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G-20: पीके मिश्रा ने जलवायु परिवर्तन को लेकर किया सचेत, कहा- इसका असर भविष्य में नहीं बल्कि पहले से ही मौजूद

Mon, 24 Jul 2023 08:01 PM IST
देव कश्यप पीटीआई, नई दिल्ली।
पीटीआई, नई दिल्ली। Published by: देव कश्यप Updated Mon, 24 Jul 2023 08:01 PM IST
सार

मिश्रा ने चेन्नई में आयोजित जी-20 आपदा जोखिम न्यूनीकरण कार्य समूह (DRRWG) की तीसरी बैठक में अपने उद्घाटन भाषण में कहा कि प्रगतिशील परिवर्तन का समय बीत चुका है। हमें नए आपदा जोखिमों के निर्माण को रोकने और मौजूदा आपदा जोखिमों को प्रभावी ढंग से प्रबंधित करने के लिए स्थानीय, राष्ट्रीय और वैश्विक प्रणालियों में बदलाव की आवश्यकता है।

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PK Mishra says Impact of climate change disasters no longer into distant future but already here
चेन्नई में तीसरी जी-20 डीआरआरडब्ल्यूजी की बैठक के दौरान पीएम मोदी के प्रधान सचिव पीके मिश्रा। - फोटो : PTI

विस्तार

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के प्रधान सचिव पीके मिश्रा ने सोमवार को जी-20 आपदा जोखिम न्यूनीकरण कार्य समूह (DRRWG) की बैठक में सावधानी बरतने की ओर इशारा करते हुए कहा कि जलवायु परिवर्तन से संबंधित आपदाओं का प्रभाव अब दूर के भविष्य में नहीं है, बल्कि पहले से ही यहां मौजूद है और बहुत बड़ा है।

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मिश्रा ने चेन्नई में आयोजित जी-20 आपदा जोखिम न्यूनीकरण कार्य समूह (डीआरआरडब्ल्यूजी) की तीसरी बैठक में अपने उद्घाटन भाषण में कहा कि प्रगतिशील परिवर्तन का समय बीत चुका है। हमें नए आपदा जोखिमों के निर्माण को रोकने और मौजूदा आपदा जोखिमों को प्रभावी ढंग से प्रबंधित करने के लिए स्थानीय, राष्ट्रीय और वैश्विक प्रणालियों में बदलाव की आवश्यकता है। उन्होंने कहा कि भारत ने जी-20 की अध्यक्षता के पिछले आठ महीनों के दौरान उत्साहपूर्वक भाग लिया है। उन्होंने कहा कि देश भर में 56 स्थानों पर अब तक 177 बैठकें हो चुकी हैं।
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उन्होंने कहा कि विभिन्न देशों के प्रतिनिधियों ने विचार-विमर्श में सक्रिय रूप से भाग लिया। उन्हें भारत की सामाजिक, सांस्कृतिक और प्राकृतिक विविधता के भी दर्शन हुए। जी-20 एजेंडा के ठोस पहलुओं में काफी प्रगति हुई और मुझे यकीन है कि डेढ़ महीने बाद होने वाला शिखर बैठक एक ऐतिहासिक आयोजन होगा। उन्होंने कहा कि इस कार्य समूह की पहली बैठक मार्च में गांधीनगर में हुई थी। तब से दुनिया ने कुछ अभूतपूर्व आपदाएं देखी हैं।
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मिश्रा ने मुश्किल मौसम की घटनाओं का दिया हवाला
मिश्रा ने चुनौतियों के पैमाने को रेखांकित करने के लिए मुश्किल मौसम की घटनाओं का हवाला दिया, जिनमें लगभग पूरे उत्तरी गोलार्ध के शहरों में गर्मी की भारी लहरें, कनाडा में जंगल की आग और धुंध के कारण उत्तरी अमेरिका के कई हिस्सों में शहर प्रभावित हुए और 45 वर्षों में दिल्ली में सबसे खराब बाढ़ की स्थिति शामिल है, जबकि भारत में मानसून का मौसम आधा भी नहीं गुजरा है। उन्होंने कहा कि भारत ने भी अपने पूर्वी और पश्चिमी तटों पर प्रमुख चक्रवाती गतिविधि देखी है।

उन्होंने कहा, जलवायु परिवर्तन से संबंधित आपदाओं का प्रभाव अब दूर के भविष्य में नहीं है। वे पहले से ही यहां मौजूद हैं और बहुत बड़े हैं। वे आपस में जुड़े हुए हैं और वे पूरे पृथ्वी पर सभी को प्रभावित करते हैं। आज दुनिया जिन चुनौतियों का सामना कर रही है वे इस कार्य समूह के महत्व को रेखांकित करती हैं। मिश्रा ने कहा, हालांकि समूह ने चार महीने की छोटी सी अवधि में काफी प्रगति की है और अच्छी गति पैदा की है, लेकिन इसे और अधिक करने की जरूरत है। उन्होंने कहा, इस कार्य समूह की महत्वाकांक्षा हमारे सामने आने वाली समस्याओं के पैमाने से मेल खाना चाहिए।

उन्होंने कहा, यह एक तथ्य है कि अलग-अलग देश और वैश्विक प्रयास सक्रिय रूप से इसमे प्रगति चाहते हैं ताकि उनके सामूहिक प्रभाव को अधिकतम किया जा सके। उन्होंने आगे कहा कि संकीर्ण संस्थागत दृष्टिकोण से प्रेरित खंडित प्रयासों को यह समूह बर्दाश्त नहीं कर सकता। मिश्रा ने कहा, हमें समस्या-समाधान दृष्टिकोण से प्रेरित होना चाहिए। उन्होंने कहा, संयुक्त राष्ट्र महासचिव की सभी के लिए प्रारंभिक चेतावनी पहल इस दृष्टिकोण का एक उदाहरण है। उन्होंने कहा, यह जानकर अच्छा लगा कि जी-20 ने प्रारंभिक चेतावनी और प्रारंभिक कार्रवाई को पांच प्राथमिकताओं में से एक के रूप में पहचाना है और इसके पीछे अपना पूरा जोर लगा रहा है।


मिश्रा ने कहा कि समूह को आपदा जोखिम में कमी के लिए उपलब्ध वित्तपोषण की विभिन्न धाराओं के बीच अधिक तालमेल करने की आवश्यकता है और जलवायु वित्त को आपदा जोखिम में कमी के लिए वित्तपोषण का एक अभिन्न अंग बनाना चाहिए। उन्होंने कई सुझाव देते हुए कहा कि आपदा प्रतिरोधी बुनियादी ढांचे के लिए गठबंधन के लाभ जिसे सबसे पहले पीएम मोदी ने प्रस्तावित किया था और कई जी-20 देशों, संयुक्त राष्ट्र और अन्य लोगों के साथ साझेदारी में स्थापित किया गया था। इसका प्रभाव पहले से ही दिखाई दे रहा है। मिश्रा ने कहा कि कार्य समूह द्वारा अपनाई गई सभी पांच प्राथमिकताओं में जलवायु परिवर्तन से उबरने के उपायों पर महत्वपूर्ण प्रगति हुई है।

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