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सुनवाई: परमबीर सिंह की अर्जी पर हाईकोर्ट ने पूछा, बिना एफआईआर जांच कैसे संभव?

Wed, 31 Mar 2021 02:55 PM IST
प्रशांत कुमार न्यूज डेस्क, अमर उजाला, मुंबई
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, मुंबई Published by: प्रशांत कुमार Updated Wed, 31 Mar 2021 02:55 PM IST
सार

  • गृहमंत्री देशमुख के खिलाफ वसूली के आरोपों की जांच के लिए लगी थी अर्जी
  • कोर्ट ने कहा- बिना एफआईआर हुए सीबीआई को कैसे ट्रांसफर कर सकते 
  • परमबीर सिंह के पत्र से राज्य में सियासी हलचल तेज

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Parambir singh anil deshmukh bombay high court hearing
Parambir Singh - फोटो : ANI

विस्तार

मुंबई के पूर्व पुलिस कमिश्नर परमबीर सिंह की याचिका पर बुधवार को बॉम्बे हाईकोर्ट में सुनवाई हुई। हाईकोर्ट ने परमबीर सिंह के वकील से कहा कि जबतक एफआईआर दर्ज नहीं कराई जाती तब तक जांच का आदेश नहीं दिया जाएगा।  हाईकोर्ट के मुख्य न्यायाधीश दीपंकर दत्ता ने परमबीर के वकील को कहा कि आप ऐसा कोई मामला बताइए जिसमें बिना FIR दर्ज किए मामले को सीबीआई जांच के लिए ट्रासंफर कर दिया गया हो।  बता दें कि परमबीर सिंह ने महाराष्ट्र के गृहमंत्री अनिल देशमुख पर 100 करोड़ रुपए की वसूली  का लक्ष्य देने का आरोप लगाए हैं। परमबीर सिंह ने इस मामले की सीबीआई जांच कराने के लिए हाईकोर्ट में अर्जी दी थी। 

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ऐसे आरोप आाधारहीन और बेबुनियाद
 परमबीर के वकील विक्रम ननकानी ने कोर्ट में बताया कि ये काफी गंभीर मामला है।  परमबीर की चिट्ठी में कड़वी सच्चाई बताई गई है। इससे साफ जाहिर होता है कि पुलिस फोर्स में कहां खामियां है।  यह पुलिस फोर्स में राजनीतिक दखलंदाजी का मामला है। हालांकि सरकारी वकील आशुतोष कुंभकोणी ने परमबीर के वकील को बीच में दखल देते हुए कहा कि ये सारे आरोप आधारहीन और बेबुनियाद है। ऐसे आरोपों से पुलिस फोर्स का मनोबल टूटता है। उन्होंने कहा कि ऐसी अर्जियां सुनवाई लायक नहीं होतीं। मैं इस संबंध में आपको कुछ फैसले दिखा सकता हूं। परमबीर के पत्र से राज्य में सियासी भूचाल आ गया है।  
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परमबीर सिंह ने गृहमंत्री देशमुख पर लगाए गंभीर आरोप
गौरतलब है कि परमबीर सिंह का कहना है कि गृह मंत्री देशमुख ने निलंबित API सचिव वझे को 100 करोड़ रुपए वसूली का टारगेट दिया था। साथ ही मुख्यमंत्री उद्धव ठाकरे को भी इस मामले की जानकारी दी गई थी, लेकिन कुछ दिन बाद ही उनका ट्रांसफर कर दिया गया। परमबीर ने अपने ट्रांसफर के आदेश को भी चुनौती दी है। उनका कहना है कि ट्रांसफर-पोस्टिंग पर अफसर रश्मि शुक्ला की रिपोर्ट की जांच के बाद ही कोई नतीजे पर जाना चाहिए। परमबीर सिंह ने गृहमंत्री के बंगले के सीसीटीवी फुटेज की भी जांच कराने की मांग की है। परमबीर का दावा है कि देशमुख के आवास पर सचिन वजे कई बार जा चुके हैं और दोनों के बीच लंबी बातचीत होती रही है। ऐसे में उसकी भी सत्यता जरूरी है। 
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रिटायर्ड जज आरोपों की जांच करेंगे
सरकार ने परमबीर के आरोपों की जांच रिटायर्ड जस्टिस को सौंपी हैं। महाराष्ट्र सरकार ने मामले की जांच के लिए रिटायर्ड जस्टिस कैलाश उत्तमचंद चांदीवाल को सौंपी है। चांदीवाल की अगुवाई में हाई लेवल कमेटी बनाई गई है। यह कमेटी अगले 6 महीने में राज्य सरकार को रिपोर्ट सौंपेगी।
क्या है पूरा मामला ?
देश और दुनिया के मशहूर कारोबारी मुकेश अंबानी के घर एंटीलिया के बाहर स्कॉर्पियो में विस्फोटक मिलने के बाद महाराष्ट्र पुलिस में हड़कंप मच गया था। इस मामले में पुलिस अधिकारी सचिन वझे को गिरफ्तार किया गया। वहीं सरकार ने  परमबीर सिंह को मुंबई के पुलिस कमिश्नर पद से हटाकर होमगार्ड का DG बनाया है। उन पर सचिन वझे को संरक्षण देने का आरोप है। 

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