PFI जारी रखेगा 'कहीं हम भूल न जाएं', धारा 144 लगा कर छीन रहे विरोध करने का हक
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इसका सीएए के विरोध प्रदर्शनों से कोई लेना देना नहीं है। इसके अलावा पदाधिकारियों ने यह आरोप भी लगाया कि यूपी में सीएए के विरोध प्रदर्शनों में यौन हिंसा हुई है। इसमें बच्चों को भी नहीं बख्शा गया। अमर उजाला डॉट कॉम ने जब पीएफआई सचिव अनीस अहमद से पूछा कि इस बाबत कोई शिकायत या एफआईआर हुई है, तो उन्होंने कहा, हमें मालूम है कि ऐसी घटनाएं हुई हैं, लेकिन हमारे पास कोई सबूत नहीं है। हमने मीडिया रिपोर्ट में ऐसा पढ़ा है।
बता दें कि यूपी और देश के दूसरे हिस्सों में अपने विरोध प्रदर्शनों के चलते पीएफआई का नाम इन दिनों चर्चा में है। एडीजी मेरठ जोन प्रशांत कुमार कह चुके हैं कि सीएए विरोध प्रदर्शनों के बाद जो वीडियो सामने आए हैं, उससे स्पष्ट है कि इन लोगों ने कथित तौर पर पुलिस टोली को जलाने का प्रयास किया था। इसके चलते अब तक पीएफआई के कई लोग गिरफ्तार किए जा चुके हैं। गिरफ्तार लोगों में पीएफआई के सहयोगी एवं राजनीतिक संगठन 'एसडीपीआई' का प्रदेश अध्यक्ष भी शामिल है।
यूपी के डीजी ओपी सिंह भी बीते दिनों इस संगठन की संदिग्ध गतिविधियों को लेकर केंद्रीय गृह मंत्रालय को लिख चुके हैं। शनिवार को पीएफआई ने प्रेस क्लब ऑफ इंडिया में एक प्रेसवार्ता आयोजित की, जिसमें संगठन के उपाध्यक्ष ओएमए सलाम और सचिव अनीस अहमद ने मीडिया के सवालों के जवाब दिए।
सीएए से जोड़ना गलत है: ओएमए सलाम
संगठन के उपाध्यक्ष ओएमए सलाम से पूछा गया कि यूपी और देश के दूसरे हिस्सों में 'कहीं हम भूल न जाएं' के पैंफ्लेट वितरित किए गए हैं। इन पर लिखी लाइनें भड़काऊ हैं। इस बारे में सलाम ने कहा, इसका सीएए के विरोध प्रदर्शनों से कोई लेना-देना नहीं हैं। हमारे ये शब्द तो 1993 से चल रहे हैं। बाबरी मस्जिद गिरा दी गई, लेकिन अभी तक उसके गुनहगारों को सजा नहीं मिली। ये पैंफ्लेट हमने छह दिसंबर को बांटे थे। इनमें ऐसा कुछ भी नहीं लिखा है, जो भड़काऊ सामग्री के दायरे में आता हो।
ओएमए सलाम के अनुसार, हमारी न्याय व्यवस्था लचर है, यही वजह है कि अभी तक मस्जिद गिराने वालों को सजा नहीं मिली। दुनिया का ध्यान सीएए से हटाने के लिए पीएफआई को निशाना बनाया जा रहा है। भाजपा शासित राज्यों में धारा 144 लगाकर विरोध करने का हक छीना जा रहा है।
पुलिस के पास एक भी सबूत नहीं
संगठन सचिव अनीस ने कहा, पीएफआई पर दंगे भड़काने के आरोप बेबुनियाद हैं, पुलिस के पास एक भी सबूत नहीं है। हम कानूनी दायरे में रहकर लड़ाई लड़ेंगे। यूपी पुलिस को चैलेंज देते हैं कि वे हमारे खिलाफ सबूत लाएं। आईएसआईएस या अलकायदा जैसे आतंकी संगठनों के साथ कथित संबंधों पर पूछे गए सवाल के जवाब में अनीस ने कहा, सभी जांच एजेंसियां केंद्र के पास हैं, वे जांच करा लें।
हैरानी की बात है कि किसी भी जांच एजेंसी के पास ऐसे सबूत नहीं हैं, लेकिन एक मंत्री यह बता रहा है कि पीएफआई के आतंकी संगठनों के साथ संबंध हैं। पीएफआई पर लाल गलियारा बनाने जैसे आरोप लगे थे। क्या आज वह गलियारा बना है, इस पर गंभीरता से सोचना चाहिए। सिमी जैसे संगठनों के साथ हमारा कोई लेना देना नहीं है।
RSS की कट्टर हिंदुत्व छवि के खिलाफ
अनीस का कहना है कि पीएफआई आरएसएस की हिंदुत्व वाली विचारधारा के खिलाफ है। हम किसी देश या धर्म के खिलाफ नहीं हैं। बाबरी मस्जिद मामले में न्याय न मिलना, यह न्यायिक व्यवस्था पर प्रश्न चिन्ह लगाता है। यह बात भारतीय संविधान पर काले धब्बे के समान है। झारखंड में पीएफआई पर बैन लगा, लेकिन हाईकोर्ट ने उसे रिजेक्ट कर दिया। हम अदालती लड़ाई रहे हैं, आगे भी लड़ते रहेंगे।
हमारी फंडिंग पर सवाल उठ रहे हैं। संगठन के उपाध्यक्ष ओएमए सलाम ने कहा, हम साल में एक बार चंदा लेते हैं। कोई बड़ा चंदा नहीं, बल्कि आम लोगों से बहुत छोटा चंदा लेते हैं। आईटीआर फाइल करते हैं। केंद्र सरकार के पास सारी जानकारी है। 'एसडीपीआई' का हम सहयोग करते हैं। वह एक राजनीतिक संगठन है, जबकि हमारा संगठन सामाजिक कार्यों के लिए बना है।