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Pegasus case : थरूर की अध्यक्षता वाली संसदीय समिति में कोरम का अभाव, नहीं हो सकी बैठक

Wed, 28 Jul 2021 06:25 PM IST
सुरेंद्र जोशी एएनआई, नई दिल्ली
एएनआई, नई दिल्ली Published by: सुरेंद्र जोशी Updated Wed, 28 Jul 2021 06:25 PM IST
सार

कांग्रेस नेता थरूर की अध्यक्षता वाली संसदीय समिति की बुधवार को आयोजित बैठक में  नौ भाजपा सांसद ही पहुंचे, जबकि बैठक के लिए 10 का कोरम जरूरी था। बैठक में मंत्रालय के अधिकारी भी नहीं पहुंचे।

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Pegasus case: Parliamentary Standing Committee meeting not held in absence of quorum
पेगासस जासूसी मामला: अफसरों से जवाब तलब करने वाली थी संसदीस समिति

विस्तार

कोरम के अभाव में कांग्रेस नेता शशि थरूर की अध्यक्षता वाली सूचना प्रौद्योगिकी मंत्रालय की संसदीय समिति की बैठक बुधवार को नहीं हो सकी। यह समिति पेगासस जासूसी मामले को लेकर मंत्रालय के अधिकारियों से जवाब तलब करने वाली थी। बैठक के लिए आवश्यक संख्या में समिति के सदस्य और मंत्रालयों के अधिकारी नहीं पहुंचे।

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सूत्रों ने समाचार एजेंसी एएनआई को बताया कि शशि थरूर की अध्यक्षता वाली यह कमेटी पेगासस जासूसी मामले पर विचार करने वाली थी, लेकिन गृह मंत्रालय के अधिकारी नहीं पहुंचे। समिति ने गृह और सूचना प्रौद्योगिकी मंत्रालय के अधिकारियों को इस बैठक के लिए तलब किया था। सूत्रों ने बताया कि बैठक में सिर्फ नौ भाजपा सांसद शामिल हुए, लेकिन कोरम पूरा नहीं हो सका। बैठक शुरू करने के लिए कम से कम 10 सांसदों की उपस्थिति जरूरी थी। 
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बुधवार को बुलाई गई संसदीय समिति की बैठक का एजेंडा 'नागरिक डाटा सुरक्षा एवं निजता' था। इस समिति में अधिकतर सदस्य सत्तारूढ़ भाजपा से हैं। समिति ने इलेक्ट्रॉनिक्स, सूचना प्रौद्योगिकी एवं गृह मंत्रालय के अधिकारियों को बुलाया था।
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समिति ने मंगलवार को सिनेमेटोग्राफ (संशोधन) विधेयक-2021 के प्रारूप पर विचार किया था। इसके प्रावधानों पर समिति के सदस्यों के विचार सुने थे। इसमें अभिनेता से नेता बने कमल हसन ने भी अपनी राय रखी। मंगलवार को हुई बैठक के एजेंडे में उक्त विधेयक के संदर्भ में केंद्रीय फिल्म प्रमाणन बोर्ड (सीबीएफसी) के कामकाज की समीक्षा करना था। 


थरूर ने ट्वीट कर यह कहा था
इससे पहले मामले में कांग्रेस सांसद शशि थरूर ने ट्वीट कर कहा था कि पेगासस मामला एक गंभीर राष्ट्रीय सुरक्षा की चिंता है और सरकार को इस पर अपना स्पष्टीकरण देना चाहिए। थरूर ने कहा, यह साफ हो चुका है कि भारत में फोन की जांच दरअसल पेगासस की घुसपैठ थी। उन्होंने कहा था कि यह उत्पाद केवल सरकारों को ही बेची जाती है, तो सवाल उठता है कि किस सरकार को बेचा गया। यदि भारत सरकार कहती है कि उसने नहीं किया, तो किसी और सरकार ने किया। तब तो यह राष्ट्रीय सुरक्षा का और भी गंभीर मामला है।


मंत्री वैष्णव ने जासूसी की खबरों का किया था खारिज
सूचना प्रौद्योगिकी और संचार मंत्री अश्विनी वैष्णव ने पेगासस सॉफ्टवेयर के जरिये भारतीयों की जासूसी करने संबंधी खबरों को सोमवार को सिरे से खारिज करते हुए कहा था कि संसद के मॉनसून सत्र से ठीक पहले लगाये गए ये आरोप भारतीय लोकतंत्र की छवि को धूमिल करने का प्रयास हैं। लोकसभा में स्वत: संज्ञान के आधार पर दिए गए अपने बयान में वैष्णव ने कहा था कि जब देश में नियंत्रण एवं निगरानी की व्यवस्था पहले से है तब अनधिकृत व्यक्ति द्वारा अवैध तरीके से निगरानी संभव नहीं है।

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