Security Hazard: क्यों खतरनाक हैं ये 20 समुद्री प्वाइंट? देश में घुसने या बाहर भागने वालों के लिए चोर रास्ता
निरंतर एक्सेस के लिए सब्सक्राइब करें
अमर उजाला प्रीमियम लेख सिर्फ रजिस्टर्ड पाठकों के लिए ही उपलब्ध हैं
अमर उजाला प्रीमियम लेख सिर्फ सब्सक्राइब्ड पाठकों के लिए ही उपलब्ध हैं
विस्तार
देश की सुरक्षा के लिए 20 समुद्री रास्ते, बेहद जोखिम भरे हो सकते हैं। खासतौर से उन आतंकियों/उपद्रवियों की राह को ये सुरक्षा छिद्र, आसान बना देते हैं, जो गैर कानूनी तरीके से देश में घुसने या बाहर भागने की फिराक में रहते हैं। गृह मामलों की संसदीय स्थायी समिति की 242वीं रिपोर्ट में यह बात कही गई है। रिपोर्ट में लिखा है कि देश में 20 गैर अधिसूचित समुद्री आव्रजन चेक पोस्ट (आईसीपी), पासपोर्ट (ईओआई) अधिनियम 1920 के नियमों का उल्लंघन कर संचालित हो रही हैं। चूंकि ये पोस्ट अनियमित और अनचेक्ड हैं, इसलिए कोई भी यात्री या चालक दल के सदस्य, किसी गलत इरादे से देश में घुस सकते हैं या बाहर जा सकते हैं।
यह भी पढ़ें: MHA: संसदीय समिति की सिफारिश, अर्धसैनिक बलों के अफसरों को विदेश ट्रेनिंग पर भेजे सरकार, CAPF को मिले मौका
देश में हैं 31 अधिसूचित वाटर-वे
रिपोर्ट के अनुसार, देश में 31 अधिकृत आईसीपी हैं। इनमें से 10 आईसीपी, भारत सरकार के आप्रवासन ब्यूरो (बीओआई) के नियंत्रण में हैं। बाकी आईसीपी का संचालन, राज्य सरकारों और लोकल पोर्ट अथॉरिटी के पास है। अगर किसी भी व्यक्ति को जल, थल या वायु मार्ग से देश में आना है या बाहर जाना है, तो उसके लिए (भारत में प्रवेश) पासपोर्ट नियम 1950, के अंतर्गत मंजूरी मिलती है। इसके लिए वैद्य पासपोर्ट और वीजा की जरूरत पड़ती है। केंद्र सरकार ने जिन आईसीपी को अधिसूचित किया है, वहां से भी कानूनी दस्तावेजों की मदद से देश के अंदर या बाहर जा सकते हैं। मतलब, इसके लिए 31 अधिसूचित वाटर-वे तय किए गए हैं। बीस आईसीपी ऐसी हैं, जहां स्थानीय पुलिस का नियंत्रण रहता है। वहां पर पर्याप्त इंफ्रास्ट्रक्चर भी नहीं है।
सीमित ऑफलाइन सिस्टम के दुरुपयोग की संभावना
ऐसी जगहों से वे लोग भी देश के अंदर घुस सकते हैं या बाहर जा सकते हैं, जिनके पास लीगल डॉक्यूमेंट नहीं होते। ऐसे लोगों की देश के प्रति गलत मंशा हो सकती है। 20 से अधिक गैर अधिसूचित समुद्री आव्रजन चेक पोस्ट, यहां पर तकनीकी रूप से पासपोर्ट (भारत में प्रवेश) अधिनियम, 1920 और उसके तहत बनाए गए नियमों का उल्लंघन हो रहा है। चालक दल या कोई यात्री, आईसीपी की सीमित ऑफलाइन जानकारी और भौतिक बुनियादी ढांचे के अभाव का दुरुपयोग कर सकते हैं। ऑफलाइन सिस्टम होने के कारण इसका केंद्रीय एजेंसियों के साथ लिंक नहीं हो पाता। यहीं से एक संभावित सुरक्षा खतरा शुरू हो जाता है। कोई भी व्यक्ति सुनियोजित तरीके से देश के अंदर या बाहर जा सकता है। केंद्रीय गृह मंत्रालय ने इस मुद्दे को आप्रवासन ब्यूरो और एनआईसी के समक्ष उठाया था। इसके बाद कुछ जगहों पर मैन पावर, सिक्योरिटी चेक गजट, पासपोर्ट रीडिंग मशीन, डाटा सेंटर लिंक, लोकल सर्वर, वैब कैमरा, कंप्यूटर और बार कोड स्केनर आदि उपकरण मुहैया कराए गए। बाकी स्पेस शेल्टर, फोन और वाहन का इंतजाम, पोर्ट अथॉरिटी द्वारा किया गया।
टैंट या शामियाने में अनियमित और अनचेक्ड पोस्ट
आप्रवासन ब्यूरो द्वारा संसदीय समिति को दी गई जानकारी में कहा गया है कि सभी 31 आईसीपी पर तकनीकी उपकरणों एवं दूसरे संसाधनों की जरूरत है। बीस आईसीपी के जरिए कई बार विदेशी जहाज का स्टाफ, बिना इमिग्रेशन क्लीयरेंस के सुरक्षा दायरे से बाहर चला जाता है। कुछ आईसीपी तो क्रूज टर्मिनल भवन में चल रही हैं, तो दूसरी आईसीपी पर काउंटर ही नहीं हैं। वे टैंट या शामियाने में स्थापित हैं। वहां तकनीकी उपकरणों की किल्लत है। गृह मामलों की संसदीय स्थायी समिति ने कहा, ये 'समुद्री आव्रजन पोस्ट' देश की सुरक्षा के लिए एक संभावित खतरा है। चूंकि ये पोस्ट अनियमित और अनचेक्ड हैं, इसलिए कोई भी यात्री या चालक दल के सदस्य, किसी गलत इरादे से देश में घुस सकते हैं या बाहर जा सकते हैं। केंद्रीय गृह मंत्रालय ने समिति को बताया है कि इस संबंध में राज्य सरकारों और लोकल पोर्ट अथॉरिटी के समक्ष यह मुद्दा उठाया गया है। हालांकि समिति के पास वह जानकारी नहीं पहुंची कि लोकल अथॉरिटी ने इस संवेदनशील मुद्दे को लेकर कौन से कदम उठाए हैं।
राष्ट्रीय सुरक्षा के लिए जोखिम का कारण
समिति ने अपनी सिफारिश में कहा, इस तरह की आईसीपी, राष्ट्रीय सुरक्षा पर असर डालती हैं। गृह मंत्रालय, यह सुनिश्चित करे कि राज्य सरकारें और लोकल पोर्ट अथॉरिटी, सुरक्षा को लेकर एक तय समय सीमा में अपने सिस्टम को अपडेट करें। इसमें कहां पर, कौन सी बाधाएं आ रही हैं, उनका पता लगाकर केंद्रीय गृह मंत्रालय आईसीपी के आधुनिकीकरण का काम जल्द पूरा कराए। मंत्रालय यह भी देख कि ये गैर अधिसूचित आईसीपी, किसी भी तरह से राष्ट्रीय सुरक्षा के लिए जोखिम का कारण न बनें। गृह मंत्रालय ने पत्तन, पोत परिवहन और जलमार्ग मंत्रालय को आईसीपी के विषय में सचेत किया है, लेकिन इस संबंध में जो कदम उठाए गए हैं, वह जानकारी समिति के पास नहीं है।