सुरक्षाबलों ने बना डाले लाखों मास्क और पीपीई सूट, मल्टीनेशनल कंपनियों को दी टक्कर!
- सुरक्षाबलों ने 11 लाख मास्क और 4 लाख प्रोटेक्शन सूट बनाए
- दूसरे देशों में बहुराष्ट्रीय कंपनियां बनाती हैं मास्क और सूट
- डीआरडीओ ने लॉकडाउन के दौरान बनाया 20 हजार लीटर सैनिटाइजर
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‘हम भी मैदान में हैं’ के नारे के साथ देश के सुरक्षाबलों ने गजब की फुर्ती दिखाते हुए लॉकडाउन 1.0 के दौरान पीपीई के तहत करीब 15 लाख प्रोटेक्शन सूट और मास्क बनाने का कीर्तिमान सा बना दिया है।
भारतीय सुरक्षाबल इस तरह से अनेक मल्टीनेशनल कंपनियों को टक्कर देते नजर आ रहे हैं। पर्सनल प्रोटेक्टिव इक्विपमेंट यानी (पीपीई) के तहत प्रोटेक्शन सूट और मास्क बनाने में भारतीय सुरक्षा बलों ने बेहद तेजी से काम किया।
सेना, अर्धसैनिक बलों और कई राज्यों की पुलिस ने 21 दिन के लॉकडाउन के दौरान करीब 15 लाख से अधिक मास्क और पीपीई सूट तैयार किए हैं। इन्हें जवानों को मुहैया कराने के अलावा आम लोगों में भी वितरित किया गया है। इनमें 11 लाख मास्क और 4 लाख प्रोटेक्शन सूट हैं।
शुरू में थी तंगी, अब कर रहे हैं सप्लाई
कोरोना के चलते लागू हुए पहले लॉकडाउन में पीपीई को लेकर देश में खासा बवाल मचा रहा। डॉक्टर, नर्स और दूसरे मेडिकल स्टाफ को ये मास्क और सूट, नहीं मिल पा रहे थे। देश के कई हिस्सों से ऐसी शिकायतें आईं कि कोरोना की लड़ाई में अपनी जान जोखिम में डालकर लोगों का इलाज करने वाला मेडिकल स्टाफ पीपीई के लिए जूझ रहा है।
एम्स के डॉक्टरों ने केंद्रीय गृहमंत्री अमित शाह को इस बाबत शिकायत भी दी थी। सेना, अर्धसैनिक बल और विभिन्न राज्यों की पुलिस, लॉकडाउन को सफल बनाने के लिए आगे आई। यहां पर इन्हें भी वही दिक्कत महसूस हुई, जो मेडिकल स्टाफ को हो रही थी।
ड्यूटी पर तैनात सभी जवानों को पीपीई नहीं मिल सके। इन सबके बीच सुरक्षा बलों ने तय किया कि वे खुद पीपीई का निर्माण करेंगे। कम से कम सूट और मास्क तो तैयार किए ही जा सकते हैं। दूसरे देशों में ये मास्क और सूट तैयार करने की जिम्मेदारी बहुराष्ट्रीय कंपनियों को ही सौंपी जाती है।
हालांकि कई देशों में आर्मी विंग ने भी इसमें सहयोग दिया है। भारत में जब सेना, डीआरडीओ, अर्धसैनिक बल और पुलिस, पीपीई तैयार करने के लिए आगे आए, तो फिर उन्होंने पीछे मुड़कर नहीं देखा। न केवल खुद के लिए ये उपकरण बनाए, बल्कि दूसरे संगठनों एवं आम लोगों तक भी इनकी सप्लाई सुनिश्चित की।
लॉकडाउन 1.0 के दौरान करीब 15 लाख पीपीई तैयार कर दिए गए।
डिजाइन पास होते ही रातों-रात शुरू हुआ काम
देश के सबसे बड़े अर्धसैनिक बल सीआरपीएफ के डीआईजी एम. दिनाकरण बताते हैं कि जैसे ही हमारा डिजाइन पास हुआ, हमने अपनी अधिकांश यूनिटों में काम शुरू करवा दिया। देखते देखते लाखों की संख्या में पीपीई तैयार कर दिए गए।
आईटीबीपी ने भी हाई क्वॉलिटी वाले पीपीई का निर्माण शुरू कर दिया। बीएसएफ की यूनिटों में भी मास्क और सूट बनने लगे। आईटीबीपी प्रवक्ता विवेक पांडे के अनुसार, हमारे जवान अपने फेब्रिकेशन सेंटर में पर्सनल प्रोटेक्शन इक्विपमेंट और मॉस्क बना रहे हैं।
इन उपकरणों को तैयार करने से पहले एनआईटीआरए और एम्स के तकनीकी विशेषज्ञों के सामने इनका ट्रायल किया जाता है। डीआरडीओ ने लॉकडाउन के दौरान करीब 20 हजार लीटर सैनिटाइजर तैयार किया था।
दिल्ली पुलिस को दस हजार लीटर सैनिटाइजर दिया गया। इसके अलावा विभिन्न सुरक्षा एजेंसियों को भारी संख्या में मास्क भी मुहैया कराए गए। डीआरडीओ की तर्ज पर विभिन्न केंद्रीय अर्धसैनिक बलों और राज्य पुलिस ने भी अपने स्तर पर पीपीई का निर्माण करना शुरू कर दिया।
सेना के तीनों अंग भी अपने स्टाफ एवं आम लोगों के लिए भारी संख्या में पीपीई उपकरण बना रहे हैं। बॉर्डर के आसपास रह रहे लोगों को अर्धसैनिक बलों ने अपनी यूनिटों में बने पीपीई वितरित किए हैं।