मुलायम के बयान से फेल हो गई पीके की रणनीति
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तीन महीने पहले प्रशांत किशोर ने प्लान ए के तहत यूपी में 27 साल बाद जिस तरह से कांग्रेस को सत्ता के करीब लाने का ताना बाना बुना था वो राहुल की किसान महायात्रा के बाद ही परवान चढ़ता नहीं दिखा। प्रशांत के प्रयास से यात्रा को प्रचार खूब मिला और कांग्रेस कार्यकर्ता घरों से बाहर भी निकले लेकिन इतने से पार्टी को चार से पहले नंबर पर लाना मुश्किल दिख रहा था।
लिहाजा प्रशांत किशोर बिहार की तर्ज में प्लान बी को लेकर आगे बढ़े। इस काम में उन्होंने कांग्रेस नेताओं को आगे नहीं रखा और सीधे समाजवादी पार्टी के गठबंधन की बात शुरू कर दी। हालांकि बिना राहुल गांधी की अनुमति के प्रशांत ऐसा नहीं कर सकते थे।
प्रशांत किशोर को लेकर यूपी कांग्रेस के नेताओं राय हमेशा अलग रही है
प्रशांत किशोर को लेकर यूपी कांग्रेस के नेताओं राय हमेशा अलग रही है। प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष राजबब्बर ने कहा कि पार्टी ने गठबंधन के लिए किसी को अधिकृत नहीं किया है। फिर बारी-बारी मुख्यमंत्री पद की उम्मीदवार शीला दीक्षित और कैंपेन कमेटी के चेयरमैन संजय सिंह ने भी किसी गठबंधन को नकार दिया। सूत्रों की मानें राहुल गांधी ही चाहते थे समाजवादी पार्टी पहले सम्मानजनक सीटों का आश्वासन मिल जाए तभी अधिकारिक तौर पर पार्टी में चर्चा हो।
प्रदेश कांग्रेस के नेताओं के बयान और नराजगी की परवाह किया बिना पीके पहले मुलायम सिंह और फिर अखिलेश यादव से मिले। मुलायम सिंह के बयान ने साफ कर दिया है कि कांग्रेस को अकेले ही चुनावी मैदान में उतरना होगा।