फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
डाउनलोड करें

सब्सक्राइब करें
Hindi News ›   India News ›   Parents auction children to steal in grand weddings in north india

इस राज्य में माता-पिता लीज पर देते हैं बच्चे, बड़ी शादियों में चोरी के लिए होता है इनका इस्तेमाल

Sun, 06 Dec 2020 02:15 AM IST
Jeet Kumar न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली Published by: Jeet Kumar Updated Sun, 06 Dec 2020 02:15 AM IST
विज्ञापन
Parents auction children to steal in grand weddings in north india
प्रतीकात्मक तस्वीर - फोटो : सोशल मीडिया

शादियों का सीजन शुरू हो गया है। इस बीच दिल्ली पुलिस की ओर से एक एडवाइजरी जारी की गई है, जिसमें कहा गया है कि कुछ गिरोह बच्चों के जरिए बड़ी शादियों में नकदी और गहने चुराने का काम कर रहे हैं। पुलिस के मुताबिक, इसमें इनके माता पिता भी शामिल हैं जो अपने बच्चों को ऐसे कामों के लिए 'नीलाम' कर देते हैं।

विज्ञापन


शादी के सीजन में उत्तर भारत में ‘बैंड बाजा बारात’ गिरोह का हिस्सा बनने के लिए नौ साल से 15 साल की उम्र के बच्चों को उनके माता-पिता द्वारा ‘नीलाम’ किया जाता है। ये गिरोह दिल्ली-एनसीआर, लुधियाना और चंडीगढ़  जैसे शहरों में बड़ी शादियों में नकदी और गहने चुराने के लिए इन किशोरों का इस्तेमाल करते हैं।
विज्ञापन


दरअसल, ये बच्चे मध्यप्रदेश के राजगढ़ जिले के हैं, जो उत्तर भारत के महानगरों में जाकर शादियों में चोरी को अंजाम देते हैं। पुलिस ने खुलासा किया है कि शादी के सीजन में बैंड में या अन्य काम करने के बहाने ये बच्चे शादी में शामिल हो जाते और चोरी करते हैं। 
विज्ञापन
विज्ञापन


माता पिता करते हैं नीलाम
इस बात को जानकर आपको झटका लग सकता है, बच्चों को खुद उनके माता पिता ही ऐसे कामों के आगे करते हैं और गिरोह का हिस्सा बनने के लिए नौ साल से 15 साल की उम्र के बच्चों को उनके माता-पिता द्वारा नीलाम किया जाता है। फिर इन बच्चों को ये शातिर गिरोह दिल्ली-एनसीआर, पंजाब और चंडीगढ़ जैसे शहरों में बड़ी शादियों में  गहने चुराने के लिए इस्तेमाल करते हैं।

साथ ही ये बात जानकर हैरानी होगी कि बच्चों को लीज पर लेने का भी काम होता है, जिसकी कीमत सालाना 10 से 12 लाख रुपये है। हाल ही में पुलिस ने एक गिरोह के सात सदस्यों को गिरफ्तार किया था, जिनमें दो किशोर भी शामिल थे। जिन्होंने दिल्ली और पंजाब में चोरियां की थीं।

बच्चों को दी जाती है चोरी करने की ट्रेनिंग
डीसीपी क्राइम भीष्म सिंह ने बताया मध्यप्रदेश के राजगढ़ जिले के कुछ ही गांवों में ऐसे गिरोह सक्रिय हैं जो बच्चों को चोरी के लिए इस्तेमाल करते हैं। इन बच्चों को नीलामी के बाद प्रशिक्षण दिया जाता है ताकि वे नकदी, आभूषणों के बैग और अन्य कीमती सामानों को निशाना बना सकें और उन्हें उठा सकें।

आगे उन्होंने बताया कि महानगरों में बच्चों को लाने के बाद प्रशिक्षण में बताया जाता है कि चोरी कैसे करनी है और कार्यक्रम स्थल पर लोगों के साथ कैसे मिलना है। बच्चों को मानसिक और शारीरिक तौर पर तैयार किया जाता है ताकि गिरफ्तारी के बाद अपना मुंह न खोलें।


समारोह में शामिल होने के लिए उन्हें बेहतरीन कपड़े और खाने-पीने का तरीका सिखाया जाता है, ताकि किसी को संदेह न हो। गिरोह में वयस्क पुरुष और महिलाएं शामिल हैं, जो आमतौर पर किराए के घरों में रहते हैं और बच्चों को काम पर छोड़ने के बाद बाहर ऑटोरिक्शा और मोटरसाइकिलों में इंतजार करते हैं।

विज्ञापन
विज्ञापन

रहें हर खबर से अपडेट, डाउनलोड करें Android Hindi News apps, iOS Hindi News apps और Amarujala Hindi News apps अपने मोबाइल पे|
Get all India News in Hindi related to live update of politics, sports, entertainment, technology and education etc. Stay updated with us for all breaking news from India News and more news in Hindi.

विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन

एड फ्री अनुभव के लिए अमर उजाला प्रीमियम सब्सक्राइब करें

Next Article

AU ऐप में पढ़ें

Followed