फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
डाउनलोड करें

सब्सक्राइब करें
Hindi News ›   India News ›   Pardon granted as accused turns approver while co-accused MLA cries foul; HC says it is permissible

Karntaka: हाईकोर्ट ने बरकरार रखा आरोपी को माफी देने का फैसला, कहा- निचली अदालत का आदेश जायज; जानें पूरा मामला

Sun, 18 Jun 2023 04:14 PM IST
निर्मल कांत न्यूज डेस्क, अमर उजाला, बेंगलुरु
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, बेंगलुरु Published by: निर्मल कांत Updated Sun, 18 Jun 2023 04:14 PM IST
सार

Karntaka: उच्च न्यायालय ने मामले में निचली अदालत के फैसले को बरकरार रखते हुए कहा कि माफी देने की शक्ति का इस्तेमाल जायज है, यदि इस माफी से मामले के तथ्यों का पूरी तरह से खुलासा हो रहा है, तो इस तरह तरह की माफी की अनुमति दी जानी चाहिए।

विज्ञापन
Pardon granted as accused turns approver while co-accused MLA cries foul; HC says it is permissible
कर्नाटक उच्च न्यायालय - फोटो : अमर उजाला

विस्तार

कर्नाटक उच्च न्यायालय ने केंद्रीय अन्वेषण ब्यूरो (सीबीआई) मामले में एक आरोपी को दी गई माफी को बरकरार रखा है। अदालत ने कहा कि माफी तभी स्वीकार्य हो सकती है जब अनुमोदक (सरकारी गवाह) की गवाही मामले में उन अन्य आरोपियों के खिलाफ सफलतापूर्व मुकदमा चलाने में मदद करेगी, जिन्हें अन्य तरीकों से दोषी नहीं ठहराया जा सकता है।  दरअसल, बेंगलुरु की विशेष अदालत ने श्रील लाल महल लिमिटेड के नई दिल्ली के निदेशक सुशील कुमार वलेचा (73 वर्षीय) को क्षमा दी थी। कंपनी के प्रबंध निदेश सतीष कृष्णा सेल और सह-आरोपी मेसर्स श्री मल्लिकार्जुन शिपिंग प्राइवेट लिमिटेड ने इसे उच्च न्यायालय में चुनौती दी थी। 

विज्ञापन

उच्च न्यायालय ने मामले में निचली अदालत के फैसले को बरकरार रखते हुए कहा कि माफी देने की शक्ति का इस्तेमाल जायज है, यदि इस माफी से मामले के तथ्यों का पूरी तरह से खुलासा हो रहा है, तो इस तरह तरह की माफी की अनुमति दी जानी चाहिए। विशेष अदालत ने 7 अक्तूबर, 2021 को आपराधिक प्रक्रिया संहिता (सीआरपीसी) की धारा 306 के तहत वलेचा के आवेदन को स्वीकार कर लिया था, जिसमें मामले में सरकारी गवाह बनने पर माफी मांगी गई थी।

विज्ञापन
विज्ञापन

सतीष कृष्णा सेल कारवार के मौजूदा विधायक हैं। अवैध लौह अयस्क खनन से जुड़ा मामला 2012 का है। सीबीआई ने कई आरोपियों के खिलाफ अपराध दर्ज किया था जिसने मामले की जांच की थी और आरोप पत्र दायर किया था। कई आरोपियों ने मामले से आरोपमुक्त करने के लिए याचिका दायर की लेकिन सभी को खारिज कर दिया गया था। निचली अदालत ने आरोपियों के खिलाफ भारतीय दंड संहिता (आईपीसी) और भ्रष्टाचार निरोधक कानून के तहत आरोप तय किए।
 

विज्ञापन

इसके बाद सुशील कुमार वलेचा ने माफी की मांग करते हुए एक आवेदन दायर किया, जिसमें कहा कि वह केवल श्री मल्लिकार्जुन शिपिंग प्राइवेट लिमिटेड के कर्मचारी थे और वह सरकारी गवाह बनने के लिए तैयार थे। सीबीआई ने एक ज्ञापन दायर किया था जिसमें कहा कि उसे कोई आपत्ति नहीं है। इस प्रकार, उनके आवेदन को स्वीकार कर लिया गया। 
 

निचली अदालत के इस आदेश को चुनौती देने के लिए विधायक सतीष कृष्णा सेल और कंपनी ने उच्च न्यायालय में याचिका दायर की थी जिस पर न्यायमूर्ति एम नागप्रसन्ना की पीठ ने सुनवाई की। उच्च न्यायालय ने 16 जून को अपने फैसले में कहा कि निचली अदालत का आदेश तर्कसंगत है। पीठ ने कहा, यह एक तर्कसंगत आदेश है जो शीर्ष अदालत द्वारा इस मुद्दे पर दिए गए कई फैसलों पर ध्यान दिलाता है और आरोपी नंबर 4 (वलेचा) द्वारा दायर आवेदन को स्वीकार करता है। इसलिए, मुझे संबंधित अदालत द्वारा पारित आदेश में हस्तक्षेप करने के लिए कोई वजह नहीं मिलती है।
 

उच्च न्यायालय ने उच्चतम न्यायालय के पूर्व के फैसलों का हवाला देते हुए कहा कि माफी के आवेदन पर विचार किया जा सकता है यदि इससे अभियोजन पक्ष के मामले में मदद मिलती है। उच्च न्यायालय ने कहा, शीर्ष अदालत का मानना है कि अगर माफी देकर अभियोजन पक्ष को लगता है कि यह अन्य अपराधियों के सफल अभियोजन के सर्वोत्तम हित में होगा, जिनकी दोषसिद्धि सरकारी गवाह की गवाही के बिना आसान नहीं है, तो अदालत को इसे स्वीकार करना चाहिए।

विज्ञापन
विज्ञापन

रहें हर खबर से अपडेट, डाउनलोड करें Android Hindi News apps, iOS Hindi News apps और Amarujala Hindi News apps अपने मोबाइल पे|
Get all India News in Hindi related to live update of politics, sports, entertainment, technology and education etc. Stay updated with us for all breaking news from India News and more news in Hindi.

विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन

एड फ्री अनुभव के लिए अमर उजाला प्रीमियम सब्सक्राइब करें

Next Article

AU ऐप में पढ़ें

Followed