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पितृत्व जांच: निजता से ऊपर सत्य की खोज, हो सकता है DNA टेस्ट; शीर्ष कोर्ट ने कहा- निजता का अधिकार असीमित नहीं

Mon, 01 Jun 2026 06:59 AM IST
Pavan राजीव सिन्हा, अमर उजाला, नई दिल्ली
राजीव सिन्हा, अमर उजाला, नई दिल्ली Published by: Pavan Updated Mon, 01 Jun 2026 06:59 AM IST
सार

सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि पितृत्व विवादों में सत्य की खोज के लिए आवश्यक होने पर डीएनए जांच कराई जा सकती है और निजता का अधिकार पूर्ण नहीं है। अदालत ने अमर के पितृत्व दावे की जांच के लिए डीएनए परीक्षण का आदेश बरकरार रखते हुए चतुर्भुज प्रधान की अपील खारिज कर दी।

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Paternity Testing: Finding Truth Above Privacy, DNA Testing Possible; SC Says Right to Privacy isn't Unlimited
सुप्रीम कोर्ट - फोटो : अमर उजाला ग्राफिक्स

विस्तार

'सत्य की खोज’ को निजता से ऊपर करार देते हुए सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि पितृत्व से जुड़े विवादों में अदालतें डीएनए जांच का आदेश दे सकती हैं, बशर्ते मामले के निपटारे के लिए यह आवश्यक हो और उपलब्ध अन्य साक्ष्य विवाद का निर्णायक समाधान देने में सक्षम न हों। शीर्ष अदालत ने यह भी कहा कि निजता का अधिकार महत्वपूर्ण है, लेकिन यह पूर्ण या असीमित अधिकार नहीं है। 
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ट्रायल कोर्ट और छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट का आदेश बरकरार
जस्टिस संजय करोल और जस्टिस एन कोटिश्वर सिंह की पीठ ने ट्रायल कोर्ट और छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट के उस आदेश को बरकरार रखा है, जिसमें अमर नामक व्यक्ति की पितृत्व संबंधी दावे की जांच के लिए डीएनए परीक्षण कराने का निर्देश दिया गया था। अमर ने दावा किया है कि वह चतुर्भुज प्रधान का पुत्र है और इसी आधार पर उसने स्वयं को उनका वैध पुत्र घोषित करने व संपत्ति में एक-तिहाई हिस्सेदारी देने की मांग करते हुए दीवानी मुकदमा दायर किया है। मामले के मुताबिक, अमर का जन्म 10 सितंबर 1999 को हुआ था। उसकी मां का कहना है कि जनवरी 1999 में चतुर्भुज प्रधान के साथ सहमति से बने संबंधों के कारण अमर का जन्म हुआ।
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पितृत्व का प्रश्न सीधे विवाद का केंद्र, अन्य साक्ष्य नहीं
सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि इस मामले में पितृत्व का प्रश्न सीधे तौर पर विवाद का केंद्र है और रिकॉर्ड पर ऐसा कोई अन्य साक्ष्य उपलब्ध नहीं है जो इस मुद्दे का निश्चित समाधान कर सके। अदालत ने यह भी माना कि पूर्व में चली भरणपोषण की कार्यवाहियां संक्षिप्त प्रकृति की थीं और उन्हें अंतिम निर्णय नहीं माना जा सकता। पीठ ने अपने फैसले में कहा कि निजता का अधिकार महत्वपूर्ण है, लेकिन यह पूर्ण या असीमित अधिकार नहीं है।

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अमर के पिता चतुर्भुज प्रधान की अपील खारिज
सुप्रीम कोर्ट ने चतुर्भुज प्रधान की अपील खारिज करते हुए ट्रायल कोर्ट को डीएनए जांच की तिथि निर्धारित करने और उसकी रिपोर्ट के आधार पर मुकदमे की आगे की सुनवाई करने का निर्देश दिया। अदालत ने माना कि इस मामले में न्याय और सत्य की खोज के लिए डीएनए परीक्षण आवश्यक है।
 
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