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Railways: खराब खाने से यात्री परेशान, चार साल में रेलवे को मिली 19174 शिकायत; मंत्रालय ने लिया ये एक्शन

Tue, 29 Jul 2025 08:33 PM IST
अभिषेक दीक्षित डिजिटल ब्यूरो, अमर उजाला, नई दिल्ली
डिजिटल ब्यूरो, अमर उजाला, नई दिल्ली Published by: अभिषेक दीक्षित Updated Tue, 29 Jul 2025 08:33 PM IST
सार

सीपीआई(एम) के सांसद जॉन ब्रिटास ने ट्रेनों में खाने की क्वालिटी और कंपनियों को ठेके देने में पारदर्शिता से जुड़ा सवाल पूछा था। इस पर रेल मंत्रालय ने बताया कि कुल शिकायतों में से 2,995 मामलों में कैटरिंग ठेकेदार को चेतावनी दी गई।

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Passengers are upset with bad food, railways received 19174 complaints in four years Ministry took this action
लगातार आ रहीं शिकायतें। - फोटो : amar ujala

विस्तार

ट्रेनों में मिलने वाले खराब खाने की शिकायतों के मामले आए दिन बढ़ते जा रहे है। वर्ष 2024-25 के दौरान रेलवे प्रशासन को खाने-पीने की वस्तुओं की खराब क्वालिटी को लेकर 6,645 शिकायतें मिलीं। यह जानकारी पिछले दिनों रेल मंत्रालय ने राज्यसभा में दी है। एक लिखित जवाब में रेलवे मंत्रालय ने बताया कि, साल 2024-25 के दौरान जहां 6,645 शिकायतें मिलीं है। जबकि 1,341 मामलों में भोजन की सप्लाई करने वालों पर जुर्माना भी लगाया गया है। इसी तरह साल 2023-24 में 7,026 शिकायतें मिली थीं,जबकि 2022-23 में 4,421 शिकायतें आई थीं। साल 2021-22 में खाने की खराब क्वालिटी की 1,082 शिकायतें दर्ज की गई थीं।

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सीपीआई(एम) के सांसद जॉन ब्रिटास ने ट्रेनों में खाने की क्वालिटी और कंपनियों को ठेके देने में पारदर्शिता से जुड़ा सवाल पूछा था। इस पर रेल मंत्रालय ने बताया कि कुल शिकायतों में से 2,995 मामलों में कैटरिंग ठेकेदार को चेतावनी दी गई। 547 मामलों में उन्हें उचित सलाह दी गई और बाकी बचे 762 मामलों में दूसरे कदम उठाए गए। सांसद ने मंत्रालय से यह भी सवाल पूछा कि क्या रेलवे कैटरिंग ठेकेदारों से अनहाइजेनिक तरीके से तैयार भोजन को जब्त किया गया है? इस पर मंत्रालय ने बताया अगर खाने में मिलावट या अस्वच्छता पाई जाती है या यात्री शिकायत करते हैं, तो तुरंत कार्रवाई की जाती है। इसमें जुर्माना लगाना, अनुशासनात्मक कार्रवाई करना, काउंसलिंग करना और चेतावनी देना शामिल है।
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कैसे दिए जाते हैं खाने के ठेके?
राज्यसभा सांसद जॉन ब्रिटास ने सवाल उठाया कि क्या आईआरसीटीसी ने वंदे भारत और अन्य लंबी दूरी की ट्रेनों में खानपान सेवा देने के लिए एक ही कॉर्पोरेट समूह को अलग-अलग संबद्ध कंपनियों के माध्यम से ठेके दिए हैं? इस पर रेल मंत्रालय ने जवाब दिया कि आईआरसीटीसी सभी ट्रेनों के ऑनबोर्ड कैटरिंग सर्विसेज के लिए ओपन टेंडरिंग प्रक्रिया अपनाता है, जो पूरी तरह पारदर्शी होती है। वंदे भारत सहित सभी ट्रेनों के लिए सेवा प्रदाता कंपनियों का चयन सबसे अधिक बोली लगाने वालों के आधार पर किया जाता है। इसकी जानकारी आईआरसीटीसी की वेबसाइट पर पब्लिक डोमेन में मौजूद है। फिलहाल 20 कंपनियों को ट्रेन क्लस्टर्स के अनुबंध दिए गए हैं।
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क्वालिटी सुधारने के लिए रेलवे ने किया ये काम
मंत्रालय ने बताया कि आईआरसीटीसी और रेलवे ने ट्रेनों में मिलने वाले खाने की गुणवत्ता सुधारने के लिए कई बड़े कदम भी उठाए हैं, जिनमें शामिल हैं:

  • डिजाइन किए गए बेस किचन से खाना बनवाना और ट्रेनों तक पहुंचाना।
  • देशभर में आधुनिक तकनीक से लैस बेस किचन की स्थापना।
  • बेस किचन में CCTV कैमरे लगाना ताकि निगरानी बनी रहे।
  • ब्रांडेड और पॉपुलर रॉ मटेरियल का उपयोग सुनिश्चित करना।
  • हर बेस किचन में फूड सेफ्टी सुपरवाइजर की नियुक्ति करना।


रेलवे का कहना है कि इन सभी उपायों का उद्देश्य यही है कि यात्रियों को सुरक्षित, स्वादिष्ट और स्वास्थ्यवर्धक खाना मिले  ताकि ट्रेन का सफर केवल मंज़िल तक पहुंचने का जरिया न होकर एक अच्छा अनुभव भी बन सके। अगर किसी यात्री को ट्रेन में मिलने वाला खाना खराब लगे, तो आप सीधे आईआरसीटीसी का फीडबैक पोर्टल, मोबाइल ऐप या सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म्स के जरिए शिकायत दर्ज करा सकते हैं। शिकायत के बाद रेलवे की ओर से कार्रवाई की जाती है और शिकायतकर्ता को अपडेट भी मिलता है। 

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