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Tamil Nadu: 'अवैध शराब त्रासदी के पीड़ित स्वतंत्रता सेनानी नहीं', 10 लाख के मुआवजे के खिलाफ हाईकोर्ट में दलील
Fri, 05 Jul 2024 01:03 PM IST
काव्या मिश्रा
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, चेन्नई
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, चेन्नई
Published by: काव्या मिश्रा
Updated Fri, 05 Jul 2024 01:03 PM IST
सार
कल्लाकुरिची जहरीली शराब त्रासदी की मुआवजा राशि पर चिंता जताते हुए मोहम्मद गौस ने कहा कि पीड़ित स्वतंत्रता सेनानी या सामाजिक कार्यकर्ता नहीं थे, जिन्होंने आम जनता या समाज के लिए अपनी जान गंवाई हो
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Madras High Court
- फोटो : अमर उजाला, ग्राफिक
विस्तार
तमिलनाडु के कल्लाकुरिची जिले में पिछले महीने जहरीली शराब पीने से करीब 56 लोगों की मौत हो गई थी। पूरे राज्य में इस त्रासदी को लेकर हाहाकार मच गया था। जहां भाजपा ने हंगामा करना शुरू कर दिया था। वहीं, बिगड़ते हालात को देखते हुए सीएम एमके स्टालिन ने मृतकों के परिजनों को 10 लाख रुपये और अस्पताल में भर्ती लोगों को 50 हजार का मुआवजा देने का एलान किया था। हालांकि, अब इस मुआवजे के आदेश को रद्द कराने के लिए मद्रास उच्च न्यायालय में एक जनहित याचिका दायर की गई है।
मोहम्मद गौस ने दायर की याचिका
कल्लाकुरिची जहरीली शराब त्रासदी की मुआवजा राशि पर चिंता जताते हुए मोहम्मद गौस ने जनहित याचिका दायर की। इस याचिका पर शुक्रवार को सुनवाई करते हुए कार्यवाहक मुख्य न्यायाधीश आर महादेवन और न्यायमूर्ति मोहम्मद शफीक की खंडपीठ ने कहा कि मुआवजे की राशि अधिक है। इस मामले पर आगे की सुनवाई दो सप्ताह बाद होगी।
अवैध शराब पीना गलत
गौस ने याचिका में कहा कि पीड़ित स्वतंत्रता सेनानी या सामाजिक कार्यकर्ता नहीं थे, जिन्होंने आम जनता या समाज के लिए अपनी जान गंवाई हो और जिन्होंने जहरीली शराब पीकर एक तरीके से गलत काम ही किया है। अवैध शराब पीना गलत ही था। राज्य को उन लोगों पर दया करने की जरूरत नहीं है, जिन्होंने अवैध शराब पी और अपनी जान गंवा दी।
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उन्होंने कहा कि जहरीली शराब के शिकार लोगों को सिर्फ सांत्वना देनी जानी चाहिए। जिन्होंने अपनी खुशी के लिए गैरकानूनी काम किया है, उन्हें कोई मुआवजा नहीं दिया जाना चाहिए।
इन लोगों को कम मुआवजा क्यों...?
याचिकाकर्ता ने कहा कि यह स्पष्ट है कि अवैश शराब पीना गलत था। राज्य सरकार किस आधार पर आग या किसी अन्य दुर्घटना के पीड़ितों को कम मुआवजा दे रही है। जबकि जहरीली शराब त्रासदी के पीड़ितों को भारीभरकम राशि दे रही है।
2008 में जहरीली शराब से 180 लोगों की मौत हुई थी
तमिलनाडु में जहरीली शराब से पहले भी कई बार मौत की घटनाएं हुई हैं। तमिलनाडु के कृष्णागिरि और कर्नाटक के कोलार के सीमावर्ती गांवों में मई 2008 में जहरीली शराब से लगभग 180 लोगों की मौत हो गई थी। इनमें से 60 कृष्णागिरी जिले और बाकी कोलार और बेंगलुरु के थे। कई लोगों की आंखों की रोशनी भी चली गई थी।
राष्ट्रीय अपराध रिकॉर्ड ब्यूरो (NCRP) के आंकड़ों के अनुसार, तमिलनाडु में जहरीली शराब से साल 2020 में 20 और 2021 में छह मौतें हुईं। 2023 में राज्य के विल्लुपुरम और चेंगलपट्टू जिलों में लगभग 22 लोगों की जहरीली शराब से मौत हो गई थी।
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मोहम्मद गौस ने दायर की याचिका
कल्लाकुरिची जहरीली शराब त्रासदी की मुआवजा राशि पर चिंता जताते हुए मोहम्मद गौस ने जनहित याचिका दायर की। इस याचिका पर शुक्रवार को सुनवाई करते हुए कार्यवाहक मुख्य न्यायाधीश आर महादेवन और न्यायमूर्ति मोहम्मद शफीक की खंडपीठ ने कहा कि मुआवजे की राशि अधिक है। इस मामले पर आगे की सुनवाई दो सप्ताह बाद होगी।
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अवैध शराब पीना गलत
गौस ने याचिका में कहा कि पीड़ित स्वतंत्रता सेनानी या सामाजिक कार्यकर्ता नहीं थे, जिन्होंने आम जनता या समाज के लिए अपनी जान गंवाई हो और जिन्होंने जहरीली शराब पीकर एक तरीके से गलत काम ही किया है। अवैध शराब पीना गलत ही था। राज्य को उन लोगों पर दया करने की जरूरत नहीं है, जिन्होंने अवैध शराब पी और अपनी जान गंवा दी।
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उन्होंने कहा कि जहरीली शराब के शिकार लोगों को सिर्फ सांत्वना देनी जानी चाहिए। जिन्होंने अपनी खुशी के लिए गैरकानूनी काम किया है, उन्हें कोई मुआवजा नहीं दिया जाना चाहिए।
इन लोगों को कम मुआवजा क्यों...?
याचिकाकर्ता ने कहा कि यह स्पष्ट है कि अवैश शराब पीना गलत था। राज्य सरकार किस आधार पर आग या किसी अन्य दुर्घटना के पीड़ितों को कम मुआवजा दे रही है। जबकि जहरीली शराब त्रासदी के पीड़ितों को भारीभरकम राशि दे रही है।
2008 में जहरीली शराब से 180 लोगों की मौत हुई थी
तमिलनाडु में जहरीली शराब से पहले भी कई बार मौत की घटनाएं हुई हैं। तमिलनाडु के कृष्णागिरि और कर्नाटक के कोलार के सीमावर्ती गांवों में मई 2008 में जहरीली शराब से लगभग 180 लोगों की मौत हो गई थी। इनमें से 60 कृष्णागिरी जिले और बाकी कोलार और बेंगलुरु के थे। कई लोगों की आंखों की रोशनी भी चली गई थी।
राष्ट्रीय अपराध रिकॉर्ड ब्यूरो (NCRP) के आंकड़ों के अनुसार, तमिलनाडु में जहरीली शराब से साल 2020 में 20 और 2021 में छह मौतें हुईं। 2023 में राज्य के विल्लुपुरम और चेंगलपट्टू जिलों में लगभग 22 लोगों की जहरीली शराब से मौत हो गई थी।