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Odisha: ओडिशा के शख्स को पुराने सिक्के नहीं बल्कि यह चीज इकट्ठा करने का है शौक, जानकर रहे जाएंगे दंग

Sat, 04 Nov 2023 11:30 AM IST
काव्या मिश्रा न्यूज डेस्क, अमर उजाला, भुवनेश्वर
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, भुवनेश्वर Published by: काव्या मिश्रा Updated Sat, 04 Nov 2023 11:30 AM IST
सार

नयागढ़ के रहने वाले दास का कहना है कि वह 1992 में रेनॉल्ड्स पेन से लिखते थे। अब तीन दशक बाद उनके पास पांच हजार रुपये और उससे अधिक कीमत के पेन हैं। 

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Pen Man of Odisha tushar kant das has about four thousand pens in his unique library
तुषार कांत दास अपने इकट्ठे किए गए पेनों को दिखाते। - फोटो : एएनआई

विस्तार

आपने कई बार सुना होगा कि कोई व्यक्ति है, जो पुराने सिक्के रखने का शौकिन है तो कोई किसी अन्य चीज का। लेकिन अब हम आपको एक ऐसे शख्स के बारे में बताने जा रहे हैं, जिसे जानकर आप थोड़े हैरान रह जाएंगे। दरअसल, ओडिशा के रहने वाले तुषार कांत दास को पेन इकट्ठा करने का शौक है। वह जब दसवीं कक्षा में थे, तभी से उन्होंने पेन का कलेक्शन करना शुरू कर दिया था।

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पेन मैन ऑफ ओडिशा का खिताब
अब तीन दशक बाद 47 साल के दास के पास पेन की एक छोटी लाइब्रेरी है। इतना ही नहीं, उनके इस शौक ने उन्हें पेन मैन ऑफ ओडिशा का खिताब भी दिलाया है। तुषार कांत दास की लाइब्रेरी में रेनॉल्ड्स से लेकर हाई एंड वाटरमैन तक हर ब्रांड के करीब चार हजार पेन हैं।
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1992 में रेनॉल्ड्स पेन से लिखते थे
नयागढ़ के रहने वाले दास का कहना है कि वह 1992 में रेनॉल्ड्स पेन से लिखते थे। अब तीन दशक बाद उनके पास पांच हजार रुपये और उससे अधिक कीमत के पेन हैं। बता दें, दास की लाइब्रेरी में रखे पेन कोई मामूली नहीं हैं। उनमें सोने की परत वाले, हीरे लगे हुए पेन भी मौजूद हैं। इतना ही नहीं, जर्मनी, अमेरिका और अन्य देशों से आए हुए पेन भी शामिल हैं। 

दोस्तों से पेन इकट्ठा...
ओडिशा के शख्स ने बताया कि पेन के प्रति उनका प्यार पारकर पेन से शुरू हुआ था। जब वह 10वीं कक्षा में पढ़ रहे थे, तभी उन्होंने अपने दोस्तों से पेन इकट्ठा करना शुरू कर दिया था। शुरुआती समय में वह रेनॉल्ड्स पेन से लिखते थे, जो 1992 से 2005 तक बहुत लोकप्रिय रहे थे। 



4000 से अधिक पेन 
दास ने कहा कि वह अलग-अलग पेन से लिखते थे। इस वजह से वह पेन प्रेमी बन गए। उन्होंने कहा कि उनके पास क्रॉस, ओलिवर, वॉटरमैन जैसे विभिन्न ब्रांडों के 4000 से अधिक पेन हैं। यह पेन अमेरिका, जापान और जर्मनी जैसे कई देशों से मंगाए गए हैं, जिनकी शुरुआती कीमत पांच रुपये से लेकर 5000 रुपये से अधिक है। उन्होंने बताया कि उनके पास कुछ ऐसे भी पेन हैं, जो सोने की परत वाले और बहुत महंगे हैं।


अब यह है लक्ष्य
उन्होंने कहा, ‘जब भी कोई रिश्तेदार कहीं जाता है तो मैं पेन मंगा लेता हूं। पेनों को मैं अपने बच्चों की तरह रखता हूं।’  बता दें, दास का फाउंटेन पेन डे तक दस हजार पेन इकट्ठा करने का लक्ष्य हैं। बता दें, फाउंटेन पेन डे हर साल नवंबर के पहले शुक्रवार को मनाया जाता है।


 

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