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Supreme Court: पतंजलि के भ्रामक विज्ञापन मामले में कोर्ट ने सुरक्षित रखा फैसला, हलफनामा दाखिल करने का दिया समय
Tue, 14 May 2024 01:06 PM IST
नितिन गौतम
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
Published by: नितिन गौतम
Updated Tue, 14 May 2024 01:06 PM IST
सार
सुप्रीम कोर्ट ने पतंजलि को हलफनामा दाखिल करने के लिए समय भी दिया है। इस हलफनामे में पतंजलि को यह बताना है कि उसने भ्रामक विज्ञापनों और उन दवाओं को वापस लेने के लिए क्या कदम उठाए हैं, जिनके लाइसेंस निलंबित कर दिए गए हैं।
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सुप्रीम कोर्ट
- फोटो : ANI
विस्तार
पतंजलि के भ्रामक विज्ञापन मामले में सुप्रीम कोर्ट ने अवमानना याचिका पर अपना फैसला सुरक्षित रख लिया है। सुप्रीम कोर्ट ने बाबा रामदेव और आचार्य बालकृष्ण को व्यक्तिगत पेशी से छूट दे दी है। सुप्रीम कोर्ट ने पतंजलि को हलफनामा दाखिल करने के लिए समय भी दिया है। इस हलफनामे में पतंजलि को यह बताना है कि उसने भ्रामक विज्ञापनों और उन दवाओं को वापस लेने के लिए क्या कदम उठाए हैं, जिनके लाइसेंस निलंबित कर दिए गए हैं।
भ्रामक विज्ञापन पर सेलिब्रिटी के खिलाफ भी होगी कार्रवाई
जस्टिस हिमा कोहली और जस्टिस अहसानुद्दीन अमानुल्लाह की पीठ ने बीती 7 मई को इंडियन मेडिकल एसोसिएशन (आईएमए) की याचिका पर सुनवाई करते हुए कहा कि अगर लोगों को प्रभावित करने वाले किसी प्रोडक्ट या सर्विस का विज्ञापन भ्रामक पाया जाता है तो इसके लिए सेलिब्रिटीज और सोशल मीडिया इंफ्लुएंसर्स को भी समान रूप से जिम्मेदार ठहराया जाए। आईएमए ने अपनी याचिका में कहा है कि पतंजलि ने कोविड वैक्सीनेशन और एलोपैथी के खिलाफ नकारात्मक प्रचार किया। याचिका पर सुनवाई के दौरान कोर्ट ने कहा पतंजलि भ्रामक दावे करके देश को धोखा दे रही है कि उसकी दवाएं कुछ बीमारियों को ठीक कर देंगी, जबकि इसका कोई ठोस प्रमाण नहीं है। हालांकि कोर्ट के आदेश बावजूद पतंजलि की तरफ से प्रिंट मीडिया में कथित भ्रामक विज्ञापन प्रकाशित कराए गए। इस पर 3 जनवरी 2024 को हुई सुनवाई में सुप्रीम कोर्ट ने पतंजलि के खिलाफ अवमानना की कार्यवाही करने को लेकर बाबा रामदेव और आचार्य बालकृष्ण को नोटिस जारी किया।
कोर्ट ने पतंजलि को अखबारों में माफीनामा प्रकाशित करने का दिया था निर्देश
अवमानना नोटिस जारी करने के बावजूद बाबा रामदेव और आचार्य बालकृष्ण की तरफ से जवाब नहीं दिया गया। इस पर कोर्ट ने दोनों को सुनवाई के दौरान व्यक्तिगत रूप से पेश होने का निर्देश दिया। बाबा रामदेव और आचार्य बालकृष्ण ने माफीनामा जारी किया, लेकिन कोर्ट ने माफीनामा खारिज कर दिया। 6 अप्रैल 2024 को कोर्ट ने अखबारों में माफीनामा प्रकाशित करने का निर्देश दिया। 7 अप्रैल को सुप्रीम कोर्ट ने पतंजलि को असली माफीनामे की जगह ई-फाइलिंग करने पर भी फटकार लगाई। इस मामले में 23 अप्रैल को हुई सुनवाई में सुप्रीम कोर्ट ने अपनी टिप्पणी में कहा कि आईएमए के डॉक्टरों को भी विचार करने को कहा, जो अक्सर महंगी और गैर-जरूरी दवाई लिख देते हैं। कोर्ट ने कहा था कि अगर आप एक उंगली किसी की तरफ उठाते हैं तो चार उंगलियां आपकी और भी उठेंगी। सुप्रीम कोर्ट की इस टिप्पणी को आईएमए के अध्यक्ष डॉ. आरवी अशोकन ने दुर्भाग्यपूर्ण बताया था। जिस पर कोर्ट ने आपत्ति जताते हुए उन्हें नोटिस जारी कर जवाब मांगा है।
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भ्रामक विज्ञापन पर सेलिब्रिटी के खिलाफ भी होगी कार्रवाई
जस्टिस हिमा कोहली और जस्टिस अहसानुद्दीन अमानुल्लाह की पीठ ने बीती 7 मई को इंडियन मेडिकल एसोसिएशन (आईएमए) की याचिका पर सुनवाई करते हुए कहा कि अगर लोगों को प्रभावित करने वाले किसी प्रोडक्ट या सर्विस का विज्ञापन भ्रामक पाया जाता है तो इसके लिए सेलिब्रिटीज और सोशल मीडिया इंफ्लुएंसर्स को भी समान रूप से जिम्मेदार ठहराया जाए। आईएमए ने अपनी याचिका में कहा है कि पतंजलि ने कोविड वैक्सीनेशन और एलोपैथी के खिलाफ नकारात्मक प्रचार किया। याचिका पर सुनवाई के दौरान कोर्ट ने कहा पतंजलि भ्रामक दावे करके देश को धोखा दे रही है कि उसकी दवाएं कुछ बीमारियों को ठीक कर देंगी, जबकि इसका कोई ठोस प्रमाण नहीं है। हालांकि कोर्ट के आदेश बावजूद पतंजलि की तरफ से प्रिंट मीडिया में कथित भ्रामक विज्ञापन प्रकाशित कराए गए। इस पर 3 जनवरी 2024 को हुई सुनवाई में सुप्रीम कोर्ट ने पतंजलि के खिलाफ अवमानना की कार्यवाही करने को लेकर बाबा रामदेव और आचार्य बालकृष्ण को नोटिस जारी किया।
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Patanjali misleading ads: Supreme Court exempts Yog guru Baba Ramdev and Acharya Balkrishna from personal appearance in the case.
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Supreme Court reserves its order on a contempt plea against Ramdev, Balkrishna and others. https://t.co/yroSAXzGHu — ANI (@ANI) May 14, 2024
कोर्ट ने पतंजलि को अखबारों में माफीनामा प्रकाशित करने का दिया था निर्देश
अवमानना नोटिस जारी करने के बावजूद बाबा रामदेव और आचार्य बालकृष्ण की तरफ से जवाब नहीं दिया गया। इस पर कोर्ट ने दोनों को सुनवाई के दौरान व्यक्तिगत रूप से पेश होने का निर्देश दिया। बाबा रामदेव और आचार्य बालकृष्ण ने माफीनामा जारी किया, लेकिन कोर्ट ने माफीनामा खारिज कर दिया। 6 अप्रैल 2024 को कोर्ट ने अखबारों में माफीनामा प्रकाशित करने का निर्देश दिया। 7 अप्रैल को सुप्रीम कोर्ट ने पतंजलि को असली माफीनामे की जगह ई-फाइलिंग करने पर भी फटकार लगाई। इस मामले में 23 अप्रैल को हुई सुनवाई में सुप्रीम कोर्ट ने अपनी टिप्पणी में कहा कि आईएमए के डॉक्टरों को भी विचार करने को कहा, जो अक्सर महंगी और गैर-जरूरी दवाई लिख देते हैं। कोर्ट ने कहा था कि अगर आप एक उंगली किसी की तरफ उठाते हैं तो चार उंगलियां आपकी और भी उठेंगी। सुप्रीम कोर्ट की इस टिप्पणी को आईएमए के अध्यक्ष डॉ. आरवी अशोकन ने दुर्भाग्यपूर्ण बताया था। जिस पर कोर्ट ने आपत्ति जताते हुए उन्हें नोटिस जारी कर जवाब मांगा है।