संसद: झारखंड के भोगता समुदाय को अनुसूचित जनजाति की सूची में शामिल करने संबंधी विधेयक को दी मंजूरी
निचले सदन में चर्चा का जवाब देते हुए जनजातीय कार्य मंत्री अर्जुन मुंडा ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में जनजातियों के विकास एवं कल्याण का कार्य प्रतिबद्धता के साथ किया जा रहा है और इन्हीं प्रयासों के तहत विसंगतियों को दूर किया जा रहा है।
विस्तार
संसद ने मंगलवार को झारखंड के भोगता समुदाय को अनुसूचित जातियों की सूची से हटाकर अनुसूचित जनजातियों की सूची में डालने तथा कुछ अन्य समुदायों को जनजाति की सूची में शामिल करने के प्रावधान संबंधी एक विधेयक को मंजूरी दे दी।
लोकसभा ने संविधान (अनुसूचित जातियां और अनुसूचित जनजातियां) आदेश (संशोधन) विधेयक, 2022 को चर्चा के बाद ध्वनिमत से पारित कर दिया। राज्यसभा ने बीते बुधवार (30 मार्च) को इस विधेयक को मंजूरी दी थी।
निचले सदन में चर्चा का जवाब देते हुए जनजातीय कार्य मंत्री अर्जुन मुंडा ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में जनजातियों के विकास एवं कल्याण का कार्य प्रतिबद्धता के साथ किया जा रहा है और इन्हीं प्रयासों के तहत विसंगतियों को दूर किया जा रहा है। उन्होंने कहा कि आजादी के अमृत महोत्सव की मूल अवधारणा यह है कि जनजातियों को लेकर जो चीजें 75 साल में नहीं हो सकीं, वो 100 वर्ष पूरा करने तक हो जाएं और उन्हें मुख्यधारा में लाया जाए।
जनजातियों को लेकर राजनीति करने के कांग्रेस के एक सदस्य के आरोप पर मुंडा ने कहा कि ‘‘आपकी पार्टी ने लंबे समय तक शासन किया तब आपने ऐसा क्यों नहीं किया? आपने जनजातियों को नजरंदाज किया?’’ उन्होंने कहा कि हमने संविधान के तहत निर्धारित मानदंडों के तहत काम किया और यह ऐतिहासिक कालखंड है जब आदिवासियों के कल्याण की चिंता सरकार कर रही है।
मंत्री के जवाब के बाद लोकसभा ने ‘संविधान (अनुसूचित जातियां और अनुसूचित जनजातियां) आदेश (संशोधन) विधेयक, 2022’ को मंजूरी दे दी। इस विधेयक के माध्यम से झारखंड राज्य के संबंध में अनुसूचित जातियों की सूची में से भोगता समुदाय को लोप करने के लिए संविधान अनुसूचित जातियां आदेश 1950 तथा झारखंड राज्य के संबंध में अनुसूचित जनजातियों की सूचियों में कुछ समुदायों को सम्मिलित करने के लिए संविधान अनुसूचित जनजातियां आदेश 1950 का और संशोधन करने का प्रस्ताव किया गया है।
विधेयक के उद्देश्यों एवं कारणों में कहा गया है कि, संशोधन के तहत संविधान अनुसूचित जनजातियां आदेश 1950 की अनुसूची के भाग 22 में झारखंड में प्रविष्टि 16 के स्थान पर खरवार, भोगता, देशवारी, गंझू, दौलतबंदी (द्वालबंदी), पटबंदी, राउत, माझिया और खैरी को रखा जाएगा। वहीं, इसकी प्रविष्टि 24 में ‘पतार’ के बाद ‘तमरिया’ अंत:स्थापित करने तथा प्रविष्टि 32 में पुरान समुदाय को शामिल करने का प्रस्ताव है।
विधेयक पर चर्चा में हिस्सा लेते हुए कांग्रेस के के सुरेश ने कहा कि पहले त्रिपुरा, फिर उत्तर प्रदेश और अब झारखंड के लिए इस तरह का विधेयक लाया गया है। उन्होंने आरोप लगाया कि चुनाव की दृष्टि से कई समुदायों को अनुसूचित जातियों से अनुसूचित जनजातियों में जोड़ने के लिए ऐसे विधेयक लाए जा रहे हैं।
सुरेश ने कहा कि इन समुदायों की वास्तविक समस्याओं पर भी सरकार को ध्यान देना चाहिए। उन्होंने यह भी दावा किया कि सरकार वन अधिकार कानून को लागू करने के लिए भी कुछ नहीं कर रही। इस पर भाजपा के सुनील कुमार सिंह ने कहा कि इन जातियों को 74 वर्ष बाद न्याय मिल पाया है। उन्होंने कहा कि हम वोट बैंक के लिए ऐसे विधेयक नहीं ला रहे, बल्कि कांग्रेस की गलतियों को सुधार रहे हैं।
द्रमुक के वी सेंथिल कुमार ने भी आरोप लगाया कि चुनावों की रणनीति के तहत ऐसे विधेयक लाए जा रहे हैं और इनका उद्देश्य तुष्टीकरण है, उत्थान नहीं। तृणमूल कांग्रेस की प्रतिमा मंडल ने कहा कि आजादी के 74 वर्ष बाद भी जनजातीय समुदायों की दशा में खास अंतर नहीं आया है।
- Arjun Munda (@arjunmunda) 5 Apr 2022
चर्चा में हिस्सा लेते हुए भाजपा के एस एस आहलूवालिया ने कहा कि देश की सभी जनजातियों की अपनी बोली, मातृभाषा होती है, ऐसे में इनके संरक्षण की दिशा में सरकार को कदम उठाना चाहिए।
झारखंड मुक्ति मोर्चा (झामुमो) के सदस्य विजय कुमार हंसदक ने कहा कि भोगता समुदाय के कुछ नेताओं और सदस्यों ने इसे अनुसूचित जनजाति की सूची में शामिल करने के कदम पर आपत्ति जताई है। उन्होंने कहा, ''इस बात को लेकर भोगता समुदाय में काफी गुस्सा है।" उन्होंने मंत्री से समुदाय के विचारों पर विचार करने और झारखंड सरकार के साथ परामर्श करने के बाद विधेयक लाने का आग्रह किया।
भाजपा सांसद निशिकांत दुबे ने कांग्रेस और झामुमो सदस्यों पर निशाना साधते हुए कहा, "जिस तरह से उन्होंने विधेयक का विरोध किया वह निंदनीय है... झारखंड की जनता उन्हें कभी माफ नहीं करेगी।" विधेयक के पारित होने के बाद लोकसभा को अगले दिन तक के लिए स्थगित कर दिया गया।
कानून तोड़ने वालों की संपत्ति, आय के साधन होंगे जब्त, विदेश मंत्री ने पेश किया विधेयक
विदेश मंत्री एस जयशंकर ने मंगलवार को लोकसभा में सामूहिक विनाश के हथियार, गैरकानूनी गतिविधियों का निषेध (डब्ल्यूएमडी-पीयूए) संशोधन विधेयक पेश किया। इसके तहत सरकार को डब्ल्यूएमडी से जुड़ी गतिविधियों में लगे लोगों की संपत्ति और आर्थिक संसाधनों को जब्त करने का अधिकार दिया जाएगा।
विदेश मंत्री एस जयशंकर ने विधेयक पेश करते हुए कहा, डब्ल्यूएमडी-पीयूए अधिनियम, 2005 में केवल इन हथियारों के निर्माण पर प्रतिबंध लगाया गया था। लेकिन, हाल के दिनों में अंतरराष्ट्रीय संगठनों की तरफ से डब्ल्यूएमडी और वितरण प्रणालियों के प्रसार से संबंधित नियमों में व्यापक बदलाव हुआ है।
संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद के लक्षित वित्तीय प्रतिबंधों और वित्तीय कार्रवाई कार्यदल की सिफारिशों के मुताबिक डब्ल्यूएमडी व वितरण प्रणालियों के प्रसार के वित्तपोषण पर प्रतिबंध लगाना है। इसे देखते हुए भारत को अपने कानून में संशोधन करना होगा ताकि अंतरराष्ट्रीय दायित्वों को पूरा किया जा सके।
जुड़ेगी नई धारा 12ए
विधेयक के जरिये मौजूदा कानून में नई धारा 12ए जोड़ी जाएगी। इसमें कोई भी व्यक्ति इस अधिनियम या संयुक्त राष्ट्र (सुरक्षा परिषद) अधिनियम, 1947 या किसी अन्य प्रासंगिक आदेश या कानून के तहत प्रतिबंधित विनाशक हथियारों व वितरण से जुड़ी गतिविधियों का वित्तपोषण नहीं करेगा। अगर कोई उल्लंघन करता है तो सरकार उस व्यक्ति की सभी प्रत्यक्ष-परोक्ष संपत्तियों और आर्थिक संसाधनों को जब्त करने का अधिकार दिया जाएगा।
महामारी के दौरान चलती रहीं खाद्य प्रसंस्करण इकाइयां
केंद्रीय खाद्य प्रसंस्करण उद्योग मंत्री प्रहलाद सिंह पटेल ने मंगलवार को लोकसभा में बताया कि कोविड महामारी के दौरान देशभर की खाद्य प्रसंस्करण इकाइयां सामान्य रूप से चलती रहीं। इस दौरान उनकी आपूर्ति शृंखला भी निर्बाध रूप से काम करती रही।
- मंत्री ने बताया, महामारी के शुरू होते ही इन इकाइयों के संचालन को सुगम बनाने के लिए मंत्रालय ने राज्यों के अधिकारियों के साथ संपर्क करने के लिए एक समर्पित कार्यदल और शिकायत निवारण प्रकोष्ठ बना दिया था।
- मंत्रालय ने आत्मनिर्भर भारत पहल के हिस्से के तौर पर कई उपाय किए हैं, जिनमें केंद्र प्रायोजित प्रधानमंत्री सूक्ष्म खाद्य प्रसंस्करण उद्यम (पीएम एफएमई) योजना, परिवहन के दायरे में विस्तार और ऑपरेशन ग्रीन्स योजना के तहत भंडारण सब्सिडी शामिल हैं।
हाइब्रिड मॉडल : सीआईएसएफ के साथ मिलकर प्रतिष्ठानों की सुरक्षा करेंगी पुलिस और निजी एजेंसियां
केंद्र ने बताया है कि देश में जिन प्रतिष्ठानों पर केंद्रीय औद्योगिक सुरक्षा बल (सीआईएसएफ) तैनात है, वहां मिश्रित सुरक्षा मॉडल विकसित किया जाएगा। लोकसभा में गृह राज्यमंत्री नित्यानंद राय ने बताया, सीआईएसएफ की तैनाती वाले प्रतिष्ठानों पर राज्य पुलिस और निजी सुरक्षा एजेंसियों के साथ मिलकर एक मिश्रित (हाइब्रिड) मॉडल बनाने का निर्णय लिया गया है। लेकिन सीआईएसएफ द्वारा इन निजी एजेंसियों के प्रशिक्षण की फिलहाल कोई योजना नहीं है।
चिंताजनक : देश में 834 लोगों पर सिर्फ एक डॉक्टर उपलब्ध
देश की जनसंख्या के अनुपात में प्रत्येक 834 लोगों पर एक डॉक्टर उपलब्ध है, जिसमें सभी एलोपैथिक व 5.65 लाख आयुष चिकित्सक शामिल हैं। इसके अलावा प्रत्येक 1000 लोगों की देखभाल के लिए पूरे दो नर्सिंग कर्मचारी भी उपलब्ध नहीं हैं। केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्री मनसुख मांडविया ने मंगलवार को राज्य सभा में बताया कि देश में एक हजार लोगों की जनसंख्या के अनुपात में 1.96 नर्सिंग कर्मचारी उपलब्ध हैं। भारतीय उपचर्या परिषद (आईएनसी) के रिकॉर्ड के हवाले से मांडविया ने बताया कि देश में करीब 33.41 लाख नर्सिंग कर्मी पंजीकृत हैं, जिनमें 23.40 लाख नर्स हैं और 10 लाख सहायक नर्स (एएनएम) हैं। इसके अलावा करीब 56,854 महिला स्वास्थ्य पर्यवेक्षक (एलएचवी) हैं।
डिजिटल होगी अगली जनगणना, स्वगणना का मिलेगा विकल्प
देश में अगली जनगणना डिजिटल होगी और लोगों के पास ऑनलाइन स्वगणना का विकल्प होगा। जनगणना के तहत आवास सूचीकरण और राष्ट्रीय जनसंख्या रजिस्टर को 1 अप्रैल से 30 सितंबर, 2020 तक अद्यतन किया जाना था। केंद्रीय गृह राज्यमंत्री नित्यानंद राय ने लोक सभा में बताया कि पहली बार जनगणना को पूरी तरह से डिजिटल तरीके से अंजाम दिया जाएगा।
वीजा अवधि खत्म होने के बाद भी चार लाख विदेशी भारत में ठहरे
सरकार ने बताया कि वीजा अवधि समाप्त होने के बावजूद गत दिसंबर तक देश में 3.93 लाख विदेशी रुके रहे। लोकसभा में गृह राज्यमंत्री नित्यानंद राय ने कहा कि 2019 में 25,143 विदेशी वीजा अवधि खत्म होने के बाद भी भारत में ठहरे। वहीं, 2020 में 40 हजार से ज्यादा विदेशी अवैध तरीके से रुके रहे। जबकि 2021 में इनकी संख्या 54,576 रही। मंत्री ने कहा कि इन तीन सालों और उससे पहले ऐसे विदेशियों की कुल संख्या 3,93,431 है। राय ने कहा कि विदेशी कानून 1946 के तहत ऐसे लोगों के खिलाफ कार्रवाई भी की गई है।