिष्ठा पर अवकाश के खिलाफ बॉम्बे हाईकोर्ट में याचिका, लॉ के चार छात्रों ने दी यह दलील

Sun, 21 Jan 2024 12:09 AM IST
गुलाम अहमद न्यूज डेस्क, अमर उजाला, मुंबई
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, मुंबई Published by: गुलाम अहमद Updated Sun, 21 Jan 2024 12:09 AM IST
सार

याचिका में कहा गया है कि किसी धार्मिक कार्यक्रम को मनाने के लिए सार्वजनिक अवकाश घोषित करना संविधान में निहित धर्मनिरपेक्षता के सिद्धांतों का उल्लंघन है।

विज्ञापन
Plea in Bombay high court against public holiday in Maharashtra on Ayodhya Ram Mandir opening on Jan 22
Bombay High Court - फोटो : Amar Ujala

विस्तार

अयोध्या में रामलला की प्राण प्रतिष्ठा के अवसर पर 22 जनवरी को सार्वजनिक अवकाश घोषित करने के महाराष्ट्र सरकार के फैसले को कानून की पढ़ाई करने वाले चार छात्रों ने बॉम्बे हाईकोर्ट में चुनौती दी है। जस्टिस जेएल कुलकर्णी और जस्टिस नीला गोखले की विशेष पीठ रविवार सुबह मामले की सुनवाई करेगी। जनहित याचिका (PIL) दायर करने वाले छात्रों में शिवांगी अग्रवाल, सत्यजीत सिद्धार्थ साल्वे, वेदांत गौरव अग्रवाल और खुशी संदीप बंगिया शामिल हैं, जो मुंबई स्थित एमएनएलयू, जीएलसी और निरमा लॉ स्कूल में विधि की पढ़ाई कर रहे हैं।

विज्ञापन


याचिका में कहा गया है कि किसी धार्मिक कार्यक्रम को मनाने के लिए सार्वजनिक अवकाश घोषित करना संविधान में निहित धर्मनिरपेक्षता के सिद्धांतों का उल्लंघन है। छात्रों ने तर्क दिया कि कोई राज्य सरकार किसी भी धर्म के साथ जुड़ नहीं सकती या उसे बढ़ावा नहीं दे सकती। याचिका में कहा गया है कि एक हिंदू मंदिर के उद्घाटन में खुले तौर पर भाग लेने, इसका जश्न मनाने और इस तरह एक विशेष धर्म से जुड़ने का सरकार का फैसला धर्मनिरपेक्षता के सिद्धांतों पर सीधा हमला है।
विज्ञापन


पार्टी की इच्छा पर आधारित नहीं हो सकती ऐसी घोषणा...
छात्रों का कहना है कि सार्वजनिक अवकाश की घोषणा के संबंध में कोई भी नीति सत्ताधारी राजनीतिक दल की इच्छा पर आधारित नहीं हो सकती। अवकाश की घोषणा किसी राष्ट्रभक्त या ऐतिहासिक व्यक्ति की स्मृति में की जा सकती है, लेकिन समाज के एक विशेष वर्ग या धार्मिक समुदाय को खुश करने के लिए रामलला के अभिषेक का जश्न मनाने के लिए नहीं। याचिका में कहा गया है कि ऐसी छुट्टियों के परिणामस्वरूप शैक्षणिक संस्थानों, बैंकिंग संस्थानों, सरकारी कार्यालयों और सार्वजनिक सेवाओं के बंद होने के कारण शिक्षा का नुकसान, वित्तीय असफलताएं और शासन और सार्वजनिक कार्यों में व्यवधान हो सकता है।
विज्ञापन
विज्ञापन


अवकाश का फैसला सार्वजनिक हित के अनुरूप नहीं...
छात्रों का कहना है कि धार्मिक आयोजन पर सरकारी अवकाश की घोषणा सार्वजनिक हित के अनुरूप नहीं है। उनका तर्क है कि विशेष रूप से कोविड महामारी के बाद देश का विकास कम से कम 10 साल पीछे चला गया है। ऐसे में किसी भी बाधा से सरकारी खजाने को काफी नुकसान होता है। जनहित याचिका में आगे तर्क दिया गया है कि सार्वजनिक अवकाश घोषित करने का निर्णय राजनीतिक उद्देश्यों के लिए सत्ता का खुला दुरुपयोग है, क्योंकि इसका समय आगामी संसदीय चुनावों के साथ मेल खाता है।


महाराष्ट्र सरकार ने अयोध्या में रामलला की प्राण-प्रतिष्ठा समारोह को देखते हुए 22 जनवरी को राज्य में सार्वजनिक अवकाश की घोषणा की। सरकार को शुक्रवार को अवकाश के संबंध में एक आदेश जारी किया थ।

विज्ञापन
विज्ञापन

रहें हर खबर से अपडेट, डाउनलोड करें Android Hindi News apps, iOS Hindi News apps और Amarujala Hindi News apps अपने मोबाइल पे|
Get all India News in Hindi related to live update of politics, sports, entertainment, technology and education etc. Stay updated with us for all breaking news from India News and more news in Hindi.

विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन

एड फ्री अनुभव के लिए अमर उजाला प्रीमियम सब्सक्राइब करें

Next Article

AU ऐप में पढ़ें

Followed