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Patparganj Chunav Result 2025 Live: पटपड़गंज में रवीन्द्र नेगी से हारे अवध ओझा; 25 हजार वोट से जीती भाजपा

Sat, 08 Feb 2025 02:16 PM IST
अभिषेक दीक्षित न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली Published by: अभिषेक दीक्षित Updated Sat, 08 Feb 2025 02:16 PM IST
सार

दिल्ली विधानसभा चुनाव के लिए शनिवार को जारी मतगणना के आए रुझानों से अब लगभग साफ हो गया है कि भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) 27 साल बाद दिल्ली की सत्ता में वापसी करने जा रही है। अरविंद केजरीवाल और मनीष सिसोदिया सहित सत्तारूढ़ दल के कई अन्य प्रमुख नेता चुनाव हार गए हैं।

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Patparganj Assembly Election Result 2025 Live: AAP vs BJP Awadh Ojha vs Ravindra Singh Negi Know all about it
दिल्ली विधानसभा चुनाव परिणाम 2025 - फोटो : अमर उजाला

विस्तार

दिल्ली की पटपड़गंज विधानसभा सीट से भाजपा ने जीत दर्ज की है। यहां से भाजपा उम्मीदवार रवीन्द्र सिंह नेगी ने आम आदमी पार्टी के अवध ओझा को 28072 वोट से हरा दिया है। दरअसल, पटपड़गंज विधानसभा सीट दिल्ली की चर्चित विधानसभा सीटों में से एक थी। पिछली बार इस सीट से दिल्ली के पूर्व उप-मुख्यमंत्री मनीष सिसोदिया विधायक चुनकर विधानसभा पहुंचे थे। हालांकि, इस सीट से लगातार तीन बार जीतने वाले सिसोदिया पटपड़गंज की जगह जंगपुरा विधानसभा सीट से चुनाव मैदान में हैं। सिसोदिया की जगह आम आदमी पार्टी ने अवध ओझा को चुनावी मैदान में उतारा था। भाजपा ने यहां से एक बार फिर रवीन्द्र सिंह नेगी को टिकट दिया है। 2008 के विधानसभा चुनाव में यहां से विधायक रह चुके अनिल कुमार एक बार फिर कांग्रेस के टिकट पर मैदान में था।

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पटपड़गंज सीट पर भाजपा के अवध ओझा हार गए हैं। भाजपा के रवींद्र सिंह नेगी ने यहां जीत दर्ज की है। हारने के बाद पटपड़गंज विधानसभा सीट से आप उम्मीदवार अवध ओझा ने कहा, "मैं जनता का शुक्रिया अदा करता हूं। मैं दूसरे स्थान पर आया, अगली बार खुद को शीर्ष पर लाने की कोशिश करूंगा। चूक यह हुई कि मैं सभी से मिल नहीं पाया, शायद मुझे इसके लिए अच्छा समय नहीं मिला, लेकिन फिर भी मैं इस हार की व्यक्तिगत जिम्मेदारी लेता हूं।"
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पटपड़गंज विधानसभा सीट से भाजपा उम्मीदवार रविंदर सिंह नेगी ने कहा, "मेरे लिए यह सौभाग्य की बात है कि हमने दिल्ली में प्रधानमंत्री मोदी के चेहरे पर चुनाव लड़ा। यह उनका आशीर्वाद था, जिस तरह से उन्होंने आम आदमी पार्टी को आपदा कहा, उन्होंने कहा आपदा हटाओ, दिल्ली बचाओ। लोगों ने इसे स्वीकार भी किया। शीर्ष नेतृत्व के नेतृत्व में हमें जीत मिली है, मैं सभी का आभार व्यक्त करता हूं।"
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सबसे पहले यह जानते हैं कि आखिर दिल्ली के विधानसभा कैसे मिली?
इसकी कहानी 1952 से शुरू हुई। 1952 पार्ट-सी राज्य के रूप में दिल्ली को एक विधानसभा दी गई। 1956 में उस विधानसभा को भंग कर दिया गया। 1966 में दिल्ली को एक महानगर परिषद दी गई। दिल्ली राज्य विधान सभा 17 मार्च, 1952 को पार्ट-सी राज्य सरकार अधिनियम, 1951 के तहत अस्तित्व में आई। 1952 की विधानसभा में 48 सदस्य थे। मुख्य आयुक्त को उनके कार्यों के निष्पादन में सहायता और सलाह देने के लिए एक मंत्रिपरिषद का प्रावधान था, जिसके संबंध में राज्य विधानसभा को कानून बनाने की शक्ति दी गई थी। 

राज्य पुनर्गठन आयोग (1955) की सिफारिशों के बाद, दिल्ली 1 नवंबर, 1956 से भाग-सी राज्य नहीं रही। दिल्ली विधानसभा और मंत्रिपरिषद को समाप्त कर दिया गया और दिल्ली राष्ट्रपति के प्रत्यक्ष प्रशासन के तहत केंद्र शासित प्रदेश बन गया। दिल्ली में एक लोकतांत्रिक व्यवस्था और उत्तरदायी प्रशासन की मांग उठने लगी। जिसके बाद दिल्ली प्रशासन अधिनियम, 1966 के तहत महानगर परिषद बनाई गई। यह एक सदनीय लोकतांत्रिक निकाय था जिसमें 56 निर्वाचित सदस्य और 5 राष्ट्रपति द्वारा मनोनीत सदस्य होते थे।

महानगर परिषद की व्यवस्था में कई कमियां थी। जिसके बाद विधानसभा की मांग उठती थी। 24 दिसंबर, 1987 को भारत सरकार ने सरकारिया समिति (जिसे बाद में बालकृष्णन समिति कहा गया) नियुक्त की। समिति ने 14 दिसंबर, 1989 को अपनी रिपोर्ट पेश की और सिफारिश की कि दिल्ली को केंद्र शासित प्रदेश बना रहना चाहिए, लेकिन आम आदमी से जुड़े मामलों से निपटने के लिए अच्छी शक्तियों के साथ एक विधानसभा दी जानी चाहिए। बालाकृष्णन समिति की सिफारिश के अनुसार, संसद ने संविधान (69वां संशोधन) अधिनियम, 1991 पारित किया, जिसने संविधान में नए अनुच्छेद 239AA और 239AB डाले, जो अन्य बातों के साथ-साथ दिल्ली के लिए एक विधानसभा की व्यवस्था करते हैं। लोक व्यवस्था, पुलिस और भूमि के मुद्दों पर विधानसभी को कानून बनाने का अधिकार नहीं था। 

1993 में पहली बार भाजपा को जीत
1993 में पहली बार पटपड़गंज विधानसभा सीट पर चुनाव हुआ। इस साल कुल 9 उम्मीदवार चुनावी मैदान में थे, इनमें से एक महिला उम्मीदवार भी थी। इन चुनावों में भाजपा के ज्ञान चंद ने जीत दर्ज की थई। उन्हें कुल 17020 वोट मिले थे। ज्ञान चंद ने जनता दल के अमरीश सिंह गौतम को 2,147 वोट से हराया। दूसरे नंबर पर रहे अमरीश सिंह गौतम को 14,873 वोट मिले थे। तीसरे नंबर पर कांग्रेस के रामे को 14065 वोट मिले थे। इन तीन के अलावा अन्य सभी उम्मीदवारों की जमानत जब्त हो गई थी। उस वक्त पटपड़गंज विधानसभा सीट अनुसूचित जाति के लिए आरक्षित हुआ करती थी।

1998 में कांग्रेस को मिली जीत
1998 के विधानसभा चुनाव में पटपड़गंज सुरक्षित सीट से कुल 12 उम्मीदवार चुनावी मैदान में उतरे थे। इनमें से 2 महिलाएं भी शामिल थीं। इन चुनावों में कांग्रेस के अमरीश सिंह गौतम ने जीत दर्ज की थी। गौतम को कुल 33,351 वोट मिले थे। अमरीश सिंह गौतम 1993 में इस सीट से जनता दल के उम्मीदवार थे। 1998 में उन्होंने कांग्रेस के टिकट पर चुनाव लड़ा और जीते। गौतम ने भाजपा के गंगा राम पीपल को मात दी थी। गंगा राम पीपल 17,030 वोटों के साथ दूसरे नंबर पर रहे थे।  इन दोनों के अलावा बाकी सभी उम्मीदवारों की जमानत जब्त हो गई थी। 

2003: कांग्रेस का कब्जा बरकरार
2003 में भी इस सीट पर 1998 वाले नतीजे ही दोहराए गए थे। अमरीश सिंह गौतम ही एक बार फिर कांग्रेस के टिकट पर इस सीट पर जीतने में सफल रहे थे। 2003 के विधानसभा चुनाव में एक महिला उम्मीदवार समेत कुल आठ उम्मीदवार मैदान में उतरे थे। कांग्रेस के अमरीश सिंह गौतम ने भाजपा के ज्ञान चंद को शिकस्त दी। अमरीश सिंह गौतम को कुल 36930 वोट मिले। वहीं, भाजपा उम्मीदवार ज्ञान चंद को 18,932 वोट से संतोष करना पड़ा। बीएसपी के धनी राम शंखवार 11,322 वोटों के साथ तीसरे नंबर पर रहे। 

2008 में केवल 663 वोट से जीती कांग्रेस 
2008 में हुए परिसीमन के बाद पटपड़गंज विधानसभा सीट एक नए रूप में सामने आई। अब तक अनुसूचित जाति के लिए सुरक्षित इस सीट को सामान्य कर दिया गया। इस चुनाव में पटपड़गंज सीट पर कांग्रेस और भाजपा के बीच कांटे की टक्कर हुई। कांग्रेस ने यहां जीत की हैट्रिक जरूर लगाई, लेकिन जीत का अंतर घटकर महज 663 वोट का रह गया। यहां से कांग्रेस ने अनिल कुमार को टिकट दिया था। कांग्रेस के अनिल कुमार ने भाजपा के नकुल भारद्वाज को मात दी। अनिल कुमार को 36,999 वोट मिले। वहीं भाजपा के नकुल भारद्वाज को 36,336 वोट मिले। 2008 में पटपड़गंज विधानसभा सीट पर कुल 10 उम्मीदवार मैदान में थे, जिसमें से दो महिलाएं भी शामिल थीं। कांग्रेस और भाजपा उम्मीदवारों को छोड़कर अन्य सभी की जमानत जब्त हो गई। 

2013: मनीष सिसोदिया जीते
2013 में दिल्ली चुनावों में आम आदमी पार्टी ने पहली बार शिरकत की। पहली बार चुनावी राजनीति में उतरी आम आदमी पार्टी को इस चुनाव में कुल 28 सीटों पर जीत दर्ज की। इन 28 सीटों में पटपड़गंज विधानसभा सीट भी शामिल थी। यहां से आप के मनीष सिसोदिया ने जीत दर्ज की। मनीष सिसोदिया को 50,211 वोट मिले। दूसरे नंबर पर भाजपा के नकुल भारद्वाज रहे। भारद्वाज को 38,735 वोट मिले। तीसरे नंबर पर कांग्रेस के अनिल कुमार रहे। अनिल कुमार को 28,067 वोट मिले। 

2015 मनीष सिसोदिया फिर चुने गए
2015 के विधानसभा चुनाव में दिल्ली की 70 में से 67 सीटों पर आम आदमी पार्टी को जीत मिली। इस प्रचंड जीत में पटपड़गंज विधानसभा सीट भी शामिल थी। यहां से आप के मनीष सिसोदिया ने लगातार दूसरी बार जीत दर्ज की। मनीष सिसोदिया के लिए 2015 की जीत 2013 से भी बड़ी थी। इस बार मनीष सिसोदिया ने 75,243 वोट मिले। उन्होंने भाजपा के विनोद कुमार बिन्नी को हराया। बिन्नी 2013 में आम आदमी पार्टी के टिकट पर लक्ष्मीनगर विधानसभा सीट से जीते थे। हालांकि, बाद में उन्होंने आप छोड़कर भाजपा का दामन थाम लिया। भाजपा ने उन्हें पटपड़गंज से मनीष सिसोदिया के खिलाफ उतारा। हालांकि, बिन्नी इस बार जीत दर्ज नहीं कर सके। उन्हें 46,452 वोट मिले। तीसरे नंबर पर कांग्रेस के अनिल कुमार रहे। उन्हें 16,177 वोट मिले थे। अनिल कुमार अपनी जमानत भी नहीं बचा सके। अनिल कुमार समेत पांच उम्मीदवारों की जमानत जब्त हो गई।

2020: मनीष सिसोदिया ने लगाई जीत की हैट्रिक
2020 के विधानसभा चुनाव में पटपड़गंज सीट पर मनीष सिसोदिया को बहुत मुश्किल से जीत मिली। इस बार उन्हें 70,163 वोट मिले। हालांकि, जीत का अंतर 2015 के मुकाबले काफी कम रहा। सिसोदिया केवल 3,207 वोटों के अंतर से जीत सके। मतगणना के दौरान कई राउंड तक सिसोदिया पीछे चलते रहे। भाजपा के रविंद्र सिंह नेगी से उन्हें तगड़ी टक्कर मिली। रवींद्र नेगी को 66,956 वोट मिले। 

अबकी बार कैसे हैं समीकरण
2025 के चुनावों के लिए पटपड़गंज सीट से आम आदमी पार्टी ने मनीष सिसोदिया का जगह अवध ओझा को टिकट दिया है। अवध ओझा हाल ही में पार्टी में शामिल हुए हैं। अवध ओझा सिविल सर्विस के छात्रों को रोचक ढंग से पढ़ाने के लिए काफी लोकप्रिय रहे हैं। 

भाजपा ने यहां से एक बार फिर रवीन्द्र सिंह नेगी को टिकट दिया है। नेगी ने 2020 के विधानसभा चुनाव में मनीष सिसोदिया को कड़ी टक्कर दी थी। इसलिए पार्टी ने एक बार फिर उन पर विश्वास जताया है। वे विनोद नगर वार्ड-198 से निगम पार्षद भी रह चुके हैं। 2008 के विधानसभा चुनाव में यहां से विधायक रह चुके अनिल कुमार एक बार फिर कांग्रेस के टिकट पर मैदान में हैं।

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