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'पेट्रोल-डीजल का स्टॉक पर्याप्त': पीएम की अपील के बाद सरकार बोली- LPG की सप्लाई जारी; बताए देश के मौजूदा हालात

Mon, 11 May 2026 04:06 PM IST
हिमांशु सिंह चंदेल न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली Published by: हिमांशु सिंह चंदेल Updated Mon, 11 May 2026 04:06 PM IST
सार

पश्चिम एशिया संकट के बीच भारत सरकार ने देशवासियों से पेट्रोल और डीजल की खपत कम करने की अपील की है। पेट्रोलियम मंत्रालय ने कहा कि अंतरराष्ट्रीय बाजार में तेल की कीमतों में उतार-चढ़ाव के बावजूद देश में पेट्रोल, डीजल और एलपीजी की कोई कमी नहीं है। हालांकि सरकार ने सार्वजनिक परिवहन, कारपूलिंग और इलेक्ट्रिक वाहनों के इस्तेमाल पर जोर दिया है। आइए, विस्तार से जानते हैं ऊर्जा खपत पर सरकार ने क्या-क्या जानकारी दी...

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petrolium ministry States LPG Supply Continues Adequate Stock of Petrol Diesel after pm modi Appeal
सुजाता शर्मा, पेट्रोलियम मंत्रालय की संयुक्त सचिव - फोटो : अमर उजाला ग्राफिक्स

विस्तार

पश्चिम एशिया में जारी संकट के बीच भारत सरकार ने देशवासियों से पेट्रोल और डीजल की खपत कम करने की अपील की है। पेट्रोलियम एवं प्राकृतिक गैस मंत्रालय ने साफ कहा कि वैश्विक ऊर्जा सप्लाई चेन पर असर पड़ा है और अंतरराष्ट्रीय बाजार में तेल की कीमतों में भारी उतार-चढ़ाव देखा जा रहा है। इसके बावजूद देश में ईंधन की कोई कमी नहीं है। सरकार ने लोगों से सार्वजनिक परिवहन, कारपूलिंग और इलेक्ट्रिक वाहनों के इस्तेमाल को बढ़ाने की अपील की है ताकि देश पर बढ़ रहे आर्थिक बोझ को कम किया जा सके।

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पेट्रोलियम मंत्रालय ने क्या जानकारी दी?
पेट्रोलियम मंत्रालय की संयुक्त सचिव सुजाता शर्मा ने प्रेस वार्ता में कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने देशवासियों से पेट्रोल और डीजल की खपत घटाने का आग्रह किया है। उन्होंने कहा कि जहां संभव हो वहां मेट्रो और सार्वजनिक परिवहन का इस्तेमाल किया जाए। लोग कारपूलिंग अपनाएं और माल ढुलाई के लिए रेलवे को प्राथमिकता दें। इसके अलावा इलेक्ट्रिक वाहनों का उपयोग बढ़ाने पर भी जोर दिया गया है। मंत्रालय ने कहा कि अगर हर नागरिक रोजमर्रा की जिंदगी में ऊर्जा बचाने की कोशिश करेगा तो देश पर पड़ रहा आर्थिक दबाव कम हो सकेगा।
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क्या देश में पेट्रोल-डीजल की कोई कमी है?
सुजाता शर्मा ने कहा कि पश्चिम एशिया संकट के कारण पूरी दुनिया की ऊर्जा सप्लाई चेन प्रभावित हुई है और अंतरराष्ट्रीय बाजार में कीमतों में अस्थिरता बनी हुई है। हालांकि भारत सरकार ने समय रहते कई प्रभावी कदम उठाए हैं ताकि आम लोगों को किसी तरह की परेशानी का सामना न करना पड़े। उन्होंने कहा कि देश में कच्चे तेल का भंडार पर्याप्त मात्रा में मौजूद है और सभी रिफाइनरियां पूरी क्षमता के साथ काम कर रही हैं। देश के किसी भी पेट्रोल पंप पर ईंधन खत्म होने की स्थिति नहीं है और एलपीजी एजेंसियों पर भी सप्लाई सामान्य बनी हुई है। 
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सरकार ने यह भी स्पष्ट किया कि भारत के पास 60 दिनों का कच्चा तेल, 60 दिनों की प्राकृतिक गैस और 45 दिनों का एलपीजी स्टॉक मौजूद है। सरकार ने बताया कि भारत दुनिया का तीसरा सबसे बड़ा तेल रिफाइनर है और घरेलू मांग को पूरी तरह से पूरा कर रहा है। इसके अलावा, खरीफ 2026 के लिए उर्वरक की भी कोई कमी नहीं है। कुल 390.54 लाख मीट्रिक टन की जरूरत के मुकाबले अभी 199.65 लाख मीट्रिक टन (51 प्रतिशत से अधिक) स्टॉक उपलब्ध है, जो सामान्य स्तर से काफी ज्यादा है।

एलपीजी सिलेंडर की सप्लाई को लेकर क्या जानकारी दी गई?
मंत्रालय ने बताया कि घरेलू रसोई गैस की सप्लाई लगातार जारी है और पर्याप्त मात्रा में एलपीजी उपलब्ध है। पिछले तीन दिनों में 1 करोड़ 14 लाख बुकिंग के मुकाबले 1 करोड़ 26 लाख एलपीजी सिलेंडर घरों तक पहुंचाए गए हैं। वहीं कमर्शियल एलपीजी की बिक्री भी पिछले तीन दिनों में 17 हजार टन से अधिक रही है। सरकार ने कहा कि ऑटो एलपीजी की बिक्री भी 762 टन से ज्यादा दर्ज की गई है। इससे साफ है कि सप्लाई व्यवस्था सामान्य तरीके से काम कर रही है और किसी तरह की घबराहट की जरूरत नहीं है।

सरकार की चिंता आखिर किस बात को लेकर है?
सरकार का कहना है कि वैश्विक हालात के कारण कच्चे तेल की कीमतों पर दबाव बना हुआ है। ऐसे में भारत जैसे बड़े आयातक देश के लिए ऊर्जा बचत बेहद जरूरी हो जाती है। मंत्रालय ने कहा कि अगर लोग निजी वाहनों का कम इस्तेमाल करेंगे और सार्वजनिक परिवहन को बढ़ावा देंगे तो इससे विदेशी मुद्रा पर दबाव कम होगा। साथ ही इससे देश की अर्थव्यवस्था को भी राहत मिलेगी। सरकार का मानना है कि ऊर्जा संरक्षण केवल सरकार की जिम्मेदारी नहीं बल्कि हर नागरिक की भागीदारी से ही संभव है।

पेट्रोलियम मंत्रालय ने भरोसा दिलाया कि देश में पेट्रोल, डीजल और एलपीजी की सप्लाई बनाए रखने के लिए लगातार निगरानी की जा रही है। सरकार हालात पर नजर रखे हुए है और जरूरत पड़ने पर अतिरिक्त कदम भी उठाए जाएंगे। मंत्रालय ने कहा कि आम लोगों को घबराने की जरूरत नहीं है। सरकार का पूरा प्रयास है कि अंतरराष्ट्रीय संकट का असर देश के आम उपभोक्ताओं पर कम से कम पड़े और जरूरी सेवाएं बिना रुकावट जारी रहें।
 
हैदराबाद में पीएम मोदी ने क्या अपील की थी?

  • सोना न खरीदें... उन्होंने लोगों से अपील की है कि वे कम से कम एक साल तक शादियों या गैर-जरूरी चीजों के लिए सोने की खरीदारी से बचें। चूंकि भारत बड़े पैमाने पर सोना आयात करता है, इसलिए इस कदम से देश की विदेशी मुद्रा बचेगी।
  • पेट्रोल-डीजल की बचत... अंतरराष्ट्रीय स्तर पर कच्चे तेल की बढ़ती कीमतों के बीच पीएम ने ईंधन का संयम से उपयोग करने को कहा। उन्होंने जनता से निजी वाहनों की जगह मेट्रो और पब्लिक ट्रांसपोर्ट का इस्तेमाल करने, कारपूलिंग अपनाने और इलेक्ट्रिक वाहनों को बढ़ावा देने की अपील की। इसके अलावा, माल ढुलाई के लिए सड़कों की बजाय रेलवे का उपयोग करने पर जोर दिया गया है।
  • 'वर्क फ्रॉम होम' की वापसी... उन्होंने कोरोना काल की तरह ही 'वर्क फ्रॉम होम', वर्चुअल मीटिंग्स और वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग जैसी व्यवस्थाओं को फिर से जीवनशैली में शामिल करने की सलाह दी, ताकि यात्राओं में जलने वाले ईंधन की बचत हो सके।
  • गैर-जरूरी विदेश यात्राएं टालें... मध्यम वर्ग में बढ़ती विदेश यात्राओं और डेस्टिनेशन वेडिंग के चलन पर बात करते हुए, उन्होंने आग्रह किया कि संकट के इस समय में कम से कम एक साल तक गैर-जरूरी विदेश यात्राओं और छुट्टियों को टाल देना चाहिए।
  • खाद्य तेल का कम इस्तेमाल... पीएम मोदी ने हर परिवार से अपने रोज़मर्रा के खाने के तेल के उपयोग में लगभग 10% की कटौती करने का आग्रह किया। उनका कहना है कि इससे आयात बिल घटेगा और साथ ही यह लोगों के स्वास्थ्य (मोटापा और अन्य बीमारियों से बचाव) के लिए भी काफी फायदेमंद होगा।
  • 'वोकल फॉर लोकल' और आत्मनिर्भरता... उन्होंने जनता से 'मेड इन इंडिया' उत्पादों को अपनाने को कहा। उन्होंने लोगों से अपील की कि वे अपनी रोजमर्रा की विदेशी चीजों की एक लिस्ट बनाएं और धीरे-धीरे उनकी जगह स्वदेशी विकल्पों का इस्तेमाल शुरू करें।
  • प्राकृतिक खेती को बढ़ावा... आयात पर निर्भरता कम करने के लिए किसानों से रासायनिक खादों का उपयोग कम करने और प्राकृतिक खेती की ओर कदम बढ़ाने का भी आह्वान किया गया।

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