Parliament: 2023 के लिए भारत का हज कोटा 1.75 लाख तय, 2019 से PM मोदी के विदेश दौरों पर खर्च हुए करीब 23 करोड़
सरकार ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने 2019 से अब तक 21 विदेश यात्राएं की हैं और इन यात्राओं पर 22.76 करोड़ रुपये से अधिक खर्च किए गए। 2019 से राष्ट्रपति ने आठ विदेश यात्राएं कीं और इन यात्राओं पर 6.24 करोड़ रुपये से अधिक खर्च किए गए।
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सरकार ने गुरुवार को कहा कि सऊदी अरब के साथ द्विपक्षीय समझौते के अनुसार इस साल के लिए भारत का हज कोटा 1,75,025 तय किया गया है। लोकसभा में एक सवाल के लिखित उत्तर में अल्पसंख्यक मामलों की मंत्री स्मृति ईरानी ने कहा कि मंत्रालय ने राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों की हज समितियों सहित हितधारकों के साथ हज प्रबंधन पर कई संवाद सत्र किए हैं, जिसमें हज कोटा बहाल करने के अनुरोध प्राप्त हुए हैं।
ईरानी ने कहा, हज 2023 के लिए सऊदी अरब के साथ वार्षिक द्विपक्षीय समझौते के तहत इस मुद्दे का समाधान किया गया और कोविड-19 की चुनौतियों के बावजूद देश का मूल हज कोटा (1,75,025) बहाल कर दिया गया है। हज कोटा में वृद्धि ने अब सरकार को राज्यों/केंद्र शासित प्रदेशों से अधिक तीर्थयात्रियों को भेजने में सक्षम बनाया है।
प्रधानमंत्री, राष्ट्रपति और विदेश मंत्री के विदेश दौरों पर खर्च हुए इतने रुपये
सरकार ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने 2019 से अब तक 21 विदेश यात्राएं की हैं और इन यात्राओं पर 22.76 करोड़ रुपये से अधिक खर्च किए गए। विदेश राज्य मंत्री वी मुरलीधरन ने राज्यसभा में एक प्रश्न के लिखित उत्तर में बताया कि 2019 से राष्ट्रपति ने आठ विदेश यात्राएं कीं और इन यात्राओं पर 6.24 करोड़ रुपये से अधिक खर्च किए गए।
मंत्री के अनुसार, सरकार ने राष्ट्रपति की यात्राओं के लिए 6,24,31,424 रुपये, प्रधानमंत्री की यात्राओं के लिए 22,76,76,934 रुपये और विदेश मंत्री की यात्राओं के लिए 20,87,01,475 रुपये की राशि खर्च की। राष्ट्रपति ने 2019 से अब तक आठ विदेश यात्राएं की हैं, जिनमें सात पूर्व राष्ट्रपति रामनाथ कोविंद ने सात विदेश दौरे किए और राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू का पिछले साल ब्रिटेन दौरा शामिल हैं। प्रधानमंत्री मोदी ने 2019 से 21 विदेश दौरे किए। जबकि विदेश मंत्री एस जयशंकर ने 86 विदेश दौरे किए। 2019 के बाद से प्रधानमंत्री ने तीन बार जापान का दौरा किया है, और दो बार अमेरिका और संयुक्त अरब अमीरात का दौरा किया है।
विदेश राज्य मंत्री वी मुरलीधरन ने गुरुवार को कहा कि कनाडा में भारतीय नागरिकों की सुरक्षा और कल्याण सरकार की प्राथमिकता है। कनाडा में भारतीयों के खिलाफ बढ़ते घृणा अपराध और सांप्रदायिक हिंसा की घटनाओं पर राज्यसभा में एक सवाल के जवाब में उन्होंने यह टिप्पणी की।
मुरलीधरन ने कहा कि भारत नियमित रूप से भारतीय समुदाय को प्रभावित करने वाली अप्रिय घटनाओं को कनाडा के साथ उठाता है और उचित जांच करने के बाद अपराधियों को न्याय के दायरे में लाने का अनुरोध करता है। उन्होंने कहा, कनाडा में भारतीय नागरिकों की सुरक्षा और कल्याण सरकार की प्राथमिकता है। कनाडा में भारतीय मिशन/वाणिज्य दूतावास लगातार भारतीय समुदाय के साथ जुड़े हुए हैं, जिसमें उनकी सुरक्षा और कल्याण सुनिश्चित करने के उपाय भी शामिल हैं।
उन्होंने कहा, मंत्रालय और कनाडा में हमारे मिशन/वाणिज्य दूतावास नियमित रूप से भारतीय समुदाय से संबंधित किसी भी अप्रिय घटना को संबंधित कनाडाई अधिकारियों के साथ उठाते हैं और उनसे उचित जांच सुनिश्चित करने, अपराधियों की पहचान करने और न्याय प्रदान करने का अनुरोध करते हैं। मुरलीधरन ने कहा कि मंत्रालय के साथ-साथ कनाडा में भारतीय मिशन और वाणिज्य दूतावासों ने समय-समय पर परामर्श जारी किए हैं, जिसमें उस देश में रहने वाले भारतीय नागरिकों को उचित सावधानी बरतने और सतर्क रहने के लिए कहा गया है।
कुछ दिन पहले कनाडा के ब्रैम्पटन में एक प्रमुख हिंदू मंदिर को भारत विरोधी भित्तिचित्रों से निशाना बनाया गया था, जिससे भारतीय समुदाय में आक्रोश फैल गया था। गौरी शंकर मंदिर में तोड़फोड़ की घटना की निंदा करते हुए टोरंटो में भारतीय महावाणिज्य दूतावास ने कहा कि मंदिर को विरूपित करने से कनाडा में भारतीय समुदाय की भावनाएं आहत हुई हैं। ताइवान के प्रति भारत की नीति के बारे में एक अलग सवाल के जवाब में उन्होंने कहा कि यह स्पष्ट और सुसंगत है। उन्होंने कहा, 'सरकार व्यापार, निवेश, पर्यटन, संस्कृति, शिक्षा के क्षेत्र में आदान-प्रदान की बातचीत को सुविधाजनक और बढ़ावा देती है।
हालांकि, भारत और ताइवान के बीच औपचारिक राजनयिक संबंध नहीं हैं, लेकिन द्विपक्षीय व्यापार संबंधों में तेजी आई है। चीन के साथ पूर्वी लद्दाख सीमा विवाद के बाद भारत के कुछ विशेषज्ञ ताइपे के साथ नई दिल्ली के संबंधों को मजूबत करने पर जोर दे रहे हैं, खासकर व्यापार और निवेश क्षेत्रों में।
भारत की जी20 अध्यक्षता संबंधी प्राथमिकताएं समावेशी एवं व्यावहारिक : जयशंकर
विदेश मंत्री एस जयशंकर ने गुरुवार को संसद में कहा कि भारत की जी20 अध्यक्षता संबंधी प्राथमिकताएं समावेशी एवं व्यावहारिक हैं। इनमें महत्वपूर्ण विचार-विमर्श हेतु व्यापक क्षेत्र सम्मिलित हैं। विदेश मंत्री ने एक सवाल के लिखित जवाब में राज्यसभा को यह जानकारी दी। उन्होंने कहा कि इन क्षेत्रों में समावेशी और अनुकूल विकास; हरित विकास और पर्यावरण हेतु जीवनशैली (मिशन लाइफ); प्रौद्योगिकीय परिवर्तन और सार्वजनिक डिजिटल अवसंरचना; बहुपक्षीय संस्थानों में सुधार; महिलाओं के नेतृत्व में विकास तथा अंतरराष्ट्रीय शांति और सद्भाव शामिल हैं।
उन्होंने कहा कि हमारा प्रयास है कि वॉयस ऑफ ग्लोबल साउथ समिट से प्राप्त जानकारी की जी20 विचार-विमर्श सहित विश्व स्तर पर स्वीकार्यता हो। उन्होंने कहा कि भारत ने हमेशा ग्लोबल साउथ की आवाज को प्रखर बनाया है। गौरतलब है कि भारत ने नवंबर में बाली में जी20 के वार्षिक शिखर सम्मेलन में इसकी अध्यक्षता ग्रहण की। भारत इस साल के अंत में होने वाले जी20 शिखर सम्मेलन से पहले कई कार्यक्रमों और बैठकों की मेजबानी कर रहा है।