प्रकाश पर्व: राष्ट्रपति कोविंद और पीएम मोदी ने गुरू नानक को किया नमन
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हर साल कार्तिक महीने की शुक्ल पक्ष की पूर्णिमा तिथि पर सिख धर्म के संस्थापक गुरु नानक देव का जन्मदिन मनाया जाता है। गुरु नानकदेव की जयंती को गुरु पर्व और प्रकाश उत्सव के नाम से भी जाना जाता है। गुरु पर्व सिख धर्म के पवित्र त्योहारों में से एक है। ऐसे में देश के राष्ट्रपति रामनाथ कोविंद और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने गुरु नानकदेव को नमन किया है।
प्रकाश पर्व के मौके पर राष्ट्रपति रामनाथ कोविंद ने सभी देशवासियों को बधाई दी है। उन्होंने लिखा, 'गुरु नानक देव की जयंती के शुभ अवसर पर, मैं सभी देशवासियों और विदेश में बसे सभी भारतीयों, विशेष रूप से सिख समुदाय के भाइयों और बहनों को हार्दिक बधाई और शुभकामनाएं देता हूं। आइए, इस पावन अवसर पर, हम सब अपने आचरण में उनकी शिक्षाओं का पालन करें।'
गुरु नानक देव ने लोगों को एकता, समरसता, बंधुता, सौहार्द और सेवाभाव का मार्ग दिखाया और परिश्रम, ईमानदारी तथा आत्मसम्मान पर आधारित जीवनशैली का बोध कराने वाला आर्थिक दर्शन दिया। उनका जीवन और उनकी शिक्षाएं, समस्त मानव जाति के लिए प्रेरणा पुंज हैं।
— President of India (@rashtrapatibhvn) November 30, 2020
राष्ट्रपति ने आगे लिखा, 'गुरु नानक देव ने लोगों को एकता, समरसता, बंधुता, सौहार्द और सेवाभाव का मार्ग दिखाया और परिश्रम, ईमानदारी तथा आत्मसम्मान पर आधारित जीवनशैली का बोध कराने वाला आर्थिक दर्शन दिया। उनका जीवन और उनकी शिक्षाएं, समस्त मानव जाति के लिए प्रेरणा पुंज हैं।'
प्रधानमंत्री ने ट्वीट कर लिखा, 'मैं श्री गुरु नानक देव जी को उनके प्रकाश पर्व पर नमन करता हूं। उनके विचार हमें समाज की सेवा करने और एक बेहतर दुनिया सुनिश्चित करने के लिए प्रेरित करते रहें।'
I bow to Sri Guru Nanak Dev Ji on his Parkash Purab. May his thoughts keep motivating us to serve society and ensure a better planet.
— Narendra Modi (@narendramodi) November 30, 2020
बता दें कि गुरु नानक देव का जन्म पाकिस्तान स्थित तलवंडी में हुआ था। इस जगह को ननकाना साहिब के नाम से जाना जाता है। सिख समुदाय के लोगों के लिए इस स्थान का बहुत महत्व है। गुरु नानक देव पवित्र आत्मा, ईश्वर के सच्चे प्रतिनिधि, महापुरुष व महान धर्म प्रवर्तक थे।
गुरु नानक देव जी की मृत्यु 22 सितंबर, 1539 को करतारपुर (पाकिस्तान) में हुई थी। गुरु नानक देव की मृत्यु के बाद से हर वर्ष हिंदू और सिख धर्म के अनुयायी कार्तिक माह की पूर्णिमा के दिन उनकी याद में प्रकाशोत्सव हर्षोल्लास के साथ मनाया जाता है। प्रकाश पर्व के दिन ही हर वर्ष देव दिवाली मनाई जाती है।