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वित्त मंत्रालय से शिकायत है तो 72 घंटे में मिलेगी समाधान की जानकारी, पेंशनरों को होगा खास फायदा
Tue, 19 Jan 2021 05:28 PM IST
Harendra Chaudhary
डिजिटल ब्यूरो, अमर उजाला, नई दिल्ली
डिजिटल ब्यूरो, अमर उजाला, नई दिल्ली
Published by: Harendra Chaudhary
Updated Tue, 19 Jan 2021 05:28 PM IST
सार
कोई भी शिकायत हो, उसका हल तीस दिन के भीतर होगा। अगर विभाग को लगता है कि फलां व्यक्ति की शिकायत का समाधान करने में ज्यादा वक्त लगेगा, तो इस बारे में शिकायकर्ता को सूचित करना होगा...
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Ministry of Finance
- फोटो : Amar Ujala (File)
विस्तार
वित्त मंत्रालय ने शिकायतों का निपटारा करने के लिए एक त्वरित प्रणाली शुरू की है। इसमें हर तरह की शिकायत का समाधान और उस प्रक्रिया के पूरा होने में कितना समय लगेगा, ये सब बातें शामिल रहेंगी। महालेखा नियंत्रक कार्यालय द्वारा तैयार की गई इस नई व्यवस्था के तहत हर शाखा में शिकायतों की सुनवाई करने के लिए मानक संचालन प्रक्रिया (एसओपी) अपनाई जाएगी। कोई शिकायत आती है तो संबंधित व्यक्ति को 72 घंटे के भीतर उसके समाधान की जानकारी दी जाएगी। केंद्र सरकार के 65 लाख पेंशनरों को इस नई व्यवस्था का खास फायदा होगा।
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इस नई व्यवस्था के विभिन्न आयामों के बीच समन्वय बनाए रखने की जिम्मेदारी महालेखा नियंत्रक कार्यालय ‘सीजीए’ को सौंपी गई है। यानी महालेखा नियंत्रक कार्यालय एक नोडल एजेंसी के तौर पर काम करेगा। ज्वाइंट सीजीए को लोक शिकायत अफसर बनाया गया है। सभी तरह की शिकायतें सबसे पहले महालेखा नियंत्रक के पास आएंगी। वहां से उन्हें संबंधित शाखा में भेजा जाएगा। शिकायतकर्ता को तीन दिन के भीतर जवाब दिया जाएगा। इसे अंतरिम जवाब रिसिप्ट कहा जाता है।
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कोई भी शिकायत हो, उसका हल तीस दिन के भीतर होगा। अगर विभाग को लगता है कि फलां व्यक्ति की शिकायत का समाधान करने में ज्यादा वक्त लगेगा, तो इस बारे में शिकायकर्ता को सूचित करना होगा। इसके अलावा शिकायतकर्ता को यह भी बताना होगा कि इस देरी की वजह क्या है। कोई भी शिकायत अस्वीकार नहीं की जाएगी, भले ही वह स्वतंत्र तौर पर डिप्टी सीजीए या ज्वाइंट सीजीए के पास लंबित हो।
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शिकायत को तालमेल शाखा से किस विभाग के पास भेजा जाए, यह प्रक्रिया दो दिन में पूरी करनी पड़ेगी। संबंधित शाखा से जवाब आने के लिए पांच दिन का समय तय किया गया है। यदि किसी विभाग को लगता है कि यह उसके दायरे का मामला नहीं है, तो उसे तुरंत इस बारे में सूचित करना होगा। संबंधित अथॉरिटी की स्वीकृति के बाद कोर्डिनेशन शाखा दो दिन के भीतर शिकायतकर्ता को अंतरिम जवाब भेजेगी। यदि किसी भी श्रेणी यानी ए, बी और सी आदि के तहत मंत्रालय या विभाग की ओर से उत्तर नहीं मिलता है, तो उसके लिए भी नए नियम बनाए गए हैं।
यदि किसी मंत्रालय द्वारा समन्वय शाखा के पास जवाब भेजने में देरी की जाती है, तो यह मामला एसीजीए और डिप्टी सीजीए द्वारा हल किया जाएगा। यह प्रक्रिया रिमाइंडर-1 भेजने के बाद शुरू होगी। हालांकि इसमें यह प्रयास रहेगा कि वह मामला उसी समयावधि में निपट जाए, जो उसके निवारण के लिए तय की गई है। इसके बाद भी कोई जवाब नहीं मिलता है तो रिमाइंडर-2 भेजा जाएगा। इसके तहत ज्वाइंट सीजीए की तरफ से डीओ भेजा जाएगा। यह प्रक्रिया रिमाइंडर-1 भेजने की तारीख से तीन दिन के भीतर पूरी करनी होगी।