{"_id":"60db55569cc2802c3055d4a2","slug":"petition-in-supreme-court-demanding-effective-law-for-population-control","type":"story","status":"publish","title_hn":"जनसंख्या नियंत्रण: प्रभावी कानून बनाने की मांग को लेकर सुप्रीम कोर्ट में याचिका दायर","category":{"title":"India News","title_hn":"देश","slug":"india-news"}}
जनसंख्या नियंत्रण: प्रभावी कानून बनाने की मांग को लेकर सुप्रीम कोर्ट में याचिका दायर
Tue, 29 Jun 2021 10:46 PM IST
गौरव पाण्डेय
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
Published by: गौरव पाण्डेय
Updated Tue, 29 Jun 2021 10:46 PM IST
सार
याचिका में केंद्र सरकार को जनसंख्या नियंत्रण के लिए प्रभावी विधान बनाने का निर्देश देने की मांग की गई है। याचिका में कहा गया है कि केंद्र को दो बच्चों की नीति अपनाने पर विचार करने का निर्देश दिया जाना चाहिए। दो से अधिक बच्चे वालों को सरकारी नौकरी, सरकारी सहायता और सब्सिडी न दी जाए। साथ ही उन्हें मताधिकार से भी वंचित करने पर विचार किया जाना चाहिए।
विज्ञापन
सर्वोच्च न्यायालय
- फोटो : पीटीआई
विस्तार
मौलाना आजाद राष्ट्रीय उर्दू विश्वविद्यालय के कुलपति फिरोज बख्त अहमद ने सुप्रीम कोर्ट में एक जनहित याचिका दायर कर जनसंख्या नियंत्रण के लिए प्रभावी, नियम, विधान व दिशानिर्देश बनाने की मांग की है। याचिकाकर्ता फिरोज बख्त देश के पहले शिक्षा मंत्री मौलाना अबुल कलाम आजाद के बड़े भाई के प्रपौत्र हैं।
विज्ञापन
याचिका में कहा गया है कि देश की बहुत सारी समस्याओं की मुख्य वजह जनसंख्या है। याचिका में दावा किया गया है कि भारत की जितनी जनसंख्या सरकारी रिकॉर्ड में बताई जाती है, वास्तविक जनसंख्या उससे बहुत अधिक है। एक अनुमान के मुताबिक देश की जनसंख्या 150 करोड़ से भी अधिक हो गई है।
विज्ञापन
जनसंख्या विस्फोट के कारण भारत विकास के सभी पैमानों पर पिछड़ा नजर आता है। भारत में 50 फीसदी समस्याओं की जड़ जनसंख्या विस्फोट है। याचिका में कहा गया है कि जनसंख्या विस्फोट के कारण स्वच्छ हवा व पेयजल का अधिकार, स्वास्थ्य का अधिकार, शिक्ष का अधिकार सहित अन्य अधिकार प्रभावित हो रहे हैं।
विज्ञापन
इसके साथ ही, इस याचिका में महिलाओं के खिलाफ होने वाले अपराधों में बढ़ोतरी के लिए भी जनसंख्या विस्फोट को जिम्मेदार बताया गया है। उल्लेखनीय है कि इससे पहले सुप्रीम कोर्ट की ओर से भाजपा नेता व वकील अश्विनी कुमार उपाध्याय की ओर से दायर इस तरह की याचिका पर नोटिस जारी किया जा चुका है।