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सिफारिश: भारतीय मिशन और सीमा चौकियों की सुरक्षा को परखना जरूरी; संसदीय समिति ने कहा- खतरों पर देना होगा ध्यान
Sun, 09 Feb 2025 04:08 PM IST
शुभम कुमार
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
Published by: शुभम कुमार
Updated Sun, 09 Feb 2025 04:08 PM IST
सार
संसदीय समिति ने विदेशी मामलों के लिए जारी रिपोर्ट में यह भी बताया कि भारत के पास अभी भी 42 देशों में स्थायी मिशनों की कमी है। इसके लिए मंत्रालय को उन देशों में नए मिशन स्थापित करने में तेजी लाने की सलाह दी गई।
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विदेश मंत्रालय (सांकेतिक तस्वीर)
- फोटो : अमर उजाला
विस्तार
विदेश मामलों की स्थायी संसदीय समिति ने बदलती भू-राजनीतिक स्थिति के कारण विभिन्न देशों में बढ़ते खतरों के मद्देनजर भारत के सभी मिशन और सीमा चौकियों की सुरक्षा का व्यापक आकलन करने की जरूरत बताई है। समिति ने यह भी कहा कि फिलहाल 42 देशों में भारत के स्थायी मिशन नहीं हैं।
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समिति ने माना कि नए मिशन स्थापित करना बहुत आसान काम नहीं है। लेकिन इस दिशा में प्रयास तेज किए जाने चाहिए। खासकर, उन देशों में इसकी ज्यादा जरूरत है, जहां बड़ी संख्या में प्रवासी भारतीय रहते हैं, या फिर जिनसे भारत के महत्वपूर्ण आर्थिक या रणनीतिक हित जुड़े हैं। विदेश मंत्रालय की अनुदान मांगों (2024-25) पर संसदीय समिति की चौथी रिपोर्ट पिछले सप्ताह संसद में पेश की गई। समिति के अध्यक्ष कांग्रेस सांसद शशि थरूर हैं। समिति ने अपनी रिपोर्ट में कहा कि उसने नए मिशन स्थापित करने संबंधी मानदंडों पर भी गौर किया है, जो आर्थिक साझेदारी, रणनीतिक सहयोग, प्रवासी संबंध और बहुपक्षीय कूटनीति पर केंद्रित हैं। रिपोर्ट के मुताबिक, समिति को फुकुओका (जापान), कजान (रूस) और येकातेरिनबर्ग (रूस) जैसे अन्य रणनीतिक स्थानों में मिशन संचालित करने के लिए जारी प्रयासों के बारे में जानकारी मिली है।
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हालिया घटनाओं करती हैं सतर्क
रिपोर्ट के मुताबिक, हालिया घटनाक्रम दर्शाते हैं कि भारतीय कर्मियों की रक्षा, संवेदनशील सूचनाओं की सुरक्षा और राजनयिक कार्यों की निरंतरता सुनिश्चित करने के लिए विदेश स्थित भारतीय मिशन और चौकियों की हिफाजत सर्वोपरि है। इनके सुरक्षा मूल्यांकन की सिफारिश बांग्लादेश जैसे देशों तथा पश्चिम एशिया के कुछ हिस्सों की स्थिति को देखते हुए महत्वपूर्ण हैं।
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